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Monday, 28 August 2017

IBPS RRB 2017 के लिए हिंदी की प्रश्नोतरी

निर्देश (1-5) :नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए. कुछ शब्दों को मोटे अक्षरों में मुद्रित किया गया है, जिससे आपको कुछ प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता मिलेगी. दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त का चयन कीजिए. 
उस रोज बहुत से लोग एक साथ थे - मैदान में बैठे, गुनगुनी धूप का आनन्द लेते हुए, ढलते सूरज के साथ बौद्ध-स्तूप की लम्बी होती छाया धूप के एक बड़े हिस्से को लपक चुकी थी. कुछ देर धूप सेक लेने के बाद पीठ पर चींटियों का अहसास जिन्हें होने लगता, बौद्ध-स्तूप की छाया में सिमट आते. कई युवा जोडे़ छाया की ठंडक का हाथ पकड़ते हुए स्तूप की जड़ तक सरक आए थे. स्तूप के भीतर नंगे पैर चलने के कारण शरीर के भीतर तक घुस चुकी ठंड को बाहर फेंकने के लिए पारिवारिक किस्म के समूहों ने मैदान के उन हिस्सों पर, जहां धूप अपने पूरे ताप के साथ गिर रही थी, दरी बिछाकर खाने के छोटे-बड़े न जाने कितने ही डिब्बे खोले हुए थे. इतना कुछ एक साथ था कि हवा को हवा की तरह अलग से पहचानना भी मुश्किल था. स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे. तभी न जाने कहां से, स्तूप की कौन सी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध-विहार में विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी - लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें! बिना लय ताल के उच्चारित होते कितने ही दोहरावों की एकरसता चुभने वाली थी. दोहराने वाली आवाज को भी उसका बेसुरापन अखरा या नहीं, कहा नहीं जा सकता. पर मात्राओं को घटाते बढ़ाते हुए निर्देश का मजमून थोड़ा बदल चुका था - लड़के-लडकियों का मैदान में बैठना एक साथ मना है. कितने ही युवा जोड़े इस कर्कश उद्घोषणा रूपी गीत के स्थायी के बाद कर्णकटु होकर उठते अंतरे को सुनने से पहले ही खड़े हो चुके थे और यूं ही टहलने लगे थे. यूं ही टहलते हुए एक दूसरे से अचानक सट जाने या अनचाहे टकरा जाने वाली स्थितियाँ भी उन्हें सचेत करने लगी थीं कि नियम की कोई नयी धारा प्रताड़ना की तरह उनके कानों में न पड़ जाए.


 
लेकिन गोद में सिर रखकर लेटा वह लड़का जो अपने पेट पर लैपटॉप रखे हुए है; लैपटॉप की पीठ उसके मुडे़ हुए घुटनों पर टिकी हुई है; आंखें बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल पर जमी हुई हैं, वह वैसे ही लेटे-लेटे अपनी साथिन को मंत्रों के अर्थ बता रहा है. काफी देर से सुन रहे बौद्ध मंत्रों से विषयांतर करते हुए साथिन एक किस्सा बयां करने लगी थी कि एक बार, यह किसी और जगह की बाह है, दो घुटे सिर वाले मुझे लाइन मार रहे थे. लड़के के पास समय भरपूर था. वह साथिन के साथ का हर छोटे से छोटा क्षण भी स्मृतियों में कैद कर लेना चाहता था. पेट और घुटनों के बीच खुली बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल को उसने एक क्लिक से हटा दिया और तिरछी निगाहों से साथिन को ताकने लगा. समय तो साथिन के पास भी भरपूर था पर लड़का उसकी आंखों में एक तरह की हड़बड़ाहट को देख रहा था. लड़के को लगा कि शायद साथिन साथ नहीं. क्या उसके मन को भी उद्घोषणा के तीर ने बींध दिया है या साथिन का मन विहग कहीं गगन विहार करने लगा है? वह उठ कर बैठ गया और चलहकदमी करते दूसरे युवा जोड़ों को देखने लगा. अब जाकर उद्घोषणा के अर्थ उसके भीतर स्पष्ट होने लगे थे. अकस्मात् उसे प्रतीत हुआ उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है. यहां अशांति है. कोई कुछ बोल नहीं रहा लेकिन युवा मन की खदबदाहट का रव मानो कर्णपटों को चाक कर देगा.


1. चींटियों के एहसास से क्या तात्पर्य है? 

(a) लोग चींटियों की तरह थे

(b)चुनचुनाहट होना

(c) घास में चींटिया थीं

(d) धूप काट खाती थी

(e) इनमें से कोई नहीं


2. हवा को हवा की तरह पहचानना क्यों मुश्किल था? 

(a) कई कुछ एक साथ था

(b) हवा चल नहीं रही थी

(c) हवा तेज थी धूप मंद

(d) धूप तेज थी हवा मंद

(e) इनमें से कोई नहीं


3. स्कूली बच्चे किससे खुद को बचा नहीं पा रहे थे? 

(a) पंक्ति से बाहर होने से

(b) धूल धूसरित होने से

(c) अध्यापकों के निर्देशों से

(d) उपरोक्त (a)एवं (d)

(e) उपरोक्त (a), (b) एवं (c) तीनों


4. उद्घोषणा में ‘अंतरे’ का क्या अर्थ है?

(a) गीत का दूसरा सुर छिड़ना

(a) थोड़े अंतराल पर उद्घोषणा होना

(c) आगे होने वाली और उद्घोषणा

(d) प्रताड़ना

(e) इनमें से कोई नहीं


5. लड़का किसकी गोद में सिर रखे हुए था? 

(a) घास

(b) स्तूप

(c) बांह

(d) साथिन

(e) इनमें से कोई नहीं


निर्देश (6-10) : नीचे (a), (b), (c), (d),(e)और (f) में छः कथन दिए गए हैं। इन छहों कथनों को इस तरह व्यवस्थित करिए कि उनसे एक अर्थपूर्ण परिच्छेद बन जाए. फिर उसके बाद दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए. 

(A) उसने कॉफी वाले को कुछ कहा और दस का नोट दिया.

(B) बच्ची ने इशारे से कुछ कहा,

(C) कॉफी वाले ने अजीब सी मुस्कान फेंकी और बड़बड़ाया अब देखना, सारा कुनबा आ धमकेगा,

(D) नजर घुमाई तो एक छोटी सी बच्ची थी, भोला चेहरा, उलझे बाल और फटे कपड़े

(E) स्टेशन पर उसने कॉफी वाले से कॉफी खरीदी और खड़े खडे़ पीने लगा

(F) उसने महसूस किया कि किसी ने बगल से उसके कुर्ते को खींचा


6. पुनर्व्यवस्था के बाद पहला वाक्य कौन सा होगा? 

(a)A

(b)F

(c)E

(d)C

(e) D


7. पुनर्व्यवस्था के बाद तीसरा वाक्य कौन सा होगा? 

(a)D

(b)B

(c)F

(d)C

(e)A


8. पुनर्व्यवस्था के बाद दूसरा वाक्य कौन सा होगा? 

(a)D

(b)B

(c)C

(d)A

(e)F


9. पुनर्व्यवस्था के बाद पांचवां वाक्य कौन सा होगा? 

(a)D

(b)A

(c)B

(d)F

(e)C


10. पुनर्व्यवस्था के बाद चौथा वाक्य कौन सा होगा? 

(a)D

(b)F

(c)C

(d)B

(e)A


निर्देश (11-15) : नीचे कुछ वाक्यांश या शब्द समूह दिए गये हैं. उनके साथ पाँच ऐसे शब्द दिये गये हैं जो पूरे वाक्यांश या शब्द समूह का अर्थ एक शब्द में स्पष्ट कर देते हैं. आपको वह शब्द ज्ञात कर उसको उत्तर के रूप में दर्शाना है. 


11. जो व्यर्थ की बातें करता हो-

(a) बहुभाषी

(b) कुवक्ता

(c) वाचाल

(d) वाकपटु

(e) इनमें से कोई नहीं


12. जो देखने में प्रिय लगता हो- 

(a) समदर्शी

(b) प्रियदर्शी

(c) प्रियपात्र

(d) दर्शनप्रिय

(e) इनमें से कोई नहीं


13. अहसान न मानने वाला- 

(a) कृतज्ञ

(b) कृतघ्न

(c) विश्वासघाती

(d) परोपजीवी

(e) इनमें से कोई नहीं


14. जिसे कठिनाई से जीता जा सके-

(a) विजित

(b) अज्ञेय

(c) अजेय

(d) दुर्जेय

(e) इनमें से कोई नहीं


15. बचपन और जवानी के बीच की अवस्था-

(a) नवयुवा

(b) नवोढ़ा

(c) वयः संधि

(d) वयस्कता

(e) इनमें से कोई नहीं

 
Solution


S1. Ans(b)
S2. Ans(a)
S3. Ans(b)
S4. Ans(b)
S5. Ans(d)
S6. Ans(c)
S7. Ans(a)
S8. Ans(e)
S9. Ans(e)
S10. Ans(d)
S11. Ans(c)
S12. Ans(b)
S13. Ans(b)
S14. Ans(d)
S15. Ans(c)

Sunday, 27 August 2017

IBPS RRB 2017 के लिए हिंदी की प्रश्नोतरी

निर्देश (1-5) : निम्नलिखित गद्यांश को सावधानीपूर्वक अध्ययन कीजिये तथा प्रश्नों के उत्तर दीजिये. 

शीलयुक्त व्यवहार मनुष्य की प्रकृति और व्यक्तित्व को उद्घटित करता है. उत्तम, प्रशंसनीय और पवित्र आचरण ही शील है. शीलयुक्त व्यवहार प्रत्येक व्यक्ति के लिए हितकर है. इससे मनुष्य की ख्याति बढ़ती है. शीलवान् व्यक्ति सबका हृदय जीत लेता है. शील-युक्त व्यवहार से कटुता दूर भागती है. इससे शंका और संदेह की स्थितियाँ कभी उत्पन्न नहीं होती. इससे सुखद वातावरण सृजित होता है जिसमें सभी प्रसन्नता का अनुभव करते हैं. शीलवान् व्यक्ति अपने संपर्क में आने वाले सभी लोगां को सुप्रभावित करता है. शील इतना प्रभुत्वपूर्ण होता है कि किसी कार्य के बिगड़ने की नौबत ही नहीं आती.

अधिकारी-अधीनस्थ, शिक्षक-शिक्षार्थी, छोटे-बड़ों आदि सभी के लिए शीलयुक्त व्यवहार समान रूप से आवश्यक है. शिक्षार्थी में शील का अभाव है तो यह अपने शिक्षक से वांछित शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकता. शीलवान् अधिकारी या कर्मचारी में आत्मविश्वास की वृद्धि स्वतः ही होने लगती है और साथ-ही-साथ उसके व्यक्तित्व में शालीनता आ जाती है. इस अमूल्य गुण की उपस्थिति में अधिकारी वर्ग और अधीनस्थ कर्मचारियों के बीच, शिक्षकगण और विद्यार्थियों के बीच तथा शासक और शासित के बीच मधुर एवं प्रगाढ़ संबंध स्थापित होते हैं और प्रत्येक वर्ग की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है. इस गुण के माध्यम से छोटे-से छोटा व्यक्ति बड़ों की सहानुभूति अर्जित कर लेता है.

शील कोई दुर्लभ और दैवी गुण नहीं है. इस गुण को अर्जित किया जा सकता है. पारिवारिक संस्कार इस गुण को विकसित और विस्तारित करने में बड़ी भूमिका अदा करते हैं. मूल भूमिका तो व्यक्ति स्वयं अदा करता है। चिंतन, मनन, सत्संगति, स्वाध्याय और सतत अभ्यास से इस गुण की सुरक्षा और इसका विकास होता है. सुसंस्कृत मनुष्य के चरित्र का यह शील अभिन्न अंग है. यह गुण मनुष्य को सच्चे अर्थों में मानव बनाता है. इस अमूल्य गुण को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना प्रत्येक मनुष्य का परम कर्त्तव्य है. इससे मनुष्य की गरिमा बढ़ती है और उससे व्यक्तित्व में चार चाँद लग जाते हैं.


1. शीलवान् व्यक्ति अपने संपर्क में आने वाले लोगों को कैसे प्रभावित करता है? 

(a) साधन सुलभ कराने के द्वारा प्रभावित करता है

(b) लोगां की निःस्वार्थ सेवा द्वारा प्रभावित करता है

(c) सबको गर्मजोशी से स्वागत द्वारा प्रभावित करता है

(d) सुखद वातावरण के सृजन द्वारा प्रभावित करता है

(e) इनमे से कोई नहीं


2. शील-गुण के कारण आधिकारियों और कर्मचारियों में-

(a) मधुर एवं प्रगाढ़ संबंध स्थापित होता है

(b) कटुता एवं वैमनस्य स्थापित होता है

(c) परस्पर संदेह बढ़ता है

(d) स्नेह घटने लगता है

(e) इनमे से कोई नहीं


3. शील-गुण किस प्रकार अर्जित किया जा सकता है? 

(a) मित्रां के साथ समय बिताने से

(b) प्रतिदिन नियमित व्यायाम से

(c) स्वयं के चिंतन, मनन, सत्संगति एवं सतत अभ्यास से

(d) ख्याली पुलाव पकाने से

(e) इनमे से कोई नहीं


4. शीलयुक्त व्यवहार प्रत्येक व्यक्ति के लिए हितकर है क्योंकि इससे 

(a) बहुत अधिक सम्पत्ति मिलती है

(b) कटुता दूर होती है

(c) दीर्घ आयु प्राप्त होती है

(d) पुण्य प्राप्त होता है

(e) इनमे से कोई नहीं


5. सुसंस्कृत मनुष्य के चरित्र का शील किस प्रकार अभिन्न अंग है.

(a) क्योकि इससे मनुष्य की गरिमा बढ़ती है

(b) क्योकि इससे धन प्राप्त होता है.

(c) क्योकि यह गुण मनुष्य को सच्चे अर्थों में मानव बनाता है

(d) क्योकि उससे व्यक्तित्व में चार चाँद लग जाते हैं

(e) इनमे से कोई नहीं



निर्देश (6-10): निम्नलिखित अनुच्छेदों में रिक्त स्थान दिए गए है प्रत्येक प्रश्न के लिए पांच विकल्प दिए गए है. अनुच्छेद के विषय को समझने के लिए उसे सावधानीपूर्वक अध्ययन कीजिये और प्रश्नों के उत्तर दीजिये. 


महँगाई की समस्या का ............(6)............ करने के लिए यह आवश्यक है कि जनसंख्या वृद्धि पर तुरन्त रोक लगाई जाए ..........(7).......... को बढ़ाने के लिए भरसक ...........(8)............ किए जाएँ, सरकारी योजनाओं को ढंग से चलाने के लिए ..............(9)............. दिया जाए, करों की वृद्धि को रोका जाए, भ्रष्टाचार का पूर्णतया .............(10)............. किया जाए, तभी जनता इस महँगाई से मुक्त हो सकती है.

6. (a) समाधान

(b) संधान

(c) लोप

(d) शोध

(e) इनमे से कोई नहीं

7. (a) निर्माण

(b) उत्पादन

(c) सृजन

(d) निष्पादन

(e) इनमे से कोई नहीं


8. (a) परिवर्तन

(b) सायाम

(c) उद्यम

(d) प्रयत्न

(e) इनमे से कोई नहीं


9. (a) प्रोत्साहन

(b) उत्साह

(c) साहस

(d) प्रेरणा

(e) इनमे से कोई नहीं


10. (a) सम्मेलन

(b) विस्थापन

(c) उन्मूलन

(d) भेदन

(e) इनमे से कोई नहीं


निर्देश (11-15) :नीचे प्रत्येक प्रश्न में (a), (b), (c) और (d) क्रमांक में चार शब्द दिए गए हैं जिनमें से एक में वर्तनी संबंधी त्रुटि हो सकती है। उस त्रुटियुक्त शब्द का क्रमांक ही आपका उत्तर होगा। यदि चारों शब्दों की वर्तनी सही है तो उत्तर दीजिए (5) अर्थात् ‘सभी सही है’। 

11. (a) खलासी

(b) गामिनी

(c) इकयासी

(d) किलकारी

(e) सभी सही हैं


12. (a) कुंडलिनी

(b) गठीला

(c) जामिनी

(d) ऐतिहासिक

(e) सभी सही हैं


13. (a) काबुली

(b) अगाही

(c) चितवन

(d) ठगिनी

(e) सभी सही हैं


14. (a) अतीव्रष्टी

(b) कलूटा

(c) गोपिका

(d) क्षमित

(e) सभी सही हैं


15. (a) चमत्कारित

(b) छलित

(c) किर्तीमान

(d) ऊसुल

(e) सभी सही हैं



Solution


S1. Ans.(d)

S2. Ans.(a)

S3. Ans.(c)

S4. Ans.(b)

S5. Ans.(c)

S6. Ans.(a)

S7. Ans.(b)

S8. Ans.(d)

S9. Ans.(a)

S10. Ans.(c)

S11. Ans.(c)

S12. Ans.(e)

S13. Ans.(b)

S14. Ans.(a)

S15. Ans.(c)

Banking Awareness Questions in Hindi for IBPS RRBs PO and Clerk Exam 2017

Q1. __________ एक परिसंपत्ति, जिसमे लीस परिसंपत्तियां शामिल है, बैंक के लिए आय उत्पन्न करना समाप्त करने पर एक गैर निष्पादित परिसंपत्ति हो जाता है.

(a) NPA

(b) KCC

(c) NPV

(d) GDP

(e) GNP


Q2. NPA से तात्पर्य है - 

(a) National ­performing Assets

(b) New ­performing Assets

(c) Non ­production Assets

(d) Non ­performing Assembly

(e) Non ­performing Assets


Q3. MUDRA एक वित्तीय संस्थान है जिसकी स्थापना भारत सरकार ने माइक्रो यूनिटों उद्यमों के विकास और पुनर्वित्त के लिए किया है. MUDRA में "A" से क्या तात्पर्य है?

(a) Agency

(b) Association

(c) Assembly

(d) Agent

(e) Alert


Q4. MUDRA से क्या तात्पर्य है - 

(a) Micro Units Development & Refinance Agent

(b) Medium Units Development & Refinance Association

(c) Micro Units Department & Refinance Agency

(d) Micro Units Development & Refinance Agency

(e) Micro Unique Development & Refinance Assembly


Q5. भारत, एशिया में पहला ऐसा देश है जिसने निर्यात को बढ़ावा देने में ईपीजेड मॉडल की प्रभावशीलता को पहचाना. EPZ से क्या तात्पर्य है -

(a) Export Point Zone

(b) External Processing Zone

(c) Export Production Zone

(d) Export Processing Zone

(e) Export Processing Zonal


Q6. न्यू डेवलोपमेंट बैंक (एनडीबी) का उद्देश्य ब्रिक्स, उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों में विकास परियोजनाओं के लिए संसाधनों को एकत्र करना है. न्यू डेवलोपमेंट बैंक (एनडीबी) का मुख्यालय कहाँ स्थित है?

(a) डरबन, दक्षिण अफ्रीका

(b) ब्रासीलिया, ब्राजील

(c) मास्को, रूस

(d) शंघाई, चीन

(e) नई दिल्ली भारत


Q7. 912.7 मिलियन डॉलर की प्रारंभिक राशी के साथ, अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ(International Development Association) की शुरुआत ____________ को की गयी.

(a) 24 सितम्बर 1960

(b) 17 दिसम्बर1920

(c) 22 नवम्बर 1959

(d) 23 मई 1919

(e) 15 अक्टूबर 1945


Q8. एनआईबीएम(NIBM) ____________________ में, बैंक प्रबंधन में अनुसंधान, प्रशिक्षण, शिक्षा और परामर्श के लिए एक स्वायत्त शीर्ष संस्थान के रूप में, भारत सरकार के परामर्श पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा स्थापित किया था.

(a) 1982

(b) 1949

(c) 1921

(d) 1934

(e) 1969


Q9. एनआईबीएम भारत में बैंकिंग उद्योग को नई दिशा देने और उद्योगो को राष्ट्रीय विकास के लिए एक अधिक लागत प्रभावी उपकरण बनाने के लिए एक वृहद् दृष्टिकोण का हिस्सा है. NIBM से क्या तात्पर्य है-

(a) Non-Organisation Institute of Bank Management

(b) National Institute of Bureau Management

(c) National Investment of Bank Management

(d) National Institute of Bank Management

(e) दिए गए विकल्पों में से कोई भी सत्य नहीं है


Q10. एनआईबीएम, एक स्वायत्त शैक्षणिक संस्था है जोकि एक बोर्ड द्वारा संचालित है, और यह उच्चतम नीति निर्धारित करने वाली संस्था है. NIBM का मुख्यालय कहाँ स्थित है?

(a) नासिक, महाराष्ट्र

(b) पुणे, महाराष्ट्र

(c) मुंबई, महाराष्ट्र

(d) कोल्हापुर, महाराष्ट्र

(e) नागपुर, महाराष्ट्र


Q11. ‘मुद्रा’ कितनी क्षेणीयों में ऋण प्रदान करता है?

(a) दो

(b) एक

(c) तीन

(d) चार

(e) छ:


Q12. इनमें से कौन सा मुद्रा बैंक की ऋण श्रेणी नहीं है?

(a) शिशु

(b) अरुण

(c) किशोर

(d) तरुण

(e) दिए गए विकल्पों में से कोई भी सत्य नहीं है


Q13. आर्थिक विकास के लिए एसईजेड को एक शीर्ष संस्था बनाने के उद्देश्य से एसईजेड नीति _________ में घोषित की गई थी, जिसके अंतर्गत एकल खिड़की पर सभी क्लियरेंस के साथ केंद्रीय और राज्य स्तर पर गुणवत्ता के बुनियादी ढांचे और एक आकर्षक राजकोषीय पैकेज को समर्थन कारना है.

(a) दिसम्बर 1999

(b) अक्टूबर 2010

(c) जनवरी 2005

(d) जुलाई 1991

(e) अप्रैल 2000


Q14. SEZ अधिनियम का मुख्य उद्देश्य है-

(a) अतिरिक्त आर्थिक गतिविधि का निर्माण

(b) माल और सेवाओं के निर्यात का प्रचार

(c) घरेलू और विदेशी स्रोतों से निवेश का प्रचार

(d) रोजगार के अवसरों का सृजन

(e) उपरोक्त सभी


Q15. 31 मार्च 2005 से प्रभावी,  एक ______________ होगा, जो 12 महीनों से कम या उसके समान अवधि के लिए एनपीए रहा है. 

(a) अधीनस्थ संपत्ति(Sub­standard Assets)

(b) लाभ परिसंपत्तियां (Profit Assets)

(c) संदेहास्पद परिसंपत्तियां (Doubtful Assets)

(d) हानि परिसंपत्तियां (Loss Assets)

(e) दिए गए विकल्पों में से कोई भी सत्य नहीं है





Solutions



S1. Ans.(a)

Sol. Non ­performing Assets (NPA) is an asset, including a leased asset, becomes non­ performing when it ceases to generate income for the bank.


S2. Ans.(e)

Sol. NPA stands for Non ­performing Assets.


S3. Ans.(a)

Sol. MUDRA, which stands for Micro Units Development & Refinance Agency Ltd, is a financial institution being set up by Government of India for development and refinancing micro units’ enterprises.


S4. Ans.(d)

Sol. MUDRA, which stands for Micro Units Development & Refinance Agency Ltd, is a financial institution being set up by Government of India for development and refinancing micro units’ enterprises. It was announced by the Hon’ble Finance Minister while presenting the Union Budget for FY 2016. The purpose of MUDRA is to provide funding to the non-corporate small business sector through various Last Mile Financial Institutions like Banks, NBFCs and MFIs.


S5. Ans.(d)

Sol. India was one of the first in Asia to recognize the effectiveness of the Export Processing Zone (EPZ) model in promoting exports, with Asia's first EPZ set up in Kandla, Gujarat in 1965.


S6. Ans.(d)

Sol. Shanghai, China is the headquartered of New Development Bank (NDB).


S7. Ans.(a)

Sol. With an initial funding of $912.7 million, IDA was launched on September 24, 1960 with 15 signatory countries - Australia, Canada, China, Germany, India, Italy, Malaysia, Norway, Pakistan, Sudan, Sweden, Thailand, United Kingdom, United States, and Vietnam.


S8. Ans.(e)

Sol. National Institute of Bank Management (NIBM) was established in 1969 by the Reserve Bank of India, in consultation with the Government of India, as an autonomous apex institution for research, training, education and consultancy in bank management.


S9. Ans.(d)

Sol. NIBM stands for National Institute of Bank Management.


S10. Ans.(b)

Sol. Pune, Maharashtra is the headquartered of National Institute of Bank Management (NIBM).


S11. Ans.(c)

Sol. MUDRA gives loan in three categories. The categories have been named ‘Shishu’, ‘Kishor’ and ‘Tarun’.


S12. Ans.(b)

Sol. Arun is not a loan category of MUDRA bank.


S13. Ans.(e)

Sol. India was one of the first in Asia to recognize the effectiveness of the Export Processing Zone (EPZ) model in promoting exports, with Asia's first EPZ set up in Kandla, Gujarat in 1965. With a view to overcome the shortcomings experienced on account of the multiplicity of controls and clearances; absence of world-class infrastructure, and an unstable fiscal regime and with a view to attract larger foreign investments in India, the Special Economic Zones (SEZs) Policy was announced in April 2000.


S14. Ans.(e)

Sol. The main objectives of the SEZ Act are-

(a) Generation of additional economic activity

(b) Promotion of exports of goods and services;

(c) Promotion of investment from domestic and foreign sources;

(d) Creation of employment opportunities;

(e) Development of infrastructure facilities


S15. Ans.(a)

Sol. With effect from 31 March 2005, a sub­standard asset would be one, which has remained NPA for a period less than or equal to 12 months. In such cases, the current net worth of the borrower/guarantor or the current market value of the security charged is not enough to ensure recovery of the dues to the banks in full.

Saturday, 26 August 2017

IBPS RRB 2017 के लिए हिंदी की प्रश्नोतरी

निर्देश (1-5) : नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए. कुछ शब्दों को मोटे अक्षरों में मुद्रित किया गया है, जिससे आपको कुछ प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता मिलेगी. दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त का चयन कीजिए.

 

मैथिलीशरण गुप्त गांधी युग के प्रतिनिधि कवि हैं- अपने जीवन के प्रौढ़काल में ही वे इस गौरव के अधिकारी हो गए थे. गांधी युग का प्रतिनिधित्व एक सीमा तक सम्पूर्ण आधुनिक काल का प्रतिनिधित्व भी माना जा सकता है. गांधी युग की प्रायः समस्त मूल प्रवृत्तियां-राष्ट्रीय, सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन-गुप्तजी के काव्य में प्रतिफलित हैं. यह प्रतिफलन प्रत्यक्ष भी है और परोक्ष भी. कुछ रचनाओं में युग-जीवन का स्वर मुखर है और उनमें वातावरण की हलचल का प्रत्यक्ष चित्रण किया गया हैं. इनमें कवि राष्ट्रकवि के दायित्व का भी पालन करता है. कुछ अन्य रचनाओं में युग-चेतना अत्यंत प्रखर है परंतु वह प्रच्छन्न है। गुप्तजी के संस्कार मूलतः सामंतीय थे और उनके घर का वातावरण वैष्णव था, तथापि वे समय के साथ चलने का निरन्तर प्रयत्न करते थे तथा देश के विभिन्न आंदोलनों को समझने का भी प्रयत्न करते थे. उनकी प्रतिक्रिया प्रायः प्रखर और प्रबल होती थी. गांधी युग की समस्याओं का चित्रण प्रेमचंद ने भी किया और अपने ढंग से प्रसाद ने भी. प्रेमचंद की दृष्टि बहिर्मुखी थी, उनकी चेतना सामाजिक-राजनीतिक थी. प्रसाद की दृष्टि अंतर्मुखी थी और उनकी चेतना एकांत रूप में सांस्कृतिक थी-गांधी युग की प्रायः सभी प्रमुख समस्याओं को उन्होंने ग्रहण किया, परंतु उनके बहिरंग में उनकी रूचि नहीं थी. अपने नाटकों में प्रसाद ने उन्हें पूर्णतः सांस्कृतिक रूप में प्रस्तुत किया है और कामायनी में आध्यात्मिक धरातल पर. अपने उपन्यासों में प्रसाद उन्हें राजनीतिक-सामाजिक धरातल पर ग्रहण करते हैं परंतु शीघ्र ही उनके बहिरंग रूपों को भेदकर उनमें निहित सांस्कृतिक तत्वों का चित्रण भी करने लगते हैं. गुप्तजी की स्थिति मध्यवर्ती है, उनका दृष्टिकोण राष्ट्रीय-सांस्कृतिक है. उनमें न तो प्रेमचंद के समान व्यावहारिकता का आग्रह है और न प्रसाद की तरह दार्शनिकता का. उनमें सगुण तत्व अधिक है. प्रेमचंद में धर्म-भावना का अभाव है तो प्रसाद में लोकभावना का. गुप्तजी में लोक चेतना का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत अधिक मिलता है.


1. गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है-

(a) गांधी-युग की काव्य चेतना

(b) मैथिलीशरण गुप्त का काव्य

(c) प्रेमचंद का साहित्य

(d) आधुनिक हिन्दी काव्य की मूल प्रवृत्तियां

(e) इनमें से कोई नहीं


2. सही वक्तव्य कौन-सा है?

(a) प्रसाद गांधी- युग के प्रतिनिधि कवि हैं?

(b) मैथिलीशरण गुप्त एक सीमा तक संपूर्ण आधुनिक काल का प्रतिनिधित्व करते हैं

(c) प्रेमचंद के साहित्य में गांधी युग की समस्त मूल प्रवृत्तियों का प्रतिफलन है

(e) गुप्तजी की रचनाओं में वातावरण की हलचल का परोक्ष चित्रण है

(e) इनमें से कोई नहीं


3. गद्यांश में इस शब्द का प्रयोग नहीं है-

(a) प्रच्छन्न

(b) जन-काव्य

(c) बहिरंग

(d) लोक-चेतना

(e) इनमें से कोई नहीं


4. सही वक्तव्य कौन-सा है?

(a) प्रसाद के घर का वातावरण वैष्णव था

(b) गुप्तजी के संस्कार सामंतीय थे

(c) प्रेमचंद में युग-चेतना अत्यंत प्रखर है

(d) गांधी युग की एक मूल प्रवृत्ति धार्मिक आंदोलन की थी

(e) इनमें से कोई नहीं


5. सही वक्तव्य कौन-सा है?

(a) प्रेमचंद की दृष्टि सांस्कृतिक थी

(b) प्रसाद देश की विभिन्न आंदोलनों को समझने का प्रयत्न करते थे

(c) प्रेमचंद अपने समय के साथ चलने का प्रयत्न करते थे

(d) गुप्तजी के काव्य में गांधीयुग की प्रवृतियों का परोक्ष प्रतिफलन भी है

(e) इनमें से कोई नहीं


निर्देश (6-10) : नीचे दिए गए प्रत्येक प्रश्न में एक रिक्त स्थान दिया गया है और उसके नीचे पांच शब्द दिए गए हैं. इनमें से कोई एक उस रिक्त स्थान पर रख देने से वह वाक्य एक अर्थपूर्ण वाक्य बन सकता हैं, सही शब्द ज्ञातकर उसके क्रमांक को उत्तर के रूप में अंकित कीजिए, दिए गए शब्दों में से सर्वाधिक उपयुक्त शब्द का चयन कीजिये.


6. लोकतंत्र राज्य जनता में राष्ट्रीय भावना ............. रूप से जागरित करता है.

(a) स्वाभाविक

(b) अस्वाभाविक

(c) संकीर्ण

(d) अनिरंजित

(e) इनमें से कोई नहीं


7. अन्न की बचत करना देश की उन्नति में ................ होना है।

(a) बाधक

(b) साधक

(c) सहायक

(d) अवरोधक

(e) इनमें से कोई नहीं


8. भारतीय कलाकारों ने जीवन के अत्यन्त ..................... चित्र उतारे हैं.

(a) मनोरम

(b) निर्मम

(c) कोमल

(d) निरापद

(e) इनमें से कोई नहीं


9. गांधीजी का अर्थशास्त्र धर्म और ................. पर आधारित है.

(a) राज्य

(b) न्याय

(c) प्रशासन

(d) यश

(e) इनमें से कोई नहीं


10. पुरूषों को स्त्रियों का प्रेम ............... प्राप्त है.

(a) वर-स्वरूप

(b) कर-स्वरूप

(c) धन-स्वरूप

(d) ऋण-स्वरूप

(e) इनमें से कोई नहीं


निर्देश (11-15) : नीचे दिया गया प्रत्येक वाक्य चार भागों में बाँटा गया है (a), (b), (c), और (d) क्रमांक दिए गए हैं. आपको यह देखना है कि वाक्य के किसी भाग में व्याकरण, भाषा, वर्तनी, शब्दों के गलत प्रयोग या इसी तरह की कोई त्रुटि तो नहीं है. त्रुटि अगर होगी तो वाक्य के किसी एक भाग में ही होगी. उस भाग का क्रमांक ही उत्तर है. अगर वाक्य त्रुटिरहित है तो उत्तर (e) दीजिए।


11. भारतीय किसान आजीवन-भर (a)/ पूरी मेहनत करता है (b)/ पर साहुकारों के चंगुल से (c)/ नहीं निकल पाता (d)/ कोई त्रुटि नहीं (e)


12. साहित्यकार का दायित्व (a)/बल्कि उनके कारणों का (b)/ विवेचन करते हुए श्रेयस मार्ग की ओर ले जाना है (c)/ वस्तुस्थिति का यथातथ्य चित्रण मात्र प्रस्तुत कर देना ही नहीं (d)/ कोई त्रुटि नहीं (e)


13. जनसंख्या में (a)/ हम अपने जीवन को (b)/ सुखी और संतुष्ट नहीं बना सके (c)/ असाधारण वृद्धि के कारण (d)/ कोई त्रुटि नहीं (e)


14. स्वार्थ के वशीभूत होकर (a)/ मानव रह बात को (b)/ अपने मनोनुकूल (c)/ देखना चाहता है (d)/ कोई त्रुटि नहीं (e)


15. सामज-सुधारकों के (a)/ दहेज प्रथा ने (b)/ प्रयत्नों के बावजूद (c)/ अत्यन्त विकट रूप धारण कर लिया है (d)/ कोई त्रुटि नहीं (e)


Solution


S1. Ans.(b)

S2. Ans.(b)

S3. Ans.(b)

S4. Ans.(b)

S5. Ans.(d)

S6. Ans.(a)

S7. Ans.(c)

S8. Ans.(a)

S9. Ans.(b)

S10. Ans.(a)

S11. Ans.(a)

S12. Ans.(d)

S13. Ans.(d)

S14. Ans.(c)

S15. Ans.(b)

Saturday, 4 February 2017

हिन्दी विशेष नोट्स

हिन्दी विशेष नोट्स







































































































































































































































































































































अवधी किस भाषा की बोली हैब्रजभाषा
ढँूढाणी बोली हैपूर्वी राजस्थान की
संविधान की आठवीं अनुसूची मंे भाषाआंे की संख्या है22
हिन्दी दिवस मनाय जाता है। 14 सितम्बर को
एक भाषा दूसरी भाषा क्यों लेती है।श्शब्दावली
भाषा किसकी देन है।सभ्यता की
सर्वप्रथम भाषा का प्रयोग हुआसांकेतिक रूप में
किसी क्षेत्र विशेष में बोली जाने वाली भाषाबोली
मानक हिन्दी  से क्या तात्पर्य हैसाहित्यिक पुस्तकों की भाषा
साहित्य में प्रयुक्त होने वाली संस्कृत भाषालौकिक संस्कृत
हिन्दी भाषा का जन्म हुआपाली प्राकृत से
संस्कृत भाषा में कितने शब्द है24
हिन्दी कौन सी भाषा का शब्द हैफारसी
हिन्दी एक भाषा रूप का नहींए बल्कि एक परम्परा का नाम है। किसने कहाहजारी प्रसाद द्विवेदी ने
पाली किस भाषा का अपभ्रंश हैसंस्कृत भाषा का
खड़ी बोली को किसने देशी हिन्दुस्तानी कहाग्रियर्सन ने
पुरानी बंगला किस और नाम से जानी जाती है।ब्रजबुलि
स्वयंभू ने किस भाषा को देशी भाषा कहाअपभ्रंश को
किस पुस्तक में हिन्दी का सर्वप्रथम उल्लेख हुआरामचरित मानस में
गाँधी जी ने राष्ट्र भाषा के कितने लक्षण बतायें5
कौरवी किस बोली का प्रचलित नाम है।खड़ी बोली
संस्कृत के समय में कौन सी भाषा जन भाषा के रूप में प्रचलित थीपाली
ब्रजभाषा किस रूप में सर्वाधिक प्रसिद्ध है।काव्य भाषा
कौन सी भाषा में लिंग भेद नहीं हैनेपाली  एवं बिहारी
भारतीय आर्य भाषा में ट वर्ग की ध्वनियाँ देन है।द्रविड भाषा की
अपभ्रंश का वाल्मीकी कहा गयसा है।स्वयंभू
श्री लंका मंे किस भाषा को मागधी कहा जाता है।पालि
स्वरों को अन्य किस नाम से जाना जाता हैहल
नवीन विकसित ध्वनियाँ हैश, स
क, ग, ज, फ, ध्वनियाँ किस भाषा की देन है।फारसी, अरबी भाषा की
ब्रजभाषा को सूरदास ने अवधी को तुलसीदास ने मैथिली को विद्यापति मिश्र ने चरमोत्कर्ष पर पहुँचाया
संक्षेपीकरण का अर्थ है।स्वर लेखन
हिन्दी भाषा में किसी एक सूत्र बिन्दु अथवा संक्षिप्त विषय को विस्तार से प्रस्तुत करनापल्लवन कहलाता है।
किसी विशेष जानकारी के विवरण का एक निश्चित आधार पर प्रस्तुत करनाप्रारूपण कहलाता है।
जब किसी पत्र को उसके मूल रूप में आगे किसी अधिकारी का भेजना हो तो कैसे भेजेंगेप्रतिवेदन के साथ
जब कोई मंत्रालय अपने ही प्रभावांे एंव शाखाओं के साथ पत्र व्यवहार करता है तो ऐसे पत्र को क्या कहते है।ज्ञापन
अपने से ऊपर वाले अधिकारी की छुट्टी के लिए लिख गये प्रार्थना पत्र में अपने  हस्ताक्षर के ऊपर क्या लिखते हैविनीत
जो पत्र एक मंत्रालय अनेक मंत्रालयों तथा राज्य सरकारी तक भेजता है उसे कहते हैपरिपत्र
वह पत्र जिसके द्वारा याद दिलाया जाता है कि अमुक पत्र के उत्तर की प्रतिक्षा है उसे कहते हैअनुस्मारक
अर्द्ध सरकारी पत्र का प्रयोग किसलिए किया जाता हैअधिकारियों द्वारा आपसी विचार विमर्श के लिए
पुस्तक विक्रेता को लिखे गये पत्र में लिखने वाले के हस्ताक्षर के ऊपर क्या लिखा जाना चाहिए।भवदीय
अपने से छोटे भाई को पत्र लिखते समय किस प्रकार सम्बोधित करना चाहिए।प्रिय
जब कोई पत्र प्रेषक को लौटाया जाए अथवा दूसरे मंत्रालय को भेजा जाए ताकि उसका निपटान हो सके तो उसे कहते हैपृष्ठांकन
सरकारी पत्र की भाषा होनी चाहिएऔपचारिक
हिन्दी साहित्य के प्रारम्भिक काल को आचार्य शुक्ल ने कहावीरगाथा काल
हिन्दी साहित्य की प्रथम कहानी हैइन्दुमती
निर्गुण भक्ति काव्य के सर्वप्रमुख कवि है।कबीर
कबीरदास की भाषा थीराधुक्कडी
राष्ट्रकवि हैमैथिली शरण गुप्त
छायावासद के प्रवर्तक हैंजयशंकर प्रसाद
रामचरित मानस की भाषा हैअवधी
कवि नागार्जुन का वास्तविक नाम  है।वैद्यनाथ मित्र
रश्मिरथी का नायक हैकर्ण
जयशंकर प्रसाद की सर्वश्रेष्ठ रचना हैकामायनी
महाकाव्य में सर्ग होते हैआठ
भूषण किस रस कवि थेवीर रस के
शकुन्तला पुत्री थीविश्वामित्र की
रामचरित मानस की भाषा हैअवधी
कबीर शिष्य थे।रामानन्द के
हिन्दी का आदि कवि हैस्वयंभू
भारतीय काव्य शास्त्र मंे प्रबंधकाव्य के भेद होते है।तीन
हिन्दी  के प्रथम मौलिक उपन्यासकार हैश्री निवास दास
पद्मावत किसके द्वारा लिखा गयाजायसी एवं भाषा अवधी में
प्रेमचन्द का अधूरा उपन्यास हैमंगलसूत्र
होरी पात्र हैगोदान का
गांगेय किसे कहा जाता हैभीष्म
ऐ मेरे वतन के लोगों के रचयिताकवि प्रदीप
किस आचार्य ने रसों का संख्या आठ मानी है।भरतमुनि
आधुनिक युग की मीरामहादेवी वर्मा
सगुण भक्ति के विरोधी थेकबीर
पृथ्वी राज रासों किस काल की रचना है।आदिकाल
उपन्यास सम्राट की उपाधि किस दी गयीप्रेमचन्द
विश्वामित्र की तपस्या किसने भंग की थीमनेका
अग्निबीज रचना में प्रधान समस्या है।चुनावी समस्या
हिन्दी गद्य के जन्मदाता माने जाते हैंभारतेन्दु हरिशचन्द्र
हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल का प्रारम्भ माना जाता है1850 ई0
सत्यार्थ प्रकाश की भाषा है।हिन्दी
बिहारी सतसई तथा विनय पत्रिका की भाषाब्रजभाषा
किस ग्रन्थ को आल्हाखण्ड कहते हैंपरमाल रासा
वीरगाथा काल के श्रेष्ठ कवि थेचन्दवर दायी
अपभ्रंश में कृष्ण काव्य के प्रणेतापुष्पदन्त

 

पर्यायवाची शब्द

पर्यायवाची शब्द













































































































































































































































































































































1-अग्निअनल
2-अमृतअमिय
3-आकाशगगन
4-आँखईक्षीण
5-आमरसाल
6-इन्द्रशुमात्रा
7-कमलपुष्कर
8-कामदेवमन्मथ
9-कुबेरधनंद
10-गणेशगौरीसुवन
11-गंगासरसरि
12-घरगृह
13-घोड़ाअश्व
14-चन्द्रमाशशि
15-तलवारखड्ग
16-दिनवासर
17-पानीजल
18-पुत्रीतनुजा
19-पुत्रतनुज
20-पर्वतशैल
21-पृथ्वीभू
22-पत्नीदारा
23-पक्षीखग
24-बिजलीचपला
25-बादलघन
26-ब्रह्माअज
27-भाराभृग
28-भगवानजगदीश
29-महादेवशंकर
30-मधुशहद
31-यमुनाकालिन्दी
32-रातरैन
33-राक्षसदानव
34-सागरसमुद्र
35-राजानृप
36-लक्ष्मीरमा
37-वस्त्रअम्बर
38-वायुसमीर
39-वृक्षपत्री
40-बांणशर
41-सुरदेवता
42-पार्वतीउमा
43-सुमनफूल
44-सर्पसाँप
45-सरस्वतीगिरा
46-स्त्रीकामिनी
47-स्वर्गसुरलोक
48-सोनाहेम
49-सारंगस्त्री
50-सूर्यरवि
51-हाथीगज
52-हिरणमृग
53-दूधक्षीर
54-धनुषकोदण्ड
55-ब्राह्मणद्विज

 

Friday, 3 February 2017

एक शब्द के अनेक शब्द

एक शब्द के अनेक शब्द



















































































































































































































































































































































































































































































































































































वाक्यएक शब्द
आगे-आगे चलने वालाअग्रसर
आगे-आगे सोचने वालाअग्रसोची
बहुत दूर तक देखने वालादूरदर्शी
कंठ तक डूबा हुआआकंठनिमग्न
सिर से पैर तकआपादमस्तक
हिमालय से सेतुबन्ध (रामेश्वरम्) तकआसेतुहिमाचल
इतना ही पर्याप्त है।इत्यलम्
जिससे ईष्र्या की गयी होईषित
ईष्र्या के योग्यईष्र्य
उद्देश्य पूर्ति  के लिए प्रयत्नशीलईहार्थी
जिस पर उपकार किया गया होउपकृत
उत्तेजित कर देने वालाउत्तेजक
स्मृति-स्वरूप दी जाने वाली भंेटउपायन
उदाहरण के रूप में रखा हुआउदाहृत
जिसका चरित्र उदार हैउदाचरित
जिसका स्वाद कसैला होकषाद
मुनियों द्वारा पहनी जाने वाली लंगोटकौपीन
अलग-अलग कोटियों में डालने की क्रियाकोटिकरण
विवाह के पूर्व की अवस्थाकौमार्यावस्था
जो पुरूषत्व -विहीन होक्लीव
कड़वी बातंे बोलने वालाकटुभाषी
कष्ट देने वालाकष्टप्रद
काम करने वालासक्रिय, कर्मशील
एकता की भावनाऐक्य
कण्टकों से घिरा हुआकण्टकाकीर्ण
थोड़ा साकिंचत्
बहुत अधिक दान देने वालाओढरदानी
बड़े वंश मंे उत्पन्नउच्चकुलोद्रभव
जो राग भोग मंे मस्त रहेकामी
जो कुशल की अभिलाषा करता होकुशलाभिलाषी
अधिक खर्च करने वालाखर्चीला
आकाश में उड़ने वालाखेचर
खाने योग्यखाद्य
खोज करने वालाखोजी
दुर देखने का यंत्रदुरबीन
अपना ही स्वार्थ देखने वालाखुदगर्ज, स्वार्थी
जो खण्ड-खण्ड हो चुका होखण्डित
गाय की पूँछ की तरहगोपुच्छवत्
जो गलत रास्ते पर चल रहा होगुमराह
जिसकी आँखे बड़ी तेज होगिद्ध दृष्टि
जो ईश्वर में विश्वास रखता होआस्तिक
जो ईश्वर में विश्वास नहीं रखता होनास्तिक
गर्मी की छुट्टियाँग्रीष्मावकाश
समुद्र में गोता लगाने वालागेाताखोर
अतिथि सत्कार की भावनाअतिथ्य
जिसकी आलोचना की जा चुकी होअलोचित
जिसकी आलोचना की जायेआलोच्य
जो नहीं जानता होअनजान
जो परिचित नहीं हैअपरिचित
जो स्थिर नहीं हैअस्थिर
जिसके शरीर पर मांस है ही नहीं, केवल हड्डी की बच गयी हैअस्थिशेष, कंकाल
जो पूरा नहीं हुआअपूर्ण अधूरा
जिसके हाथ में अधिकार हैअधिकारी
जिसका अपमान हो चुका होअपमानित
जिसका आदर नहीं हआअनादृत
जिसको आश्वासन दिया जा चुका है।आश्वरत
रूपये पैसे से सम्बन्धितआर्थिक
अत्याचार करने वालाआततायी
जिसकी इच्छा की जायेइच्छित
किसी वस्तु से परेइतर
इतिहास जानने वालाइतिहासज्ञ
जिसने इन्द्रियों को जीत लिया होजितेन्द्रीय
इन्द्रियांे से परेइन्द्रियतीत
जो प्रकाशित नहीं हुआअप्रकाशित
हिसाब किताब की जांच करनाअंकेक्षण
जिसको पर किया जा चुका है।अतिक्रंात
जिसको जीता नहीं सकताअजेय
जो तृप्त नहीं हुआअतृप्त
जो किसी सभा या संस्था का प्रधान होअध्यक्ष
जिसकी निन्दा की जाती होगर्हित
परिवार के प्रति उचित कर्तव्य का भावगार्हस्थ
ग्राम सम्बन्धीग्रामीण
गाँवों में गाये जाने वाला गीतलोकगीत, ग्रामगीत
खरीदने वालागा्रहक
गायों के रहने की जगहगोशाला
गणित जानने वालागणितज्ञ
गेरूये रंग कागैरिक
घर से सम्बन्धितघरेलू
घूमने वाला व्यक्तिघुमक्कड़
घूमति हुई वस्तुघूर्णित
सूघंने की विशेष  शक्तिघ्रांण शक्ति
जिससे घृणा की जायेघृणित
जो डिग नहीं सकताअडिग
जिसकी था लगाना कठिन होअथाह
जिसकी तुलना नहीं की जा सकती होअतुलनीय
हा नां का निर्णय नहीं हो पानाअसमंजस
जिसका निर्णय नहीं हुआ हैअनिर्णित
जो गाया नहीं गया होअगीत
बैचेनी का भावअकुलाहट
जो चाहा नहीं गया होअनचाहा
जो बातें कही नहीं गयी होंअनकही
जो सहा नहीं जा सकेअसह्य
जो गिना नहीं जा सकेअनगिनत
जिसका पार नहीं पाया जा सकेआपार
किसी आधार पर टिका हुआअवलम्बित
नीचे की ओर जिसका मुँह हैअधोमुख
लालन पालन देखभाल करने वालाअभिभावक
बहुत अधिकअतिशय
जो पहले कभी सुना नहीं गयाअश्रुत पूर्व
जिसका जन्म नहीं हुआअजन्मा अजात
जिसको नहीं खाना चाहिएअखाद्य
जिसका शत्रु उत्पन्न नहीं हुआ हांेअजातशत्रु
ग्वालों का निवास स्थानघोष
जिसकी चर्चा होचर्चित
चलने वाली चीचचलायनान
चित्र बनाने वाली स्त्रीचित्रकत्र्री
चित्र खींचनाचित्रण
चलता-पुर्जा आदमीचालू
बीडी सिगरेट आदि पीनाधूम्रपान
धारण करने वालीधारयित्री
असली का उल्टानकली
जो नकल करता हैनकलची
नगर में रहने वालानागरिक
नरक सम्बन्धीनरकीय
नमस्कार के योग्यनमस्य
जो किसी से नहीं डरतानिर्भीक
रात में चलने वाला राक्षसनिशाचर
जो तुरन्त उत्पन्न हुआ होनवजात
तैरने की कलातैराक
तप करने वालातपस्वी
जो सब कुछ छोड़ देत्यागी
हाथ की सिलाईतुरपायी
तीर चलाने वालातीरन्दाज
जो दूसरों को रूपया-पैसा देता होदान, दाता
दो पैरों वाला जानवरद्विपद
जिसको दबाना कठिन होदुर्दश्य
तत्च जानने वालातत्वज्ञ
जिसमें कोई सार न होथोथा, निस्सार
जिसकी उपमा न होनिरूपम
आकाश में चलने वालानभचर
जो निर्देश देता होनिर्देशक
देवताओं से सम्बद्धदैविक
जो पचा देपाचक
जिसका रौंदा गया होदलित
जिसका दो बार जन्म होद्विज
जो आगे-आगे चलेनेता
जो देने योग्य होदेय
जो जल्दी-जल्दी चलता होद्रुतगामी
मस्ती से भरा हुआमस्त

अनुशासन पर निबंध

सभी के लिये खुशहाल और एक सफल जीवन जीने के लिये अनुशासन बहुत ही जरुरी है। यहाँ पर हम कुछ संख्याओं में आपके स्कूल जाने वाले बच्चों के लिये निबंध उपलब्ध करा रहें है। सामान्यत: स्कूलों में विद्यार्थीयों को अनुशासन पर निबंध लिखने को दिया जाता है। अत: आप दिये गये निबंधों का प्रयोग किसी भी प्रतियोगिता आदि में कर सकते हैं।

अनुशासन पर निबंध 1 (100 शब्द)


हर एक के जीवन में अनुशासन सबसे महत्पूर्ण चीज है। बिना अनुशासन के कोई भी एक खुशहाल जीवन नहीं जी सकता है। कुछ नियमों और कायदों के साथ ये जीवन जीने का एक तरीका है। अनुशासन सब कुछ है जो हम सही समय पर सही तरीके से करते हैं। ये हमें सही राह पर ले जाता है। हम अपने रोजमर्रा के जीवन में कई प्रकार के नियमों और कायदों के द्वारा अनुशासन पर चलते हैं। इसके कई सारे उदाहरण हैं जैसे हम सुबह जल्दी उठते हैं, एक ग्लास साफ पानी पीते हैं, तरोताजा होने के लिये शौचालय जाते हैं, दाँत साफ करते हैं, स्नान करते हैं, नाश्ता करते हैं, स्कूल जाते हैं आदि सभी अनुशासन का ही एक प्रकार है।

अनुशासन पर निबंध 2 (150 शब्द)


जीवन के सभी कार्यों में अनुशासन अत्यधिक मूल्यवान है। हमें हर समय इसका पालन करना है चाहे वो स्कूल, घर, कार्यालय, संस्थान, फैक्टरी, खेल का मैदान, युद्ध का मैदान या दूसरी जगह हों। ये खुशहाल और शांतिपूर्णं जीवन जीने की सबसे बड़ी जरुरत है। ये हमें ढेर सारे बड़े मौके देती है, अनुशासन आगे बढ़ने के लिये सही रास्ता देती है, जीवन में सही बातें सीखाती है, कम समय में ज्यादा अनुभव मिलता है आदि। जबकि अनुशासन की कमी की वजह से ढेर सारी दुविधा और गड़बड़ी होती है, अनुशासनहीनता की वजह से जीवन में शांति और प्रगति के बजाय ढेर सारी परेशानी उत्पन्न हो जाती है।

अनुशासन अपने बड़ों, ऑफिस के सीनीयर, शिक्षक, और माता-पिता के हुक्म का पालन करना है जिससे हम सफलता की ओर आगे बढ़ते हैं। हमें नियमों पर चलने की, आज्ञा का पालन करने की और सही तरीके से व्यवहार करने की जरुरत है। हमें अपने जीवन में अनुशासन के महत्व को समझना चाहिये। जो लोग अनुशासनहीन होते हैं वो अपने जीवन में बहुत सारी समस्याओं को झेलते हैं साथ ही निराश भी होते हैं।

अनुशासन पर निबंध 3 (200 शब्द)


अनुशासन किसी भी कार्य को ठीक ढंग से करने का एक तरीका है। इसके लिये आपके शरीर और दिमाग पर एक नियंत्रण की जरुरत होती है। कुछ लोगों के पास स्व-अनुशासन प्राकृतिक संपत्ति के रुप में होता है जबकि कुछ को इसे अपने अंदर विकसित करना पड़ता है। अनुशासन में वो दक्षता है कि वो भावनाओं को नियंत्रित कर सकता है और मुश्किलों से पार पाने के साथ ही सही समय पर सही कार्य करने में मदद करता है। बिना अनुशासन के जीवन अधूरा और असफल है। अपने बड़ों और वरिष्ठों का सम्मान करने के द्वारा हमें कुछ नियमों का पालन करना चाहिये।

ये जीवन के सभी कार्यों के लिये एक महत्वपूर्णं यंत्र है चाहे वो घर, कार्यालय, खेल का मैदान या दूसरी जगह हो। अगर हम अनुशासन का पालन न करें तो हमारा जीवन अव्यवस्थित हो जायेगा। इस दुनिया में हर चीज अनुशासित है और अनुशासन के द्वारा संगठित है। हवा, पानी और जमींन हमें जीवन जीने का रास्ता देते है। ये दुनिया, देश, समाज, समुदाय आदि सबकुछ बिना अनुशासन के असंगठित हो जायेगा क्योंकि सब कुछ अनुशासन पर निर्भर है। अनुशासन एक स्वभाव है जो प्रकृति द्वारा प्रदत्त सभी चीजों में उपस्थित है।

अनुशासन पर निबंध 4 (250 शब्द)


अनुशासित व्यक्ति आज्ञाकारी होता है और उसके पास उचित सत्ता के आज्ञा पालन के लिये स्व-शासित व्यवहार होता है। अनुशासन पूरे जीवन में बहुत महत्व रखता है और जीवन के हर कार्यों में इसकी जरुरत होती है। यह सभी के लिये आवश्यक है जो किसी भी प्रोजेक्ट पर गंभीरता से कार्य करने के लिये जरुरी है। अगर हम अपने वरिष्ठों की आज्ञा और नियमों को नहीं मानेंगे तो अवश्य हमें परेशानियों का सामना करना पड़ेगा और असफल भी हो सकते हैं।

हमें हमेशा अनुशासन में होना चाहिये और अपने जीवन में सफल होने के लिये अपने शिक्षक और माता-पिता के आदेशों का पालन करना चाहिये। हमें सुबह जल्दी उठना चाहिये, निययमित दिनचर्या के तहत साफ पानी पीकर शौचालय जाना चाहिये, दाँतों को साफ करने के बाद नहाना चाहिये और इसके बाद नाश्ता करना चाहिये। बिना खाना लिये हमें स्कूल नहीं जाना चाहिये। हमें सही समय पर स्वच्छता और सफाई से अपना गृह-कार्य करना चाहिये। हमें कभी भी अपने माता-पिता की बातों का निरादर, नकारना या उन्हें दुखी नहीं करना चाहिये। हमें अपने स्कूल में पूरे यूनिफार्म में और सही समय पर जाना चाहिये। कक्षा में स्कूल के नियमों के अनुसार हमें प्रार्थना करना चाहिये। हमें अपने शिक्षकों की आज्ञा का पालन करना चाहिये, साफ लिखावट से अपना कार्य करना चाहिये तथा सही समय पर दिये गये पाठ को अच्छे से याद करना चाहिये।

हमें शिक्षक, प्रधानाध्यापक, चौकीदार, खाना बनाने वाले या विद्यार्थियों से बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिये। हमें सभी के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिये चाहे वो घर, स्कूल, कार्यालय या कोई दूसरी जगह हो। बिना अनुशासन के कोई भी अपने जीवन में कोई भी बड़ी उपलब्धि प्राप्त नहीं कर सकता। इसलिये अपने जीवन में सफल इंसान बनने के लिये हमें अपने शिक्षक और माता-पिता की बात माननी चाहिये।

अनुशासन पर निबंध 5 (300 शब्द)


अनुशासन एक क्रिया है जो अपने शरीर, दिमाग और आत्मा को नियंत्रित करता है और परिवार के बड़ों, शिक्षकों और माता-पिता की आज्ञा को मानने के द्वारा सभी कार्य को सही तरीके से करने में मदद करता है। ये एक ऐसी क्रिया है जो अनुशासन में रह कर हर नियम-कानून को मानने के लिये हमारे दिमाग को तैयार करती है। हम अपने दैनिक जीवन में सभी प्राकृतिक संसाधनों में वास्तविक अनुशासन के उदाहरण को देख सकते हैं। सूरज और चाँद का सही समय पर उगना और अस्त होना, सुबह और शाम का अपने सही समय पर आना और जाना, नदियाँ हमेशा बहती है, अभिभावक हमेशा प्यार करते हैं, शिक्षक हमेशा शिक्षा देते है और भी बहुत कुछ। तो फिर क्यों हम अपने जीवन में पीछे हैं, बिना परेशानियों का सामना किये आगे बढ़ने के लिये हमें भी अपने जीवन में सभी जरुरी अनुशासन का पालन करना चाहिये।

हमें अपने शिक्षक, अभिभावक और बड़ों की बातों को मानना चाहिये। हमें उनके अनुभवों के बारे में उनसे सुनना चाहिये और उनकी सफलता और असफलता से सीखना चाहिये। जब भी हम किसी चीज को गहराई से देखना और समझना शुरु करते हैं, तो ये हमें जीवन में महत्वपूर्ण सीख देता है। मौसम अपने सही समय पर आता और जाता है, आकाश बारिश करता है और रुकता है आदि सभी सही समय होती हैं जो हमारे जीवन को संतुलित बनाती है। इसलिये, इस धरती पर जीवन चक्र को कायम रखने के लिये हमें भी अनुशासन में रहने की जरुरत है। हमारे पास अपने शिक्षक, अभिभावक, पर्यावरण, परिवार, वातावरण और जीवन आदि के प्रति बहुत सारी जिम्मेदारियां हैं। मानव होने के नाते हमारे पास सोचने-समझने का, सही-गलत के बारे में फैसला करने के लिये और अपनी योजना को कार्य में बदलने के लिये अच्छा दिमाग है। इसलिये, अपने जीवन में अनुशासन के महत्व और जरुरत को जानने के लिये हम अत्यधिक जिम्मेदार हैं।

अनुशासनहीनता की वजह से जीवन में ढेर सारी दुविधा हो जाती है और व्यक्ति को गैर-जिम्मेदार और आलसी बना देता है। ये हमारे विश्वास के स्तर को कम करती है और आसान कार्यों में भी व्यक्ति को दुविधाग्रस्त रखती है। जबकि अनुशासन में होने से ये हमें जीवन के सबसे अधिक ऊंचाईयों की सीढ़ी पर ले जाती है।

अनुशासन पर निबंध 6 (400 शब्द)


अनुशासन कुछ ऐसा है जो सभी को अच्छे से नियंत्रित किये रखता है। ये व्यक्ति को आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करता है और सफल बनाता है। हम में से हर एक ने अपने जीवन में समझदारी और जरुरत के अनुसार अनुशासन का अलग-अलग अनुभव किया है। जीवन में सही रास्ते पर चलने के लिये हर एक व्यक्ति में अनुशासन की बहुत जरुरत पड़ती है। अनुशासन के बिना जीवन बिल्कुल निष्क्रिय और निर्थक हो जाता है क्योंकि कुछ भी योजना अनुसार नहीं होता है। अगर हमें किसी भी प्रोजेक्ट को पूरा करने के बारे में अपनी योजना को लागू करना है तो सबसे पहले हमें अनुशासन में होना पड़ेगा। अनुशासन दो प्रकार का होता है एक वो जो हमें बाहरी समाज से मिलता है और दूसरा वो जो हमारे अंदर खुद से उत्पन्न होता है। हालाँकि कई बार, हमें किसी प्रभावशाली व्यक्ति से अपने स्व-अनुशासन आदतों में सुधार करने के लिये प्रेरणा की जरुरत होती है।

हमारे जीवन के कई पड़ावों पर बहुत से रास्तों पर हमें अनुशासन की जरुरत पड़ती है इसलिये बचपन से ही अनुशासन का अभ्यास करना अच्छा होता है। स्व-अनुशासन का सभी व्यक्तियों के लिये अलग-अलग अर्थ होता है जैसे विद्यार्थियों के लिये इसका मतलब है सही समय पर एकाग्रता के साथ पढ़ना और दिये गये कार्य को पूरा करना। हालाँकि काम करने वाले इंसान के लिये सुबह जल्दी उठना, व्यायाम करना, समय पर कार्यालय जाना और ऑफिस के कार्य को ठीक ढंग से करना। हर एक में स्व-अनुशासन की बहुत जरुरत है क्योंकि आज के आधुनिक समय में किसी को भी दूसरों को अनुशासन के लिये प्रेरित करने का समय नहीं है। बिना अनुशासन के कोई भी अपने जीवन में असफल हो सकता है, अनुशासन के बिना कोई भी इंसान कभी भी अपने अकादमिक जीवन या दूसरे कार्यों की खुशी नहीं मना सकता।

स्व-अनुशासन की जरुरत हर क्षेत्र में होती है जैसे संतुलित भोजन करना (मोटापे और बेकार खाने को नियंत्रित करना), नियमित व्यायाम (इसके लिये एकाग्रता की जरुरत है) आदि। गड़बड़ और अनियंत्रित खाने-पीने से किसी को भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ हो सकती हैं इसलिये स्वस्थ रहने के लिये अनुशासन की जरुरत है। अभिवावक को स्व-अनुशासन को विकसित करने की जरुरत है क्योंकि उसी से वो अपने बच्चों को एक अच्छा अनुशासन सिखा सकते हैं। उन्हें हर समय अपने बच्चों को प्रेरित करते रहने की जुरुरत पड़ती है जिससे वो दूसरों से अच्छा व्यवहार करें और हर कार्य को सही समय पर करें। कुछ शैतान बच्चे अपने माता-पिता के अनुशासन को नहीं मानते हैं, ऐसे वक्त में अभिभावकों को हिम्मत और धैर्य के साथ अपने बदमाश बच्चों को सिखाना चाहिये। प्रकृति के अनुसार अनुशासन को ग्रहण करने की सभी व्यक्ति का अलग समय और क्षमता होती है । इसलिये, कभी हार मत मानो और लगातार प्रयास करते रहो अनुशासन में होने को, छोटे-छोटे कदमों से ही बड़ी मंजिलें हासिल की जा सकती हैं।

लोकोक्तियाँ

लोकोक्तियाँ











































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































अपना रख पराया चखअपनी वस्तु की रक्षा, दूसरी की वस्तु का उपभोग
अकेला चना भाड नहीं फोड़ताकोई बड़ा कार्य एक आदमी  के वंश की बात नहीं।
अंत भले का भूलाअच्छे कार्य का परिणाम भी अच्छा होता है।
अटका बनिया दे उधारअपनी गरज पर दबाना पड़ता है।
आधा तीर आधा बटेरअनमेल मिश्रण
आधी छोड़ पूरी को धाबे आधी मिले न पूरी पावेलालच छोडे़ थोडे़ में ही संतोष करना चाहिए। लालची को कुछ भी नहीं मिलता।
उल्टा चोर कोतवाल को डांटेस्वयं दोषी होकर निर्दोष को दोषी ठहरा।
उंगली पकड़ कर पोछा पकड़नाथोड़ा सहारा बाद में उस पर अपना दावा जमाना
ऊँची दुकान फीका पकवानकेवल बाहरी चमक दमक, भीतर खोखलापन
कूद-कूद मछली बगुले को खायेविपरीत कार्य होना
क्या काबुल में गधे नहीं होते हैंअच्छे स्थान पर बुरे लोग भी होते हैं।
कभी नाव गाड़ी पर कभी गाड़ी नाव परएक दूसरे की सहायता लेने ही पड़ती है।
कही की ईट कहीं का रोड़ा भानुमती ने कुनबा जोड़ाअसंगत वस्तुआंेे का मेल बैठाना
घर का भेदी लंका ढाएआपसी वैमनस्य से बड़ी हानि होती है।
घर की मुर्गी दाल बराबरहरतगंत बीज का विशेष मूल्य नहीं होता
घी का लड्डू टेठा तलाकाम की वस्तु कुरूप होने पर भी ठीक समझी जाती है।
घर मंे बीबी झोंके भाड़ बाहर मियां सूबेदारझूठी शान जताना
चोर के पैर नहीं होतेअपराधी स्वयं भयभीत रहता है।
चाँदी देख चाँदना, सुख देखे व्यवहारधनाढ्य के सभी सगे होते है।
चलती का नाम गाड़ी है।जैसे सफलता मिले उसी का यश फैले
जंगल में मोर नाचा किसने देखायोग्यता एवं वैभव का ऐसे स्थान प्रदर्शन जहाँ उसकी कोई कद्र न हो।
जैसा देश वैसा भेषजहां रहो, वहां वैसी रीति पर चले
देहरी लांघते पाप लगनाअतिशीघ्र बदनामी होना
दूसरी की पत्तल लम्बा-लम्बा भातपराई वस्तु सदा अच्छी  लगती है।
नंगे खड़े मैदान में चोर बलैया लेयजिसकी क्षति  होने का भय नहीं है, उसकी रक्षा करना व्यर्थ हैं
नाई की बारात में सब ठाकुरस्वंय को सबसे बड़ा मानने वाले लोगों का समूह
निबल की जोरू सबकी भोजाईकमजोर को सब दबाते हैं।
नौ की लकड़ी नब्बे खर्चमूल्य से अधिक वस्तु की देखरेख में व्यय
न रहेगा बाँस न रहेगी बाँसुरीकिसी बात के कारण चीज को ही जड़ से ही मिटा देना।
नौ नगद न तेरह उधारउधार से नगद थोड़ा मिलना ही अच्छा है।
नाच न जाने आंगन टेड़ाअपनी अकुशलता का दोष दूसरों पर ढालना।
बांह गहे की लाजशरण में आने वाले की रक्षा
बिल्ली के गले में घंटीकठिन कार्य सम्पन्न करना।
बिन मागें मोती मिले मांगे मिले न भीखमांगन अच्छा नहीं होता।
भुस में आग लगाकर जमालों दूर खड़ीकलह का बीज बो कर तटस्थ रहना
मियां जी दाढ़ी, तांबी जो मंे गाड़ीकिसी वस्तु का दूसरे में समाप्त हो जाना।
मुंह में राम बगल में छुरी‘कपट व्यवहार’
राम की माया कहीं धू कहीं छायाईश्वर की इच्छानुसा मुख दुःख सभी जगह है।
रस्सी जल गली पर बल नहीं गयाबर्बाद होने पर भी अहंकार बना रहना
लेने एक न देना दोकिसी से कोई मतलब नहीं
वहीं ढाक के तीन पातस्थिति में कोई परिवर्तन नहीं
सस्ता रोय बार बार मंहगा रोये एक बारसस्ती वस्तु खरीद कर प्रतिदिन परेशान हाना पड़ता है।
सेवा करें सो मेवा पावैसेवा का फल सदा अच्छा होता है।
हीरे की परख जौहरी जानेेगुणवान ही गुणों की पहचान करता है।
हमारी दिल्ली और हमी से म्याऊँजिस पर आश्रित होना उसी पर रौब जमाना
कहाँ राजा भोज कहां गंगु तेलीआकाश पाताल का अंतर
आम के आम गुठलियांे के दामदोहरा लाभ
घर आए नाम नू पूजिए बामी पूजन जाएअवसर का लाभ न उठाना और बाद में उसके लिए परेशान सहना
राम नाम अपना, पराया माल अपनाधोखे से धन जमा करना
सावन हरे न भादों सूखेसदा एक समान रहना
फिसल पड़े तो हरे गंगामजबूरी में काम करना
दोनों हाथों में लड्डुसब ओर लाभ ही लाभ होना
एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरीअपराधी होकर उल्टे अकड दिखना
काठ की हांडी बार-बार नहीं बढ़तीछल कपट का व्यवहार हमेशा नहीं चलता
कोई ईर घाट कोई बीर घाटताल मेल न होना
हाथी के पाँव सबका पाँवबड़े आदमी की हाँ में हाँ मिलाना।
जैसी बहे बयार पीठ तब तैसी कीजेसमय का रूख देखकर काम करना
अपने मरे बिना स्वर्ग नहीं मिलतास्वयं प्रयत्न करने पर काम बनता है।
जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ न पहुँचे कविकवि के लिए कुछ भ्ी आगग्य नहीं है।
फटे में टाँग अड़ानादूसरे के झगड़े में घुसना
आग लगन्ते झोंपड़ा जो निकले  सो लाभ नुकसान होते होते जो कुछ बच जाए वही बहुत है।
आ बैल मुझे मारजान बूझकर मुसीबत मंे पड़ना
सब धान बाईस पसेरीअच्छा बुरा सबको एक समान समझना
जैसी करनी वैसी भरनीकार्य के अनुसार परिणाम मिलता है।
कोयले की दलाली में हाथ कालाबुरी संगत से बदनामी मिलती है।
चमड़ी जाये पर दमड़ी न जायेंमर जाये पर पैसा न जाये
अपनी करनी पार उतरनीकर्म  का फल अवश्य मिलता है।
तबेले की बला बन्दर के सिरकिसी का अपराध दूसरे के सिर
आगे कुआँ पीछे खाईसभी और से विपत्ति का आना
नीम हकीम खतरे जानअल्प विधा भयंकर
जर कार जोर पूरा है और सब अधूरा हैधन में सब कार्य सिद्ध करने की शक्ति है।
गुड़ खाये गुलगुलों से परहेजकिसी व्यक्ति से प्यार करके उसके व्यवहार से घृणा
तू  डाल-डाल में पात-पातदोनों चालाक
मान न मान में तेरा मेहमानजबरदस्ती गले पड़ना
दूध का जला छाछ भी फँूक-फँूक कर पीता है।एक बार धोखा खाने वाला अधिक सावधान हो जाता है।
एक एक ग्यारह होते हैंसंगठन में शक्ति है
अपना हाथ जगन्नाथअपने हाथ से कार्य करना।
अपनी डफली अपना रागसबका अपने अपने मन के अनुसार चलना
जैसे नाग नाथ वैसे साँप नाथसब एक समान दुष्ट प्रकृति वाले हैं।
खरबूजे को देखकर घरबूजा रंग बदलता है।पड़ोस का असर पड़ता है।
आपु न जावै सासुरे औरन कूँ सिख देतस्वयं किसी कार्य को न करना और उसको करने के लिए दूसरों को उपदेश देना।
सूप के फटके सूप नहीं रहते है।जहां की चीज होती है वहीं चली जाती है।
आसमान से गिरा खजूर में अटकाकिसी काम के बनने में अनेक बाधाओं का उपस्थित हो जाना।
दुविधा में दोनांे गये मोवा मिली ने रामअनिश्चय की स्थिति में व्यक्ति दोनों ओर से हानि उठाता हैं
अब पछताये से होत का जब चिड़िया चुग गयी खेतसमय पर कार्य न करने से बाद में पछताना पड़ सकता है।
हींग लगे न फिटकरी रंग भी चोखा होयबिना खर्च किये कार्य का अच्छा होना।
आये थे हरिभजन को ओटन लगे कपासकिसी कार्य विशेष की उपेक्षा कर किसी अन्य कार्य में लग जाना
एक म्यान मंे दो तलवारसबल प्रतिद्वन्ति एक साथ नहीं रह सकते।
तीन लोक से मथुरा न्यारीसबसे अलग विचार करना
हाँसिये के ब्याह में खुरपी का गीतअसंगत बातें करना
अन्धा बांटे रेवड़ी चीन-चीन के देन्याय के ओर से आँख मूंदकर स्वजनों को लाभ पहुँचाना
भौर न छाड़े केतकी तीखे कंटक जानअनेक पेरशानी आने पर भी प्रेमी प्रेम नहीं छोड़ते
कुम्हार अपना ही घड़ा सराहता है।अपनी बनायी हुई वस्तु सभी को अच्छी लगती है।
दस जने की लाठी एक जने का बोझ सहयोग से काम आसानी से हो जाता है।
सौ सयाने एक मतबुद्धिमानों के विचार एक से होते हैं
खाईये मन भाता पहेनिये जग भातानिजी जीवन जैसी स्वतंत्रता सार्वजनिक जीवन में नहीं खोजनी चाहिए।
बन्दर क्या जाने अदरक का स्वादमूर्ख व्यक्ति गुण की सही परख नहीं कर सकता।
पत्थर को जांेक नहीं लगती हैसबल का शोषण नहीं होता
ऊँट दूल्हा पुरोहित गधाएक मूर्ख व्यक्ति द्वारा दूसरे मूर्ख की प्रशंसा करना
काला अक्षर भैंस बराबरअनपढ़ होना
अरहर की टट्टी गुजराती तानाअनमोल साधन जुटाना
कमावै धोती वाला उड़ावै टोपी वालापरिश्रमी लोग कमाते  है, और शोकीन उसे उड़ाते हैं
जाके पाँव न फटे बिवाई  सो क्या जाने पी पराईजिसके ऊपर बीतती है वही जानता है।
अन्धेर नगरी वेबूझ राजा टका सेर भाजी टका सेर खाजान्याय विहीन शासन
एक तो करेला दूजा नीम चढ़ाएक बुराई पर दूसरी बुराई
डूबते को तिनके का सहाराआपत्ति के समय थोड़ी सहायता भी बड़ी होती है।
काम का न काज का दुश्मन अनाज कादूसरों पर बोझ बनकर रहने वाला व्यक्ति
तन पर नहीं लत्ता पान खाये अलबत्ताझूठ बोलाना, शेखी मारना
कोयले की दलाली में मुँह काला करनाबुरी संगत मंे कलंक लगना
एक हाथ से ताली नहीं बजती है।एक ओर से झगडा कभी नहीं हो सकता
बिल्ली को पहले दिन ही मार देना चाहिए।भय का समन शुरू में ही कर लेना चाहिए।
अपना माल खोट तो परखैया का क्या दोषयदि स्वयं ही दोषी है तो बुर बताने वाले का क्या दोष
न नौ मन तेरा होगा न राधा नाचेगीकार्य करने के लिए कोई असाधारण शर्त रख देना।
आदमी जाने वसे, सौना जानै कत्तैसाथ रहने पर ही किसी व्यक्ति का मूल्यांकन किया जा सकता है।
बगल में छोरा नगर में ढिंढोरावस्तु के पास रहने पर भी उसे चारो ओर ढूंढना
कागज की नाम अधिक समय तक नहीं चलतीऊपरी दिखावा दिखाने वालों की जल्द ही पौल खुल जाती है।
चार दिन की चाँदनी फिर अंधेरी रातथोडे़ दिनों का सुख
नौ सौ चूहे खाये बिलारी बैठी तपकोअनेक पाप करके धर्म की बात करना।
उतर गयी लोई तो क्या करके कोईबेशर्म का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता
अन्धा पावै आँखे तो पतियायेअभिष्ट की प्राप्ति होने पर विश्वास का जमना
हाथ कंगन को आरसी क्याप्रत्यक्ष  को प्रमाण की जरूरत नहीं
गुरू गुड चेला चीनीगुरू से चेले का आगे बढ़ जाना
अशर्फियां लुटे और कोयले पर छापमूल्यावाल वस्तुआंे की ओर ध्यान न देकर व्यर्थ की चीजांे की फिक्र करना।
ऊँट मक्का की ओर भागता है।अपनी जन्म भूमि को सब प्रेम करते है।
यह मूँह और मसूर की दालहैसियत से बढकर चाहना
खग जाने खग ही की भाषाचालाक ही चालाक की बात समझता है।
ऊधौ का लेना न मांधौ का देनाअपने काम से काम
आप मियाँ जी मांगते  द्वार खड़े दरवेशकिसी निर्धन के घर भिखारियों  की भीड़ होना
आँख न दीदा काड़े कसीदासाधन न होने पर भी काम कर लेना।
हाथ सुमरनी बगल कतरनीकपटपूर्ण व्यवहार
अन्धे के आगे रोबे अपने नैना खोवेजो अपने दुख के को न समझे उसके आगे दुखड़ा रोने से कोई लाभ नहीं होगा।
अपना घर दूसरे सूझता है। अपने मतलब की बात कोई नहीं रखता है।
यथा राजा तथा प्रजास्वामी के अनुसार ही सेवक भी होते है।
घड़ी मंे तौला घड़ी मंे मासाजरा सी बात पर खुश होकर नाराज होना।
आग लगने पर कुआँ खोदनाविपत्ति आ जाने पर उसका निराकरण करना
हाथी के दांत दिखाने और खानेदिखावा कुछ और असलियत कुछ और
अंधे के हाथ वटेर लगनाअपात्र को सफलता मिलना
कखरी मंे लरका गाँव गोहारवस्तु के पास होने पर भी दूर-दूर तक उसकी तलाश करना
नेकी और पूछ-पूछअच्छे कार्य के लिये आज्ञा की क्या आवश्यकता
तेली का तेल जले मसालची का दिल जलेएक को खर्च कते देख दूसरा परेशान
बोए पेड़ बबूल का आम कहां से होएबुरे काम का फल अच्छा नहीं हो सकता
ऊँट को निगल लिया ओर दुम  को हिचकेबड़ी विपत्ति को स्वीकार करना और साधारण पर संकोच करना
नई नईन बाॅस का नैहन्नानये शोक को पूरा करने के लिए अजीम कार्य करना
खेती पाती बीनती ओर घोडे़ की तंग, अपने हाथ संभालिये चाहे लाख लोग होये संगअपना कार्य स्वयं करो
नेकी कर दरिया में डालउपकार करके भूल जाना चाहिए
हथेली पर सरसों नहीं जमतीकोई कार्य झटपट नहीं हो सकता
गधा खेत खाये जुलाहा पीटा जायेकिसी के कर्म की सजा किसी और को मिले
चोर-चोर मौसरे भाईएक पेशे वाले आपस में नाता जोड़ लेते हैं
अन्धे को अन्धेर मंे बहुत दूर की सूझीमूर्ख ने बुद्धिमानी की बात की
आम खाने या पेड़ गिननेव्यर्थ की बातें करके केवल अपने मतलब की बात करना
पर उपदेश कुशल बहुतेरे दूसरों को उपदेश देना आसान समझना
दर्जी की सुई कभी ताश में कभी टाट मेंखाली न होना
आँख का अन्धा गाँठ का पूरामूर्ख किन्तु धनी
खोदा पहाड़ निकली चुहियाअधिक परिश्रम किन्तु लाभ कम
पढ़े फारसी बेचे तेल या देखो कुदरत का खेलविवश होकर योग्यता से निम्न स्तर का कार्य करना।
पाव भर चून पुल पर रसोईसीमित साधन होने पर भी अधिक लोगों को निमंत्रित करना।
कौआ भी हौंड न ले जायेगोदूर रहने वालों की कोई खबर नहीं होती
तीन दिन महमान चैथे दिन हैवानअतिथि कुछ दिनों का ही अच्छा होता है।
साँच को आँच नहींसच्चे को डरने की आवश्यकता नहीं होती
हाथी निकल गया दुम रह गयीसारा काम हो गया बस थोड़ा सा रह गया है।
भागते भूत की  लंगोटी भलीजो मिल गया वही बहुत
अन्त भले का भलाअच्छे कार्य का परिणाम भी अच्छा होता है।
प्रभुता पायी काहि मद नाहींधन वैभव प्राप्त होने पर मनुष्य मंे घमण्ड आ जाता है।
एक पथ दो काजएक काम से दोहरा लाभ
आगे नाथ न पीछे पगहाकिसी प्रकार का अंकुश न होना
घोड़ा घास से यारी करेगा तो खायेगा क्याअपना हक लेने में लिहाज न करना
थका ऊँट सराय तकता है।दिन भर की महनत के बाद घर की याद आती है।
अध जल गगरी छलकत जायेअल्पज्ञ द्वारा गर्व प्रदर्शन करना।
जाको राखे साइयाँ मार सके न कोएजिसकी रक्षा ईश्वर करता है उसे कष्ट नहीं पहुँचा सकता है।
कहने से कुम्हार गधे पर नहीं चढ़ताहठी मनुष्य किसी का कहना नहीं मानता है।
आँख का अन्धा नाम नयन सुखगुण के विपरीत नाम
मन के हारे हार है मन जीते जीतहतोत्साहित होन पर असफलता और निरन्तर उत्साह पूर्वक कार्य करने वासले को सफलता  मिलती है।
ऊँट के मुँह में जीराजरूरत से बहुत कम
घोडांे का घर कितनी दूरपुरूषार्थाी व्यक्ति को सफलता सरल होती है।
पुचकारा कुत्त्ता सिर चढेओछे लोग मुँह लगाने पर अनुचित लाभ उठाते हैं।
अरध तजहि बुध सरबस जातासब कुछ नष्ट हो रहा हो तो बुद्धिमान आधा छोड़ देते है।
माने भीख पूछे गाँव की जतमाअपनी असलियत भूूलकर बात करना।
घर फँूक तमाशा देखनाशान के लिए औकात से बाहर व्यय करना
एक तन्दुरस्ती हजार नियामतस्वास्थ्य बहुत बड़ी ची है।
सिर सहला भेजा खाऐदोस्त बनकर हानि पहुँचाना
एक अनार सौ बीमारकिसी वस्तु की पूर्ति कम किन्तु माँग अधिक होना।
जल में रहकर मगरमच्छ से बैरआश्रयदाता को शत्रु नहीं मानना चाहिए।
तेल देखो तेल की धार देखोरूख पहचानना
गंगा गए गंगादास , जमुना गए जमुनादासजिसका कोई दृढ सिद्धान्त नहीं होता।
नई घौंसन उपलों की तकियाअपने नए शौक  को पूरा करने के लिए अनप्रेक्षित  कार्य करना
जो गरजते हैं वे बरसते नहींकेबल बड़ी-बड़ी बातें
छछुन्दर के सिल में चमेली का तेलअयोग्य व्यक्ति को अच्छा पद मिलना
अपने घर मंे दिया जलाके तक मस्जिद मंे जलाते हैं पहले अपना स्वार्थ पूरा करके तब परमार्थ किया जाता है।
एक तबे रोटी क्या छोटी क्या मोटीसब लगभग एक समान होना
चोर की दाढ़ी मंे तिनकाअपराधी सदा शंका से घिरा रहता है।
नई-नई मुसलमानी, अल्लाह ही अल्लाह पुकारेनवीन पद प्राप्त होने पर अपने को अधिक प्रदर्शित करना।
अन्धी पीसे कुत्ता खायेअसावधानी के अयोग्य को लाभ
घर मंे नहीं दाने बीबी चली भुनानेसामथ्र्य से बाहर कार्य करना।
आप डूबे तो जग डूबाबुरा आदमी सबको बुरा कहता है।
अंधों में काना राजाअयोग्य व्यक्तिओं के बीच कम योग्य व्यक्ति भी आदर पाता है।
सौ दिन चोर का एक दिन साहूकार काकई बार अपराध करके बच जायें पर एक पकड़े जाने पर पूरा दण्ड लि जाये
अंधा क्या चाहे दो आँखअत्यावश्यक, वस्तु को प्राप्त करने की लालसा
के हंसा माती चुगै के लंघन कर मर जायेबहुत स्वादिष्ट भोजन करने वाला व्यक्ति
कोठी वाला रोवे छप्पर वाला सोवेअधिक धन दुःख का कारण है।
मुफ्त का चंदन घिस मेरे नंदनमुफ्त में मिली वस्तु का अपमान करना।
आया है जो जायेगा क्या राजा क्या रंकमृत्यु रका प्रकृति का शासवत  नियम है।
बन्दर की आशनाई घर मंे आग लगाई।मूर्ख से मित्रता करने पर हानि होती है।
कंगाली में आटा गीला होनामुसीबत पर और मुसीबत आना
ओस चाटने से प्यास नहीं बुझतीआवश्यकता से कहीं न्यून वस्तु की प्राप्ति।
ईतर के घर तीतर बाहर टांगे कि भीतरनई चीज लोगों को दिखाने की चाह
खारी मजदूरी चोखा कामनगद  और अच्छी मजदूरी से काम अच्छा होता है।
मढे़ दमामा जात कहुँ चूहे के चामछोटे लोगों से बड़ा काम नहीं होता
एक मछली सारे तालाबा को गंदा करती है।एक बुरे व्यक्ति के कारण पूरी बिरादरी बदनाम होती है।
कबीरा हाँड काठ की चढ़े न बारबारछल कपट का काम एक बार होता है।
जिस पेड के तले बैठना उसी की जड़े काटनाआश्रय देने वाले का विनाश करना।
ठाली बनिया क्या करै, इस कोठी  के धान उस कोठी में धरैबेकार आदमी व्यर्थ के काय्र्र करना है।
धोवे सौ-सौ बार भी काजर होये न स्वेतबुरे व्यक्ति पर शिक्षा का कोई असर नहीं होता।
साॅप छछुन्दर की सी गति होनादुविधा में पड़ना
जादू वही जो सिर चढ़कर बोले उपाय वही अच्छा जो सफल हो और जिसे विरोधी भी माने
एक चुप सौ को हरायेमौन रहना अत्यंत हितकारी है।
चोट्टी कुतिया जलेबी की रखवालीभक्षक को रक्षक का काम सौंपना
जो तोको काॅटा वुबे ताहि बोय तू फूलबुराई का बदला भलाई से दो
दाल-भात में मूसलचन्द्रआवश्यक दखल  देना
दुधारू गाय की लात भलीजिससे लाभ की आशा हो उसकी झिडकियां भी भली
भूखे भजन न होहिं गोपालाक्षुधा तृप्ति से हो कार्य झमता आती ह।
मुल्ला की दौड़ मस्जिद तकजिसका आना जाना सीमित क्षेत्र तक हो
पानी पीकर जाति नहीं पूछी जाती।काम होने के बाद उसके बारे में खोजबीन करना व्यर्थ है।
छोड़न का घर कितनी दूरव्यक्ति को छोटा काम भी बड़ी लगता है।
पाँसा पड़े सो दाँव, रोजा करे सो न्याउअधिकार की बात मान्य होती है।
दलाल दीवाला, क्या मस्जिद का ताला क्याविशेष क्षति का भय न हो तो रक्षा की व्यवस्था व्यर्थ है।
आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजाकिसी की आँखों के आगे उसका सर्वस्व लुट जाना
ओठों निकली कोठों चढ़ीमुँह से निकली बात गुप्त नहीं रहती
अपनी नाक काटकर दूसरे  का अपशकुन करनाअपनी हानि करके दूसरे की हानि करना।
होम करते हाथ जलनाकिसी अच्छे काम को करते हुए विपत्ति आ जाना।
नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है।बड़ों के सामने छोटों की बात कोई नहीं सुनता।
अपनी पगढ़ी अपने हाथ धोनाव्यक्ति अपनी प्रतिष्ठा स्वयं बनाता है।
चोरी का माल मोरी मेंहराम की कमाई व्यर्थ जाती है।
उल्टेबाँस बरेली कोविपरीत कार्य
चाँद को भी ग्रहण लगता है।विपत्ति सभी पर आती है।

Major Technological Inventions And Inventors - प्रमुख तकनीकी आविष्कार और आविष्कारक

आप तो जानते है कि "आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है" लेकिन इन आविष्कार को करने के लिये आविष्कारक भी होने चाहिये, अगर ये आविष्कारक (...