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Saturday, 23 December 2017

What is Wi-Fi - वाई-फाई क्या है

वाई-फाई ( Wi-Fi) आधुनिक युग का डाटा और इंटरनेट शेयर करने का सबसे आसान और तेज तरीका है, लेकिन ये वाई-फाई ( Wi-Fi ) आखिर है क्‍या और किस तकनीक पर आधारित है आईये जानने की कोशिश करते हैं - वाई-फाई क्या है (Kya Hai Wi-Fi) -

वाई-फाई क्या है - What is Wi-Fi



वाई-फाई ( Wi-Fi) की पूरा नाम (full form) वायरलेस फिडेलिटी (Wireless fidelity) है, वाई-फाई ( Wi-Fi) आविष्‍कार John O'Sullivan और John Deane ने सन् 1991 में किया था। असल में यह एक वायरलैस नेटवर्किंग सुविधा है, जिसे आप (WLAN) यानि Wireless Local Area Network के नाम से जानते हैं, जिसकी सहायता से आप बडी आसानी से मोबाइल, लैपटॉप, कंम्‍प्‍यूटर और प्रिंटर जैसी डिवाइसों को इंटरनेट और नेटवर्क से जोड सकते हैं।

वाई-फाई के नाम से जुडा तथ्‍य - Facts About Wi-Fi Technology



कहते हैं वायरलेस फिडेलिटी (Wireless fidelity) का असल में कोई मतलब नहीं है, असल में वाई-फाई एलायंस (Wi-Fi Alliance) कंपनी इस वाई-फाई ( Wi-Fi) डिवाइस को बनाती है उन्‍होनें हाई-फाई ( Hi-fi ) यानि हाई फिडेलिटी की तर्ज पर इसे वाई-फाई नाम दिया है, जिसका कोई अर्थ नहीं है। यह केवल वाई-फाई एलायंस पंजीकृत ट्रेडमार्क शब्द है। लेकिन फिर भी इसे वायरलेस फिडेलिटी (Wireless fidelity) केे नाम सेे जाना जाता है।

वाई-फाई कैसे काम करता है - How Does Wi-Fi Technology Work



वाई-फाई ( Wi-Fi) डिवाइस बिना किसी तार के दो डिवाइसों के बीच में कनेक्‍शन बनाता है, जिसके लिये यह रेडियो फ्रीक्वेंसी (Radio Frequency) का इस्‍तेमाल करता है, यह टेक्नोलॉजी IEEE 802.11 कई स्टैण्डर्ड पर बेस्ड है जिसकी आवृत्ति 2.4GHz से 5GHz के बीच होती है, वायरलेस नेटवर्क किसी भी डिवाइस को कनेक्‍ट करने के लिये एक Access Point (AP) की आवश्‍कयता होती है और जिस ऐरिया में वाई-फाई ( Wi-Fi) होता है उसे हॉट-स्पॉट (Hotspot) कहते है।



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What is Li-Fi - क्‍या है लाई-फाई

अब तक आप वायरलेस नेटवर्क ( Wireless Network ) बनाने के लिये वाई-फाई ( Wi-Fi) तकनीक का इस्‍तेमाल कर रहे थे, लेकिन टेक्नोलॉजी ( Technology ) बदलते देर नहीं लगती है, एक नई तकनीक लाई-फाई (Li-Fi) आ चुकी है, Li-Fi की स्‍पीड Wi-Fi के मुकाबले 100 गुना तेज है, आईये जानते हैं क्‍या है लाई-फाई - What is Li-Fi

क्‍या है लाई-फाई - What is Li-Fi




लाई-फाई ( Li-Fi ) का पूरा अर्थ है लाइट फिडेलिटी (light fidelity), इसका अाविष्‍कार (Invention) एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के एक प्रोफ़ेसर/इंजीनियर हेराल्ड हास ( Harald Haas ) ने सन् 2011 में किया था। यह भी वाई-फाई ( Wi-Fi) की तरह ही एक वायरलैस नेटवर्किंग सुविधा है। जो Purelifi के सीईओ भी हैं।


वाई-फाई ( Wi-Fi) रेडियो फ्रीक्वेंसी (Radio Frequency) पर आधारित है, इसके विपरीत लाई-फाई ( Li-Fi ) असल में प्रकाश पर आधारित है, जो वाई-फाई से की तुलना में 100 गुना तेजी से डाटा का आदान-प्रदान करने में सक्षम है। लाई-फाई ( Li-Fi ) तकनीक में डाटा का आदान-प्रदान करने के लिये LED बल्‍ब का प्रयेाग किया जाता है यानि इस तकनीक में डेटा विजिबल लाइट कम्युनिकेशन (वीएलसी) द्वारा ट्रांसफर होता है। जिस प्रकार आपका टीवी रिमोट काम करता है कुछ-कुछ उसी तरह।


लाई-फाई तकनीक का एक बड़ा फायदा यह है कि यह वाई-फाई की तरह दूसरे रेडियो सिग्नल के लिए अवरोध नहीं बनता है. इसलिए इसका इस्तेमाल हवाई जहाज जैसी उन जगहों पर किया जा सकता है जहां रेडियो सिग्नल में अवरोध की समस्या आती है।


इसमें एक खामी भी है, चूंकि यह तकनीक प्रकाश पर आधारित है इसलिये यह फाई ( Wi-Fi)सिग्‍नल की तरह दीवार या किसी ठोस वस्‍तु के अार-पार जाने में अक्षम है।


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What is Hi Fi ( High Fidelity ) - क्‍या है ( हाई-फाई ) हाई फिडेलिटी

अब आपने वाई-फाई ( Wi-Fi ) समझा, लाई-फाई ( Li-Fi ) समझा अब बारी है इससे मिलते जुलते एक और शब्‍द की हाई-फाई (Hi Fi) , लेकिन ये वो वाला हाई-फाई नहीं है जिसे आप आमतौर पर किसी भी विशिष्‍टता बताने के लिये प्रयोग करते हैं, ये है एक नये जमाने की टेक्नोलॉजी है, जिसे आप प्रयोग काफी दिनों सेे प्रयोग कर रहे हैं, आईये तो जानते हैं क्‍या है (Hi Fi) हाई फिडेलिटी - What is Hi Fi ( High Fidelity )

क्‍या है ( हाई फाई ) हाई फिडेलिटी  टेक्नोलॉजी - What is Hi Fi Technology



असल में हाई फिडेलिटी ( High Fidelity ) शब्‍द आज ऑडियाे या साउण्‍ड से जुडा हुआ है, इस तकनीक में ऑडियाे की गुणवत्‍ता में उच्‍च स्‍तर का सुधार किया जाता है, जिससे उसे आपके सुनने लायक बनाया जा सके, लेकिन इसमें हमेशा सुधार की गुंंजाइश रहती है, यह तकनीक तक से चली आ रही हैै जब से स्‍पीकर बने हैं -


उदाहरण के लिये वर्ष 1960 में रिलीज हुई ऐतिहासिक फिल्म मुगले-ए-आजम को कलर करने के बाद उसके साण्‍उड को डिजिटल किया गया, क्‍योंकि उस मूवी में रिकार्डेट ऑडियो आज के समय के स्‍पीकर के हिसाब से ठीक नहीं था, उसमें काफी सारी खामियां थी, लेकिन उस समय के हिसाब से वही साण्‍उड ठीक था। यानि ( हाई-फाई ) हाई फिडेलिटी पर काम बहुत समय से चल रहा है।


तो आखिर क्‍या होती है ( हाई-फाई ) हाई फिडेलिटी साउण्‍ड (high fidelity sound) , इसे ऐसे कह सकते हैंं कि हम अगर आप ऑख बंंद करके स्‍पीकर से साउण्‍ड सुनें तो आपको ऐसा लगे कि आप वास्‍तविकता में उसी जगह पर हैं जिसकी आप आवाज सुन रहे हैं न कि कोई रिकॉर्डिंग।

 
इसी तकनीक का इस्‍तेमाल कर आज के दौर के स्‍पीकर ( speaker) हेडफोन ( Headphones ) और साउंड सिस्टम (Stereo Systems) बनाये जा रहे हैं, जो आपको वास्‍तविक साउंड ( Real Sound ) का अनुभव करा रहे हैं। जिससे कभी ध्‍वनि भ्रम (real sonic illusion) की स्थिति भी उत्‍पन्‍न हो जाती है।


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What Happens When We Click REFRESH Button In Computer - कंप्यूटर रिफ्रेश करने से क्‍या होता है ?

अक्‍सर लोग अपने Computer के Desktop को दे दना दन Refresh करते रहते हैं, लेकिन जब उनसे पूछा कि भई ऐसा क्‍यों कर रहे तो उन्‍होनें कहा कि दूसरे भी ऐसा करते हैं और किसी ने कहा कि Refresh करने से Computer की Speed बढती है तो क्‍या ये वाकई में सही है, आईये जानने की कोशिश करते हैं कि कंप्यूटर रिफ्रेश करने से क्‍या होता है (Computer Refresh Karane Se Kya Hota Hai) -

कंप्यूटर रिफ्रेश करने से क्‍या होता है - Computer Refresh Karane Se Kya Hota Hai



Computer को Refresh करने के लिये माउस से Right Click किया जाता है और मेन्‍यू में से Refresh को सलेक्‍ट किया जाता हैै या कीबोर्ड से Shortcut Key " F5 " का प्रयोग कर Refresh किया जाता है, बहुत से लोगों को केवल यही पता है कि Computer में Refresh करने का Option केवल Desktop पर ही होता है, लेकिन ऐसा नहीं है Refresh का Option Computer में उन सभी जगह होता है जहॉ उसकी जरूरत होती है, Desktop पर किसी Folder के अंदर यहॉ तक कि कंट्रोल पैनल (Control Panel) में भी, ऐसा क्‍यों ?





    • कंप्यूटर हार्डवेयर सीखें

    • 5 टिप्‍स सेकेंड हैंड या पुराना कंप्‍यूटर खरीदने के लिये

    • इन टिप्स से कंप्यूटर को बनाएं सुपरफास्‍ट





लेकिन 90% लोग यही करते हैं आप भी right-click – refresh’ .. ‘right-click – refresh’ जब भी खाली हों बस ‘right-click – refresh’ पर सोचा है इससे होता क्‍या है, चलिये बताते हैं -


पुराने कंप्‍यूटर (Old Computer) बहुत स्‍लो हुआ करते थे, जब उनमें कोई नया फोल्‍डर या फाइल बनायी जाती थी या कोई अन्‍य बदलाव किया जाता था तो वह इतनी जल्‍दी दिखाई नहीं देेता था, लेकिन रिफ्रेश करने से वह बदलाव तुरंंत दिखाई दे जाता था।


अगर तकनीकी भाषा में कहें तो जब प्रोसेसर (Processor) और रैम (RAM)  लंबे समय तक कार्य करने के बाद कंप्‍यूटर स्‍लो हो जाते हैं, कंप्‍यूटर को अपडेट (Update) नहीं कर पाते हैं और जब आप Refresh करते हैं तो प्रोसेसर सक्रिय हो जाता है अौर रैम फ्री हो जाती है, एक प्रकार से इससे आपको स्‍पीड बढने का एहसास होता है लेकिन असल में F5 या Refresh करने की प्रक्रिया आपके रैम और प्रोसेसर की स्थिति को up-to-date करने के लिये होती है।


आज के कंप्‍यूटर अपने आप अपडेट (Update) हो जाते हैं और आपको पता भी नहीं चलता है लेकिन अगर ऐसा न हो तो आप F5 या Refresh कर सकते हैं और यह ऑप्‍शन है भी इसलिये।


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क्या है ड्रोन/क्‍वाड कॉप्‍टर विमान - What is Drone/Quadcopter

अभी हाल ही में गूगल और एमेजन में ड्रोन (Drone) के माध्‍यम से सामान की होम डिलेवरी करने की तैयारी है, भारत में ड्रोन (Drone) का प्रयोग बढता जा रहा है, कहीं पुलिस अपराधियों को पडकने के लिये तो कहीं किसान अपने खेतों में कीटनाशक का छिड़काव करने के लिये ड्रोन (Drone)  का इस्‍तेमाल कर रहे हैं और कुछ जगह तो शादियों में भी वीडियोग्राफी करने के लिये ड्रोन कैमरे (Drone Camera) का इस्‍तेमाल हो रहा है, लेकिन अभी भी बहुत लोगों के ड्रोन अभी भी एक पहेली है तो आईये जानते हैं क्या है ड्रोन/क्‍वाड कॉप्‍टर विमान - Kya Hai Drone/Quadcopter

क्या है ड्रोन/क्‍वाड कॉप्‍टर विमान - Kya Hai Drone Quadcopter



ड्रोन एक आधुनिक युग का चालक रहित विमान है, इसे कहीं दूर से रिमोट या कंप्‍यूटर द्वारा ऑपरेट किया जा सकता है, एक बेसिक ड्रोन डिजायन चार विंंग यानि पंखोंवाला (चतुष्कोण) होता है, इसलिये इसे क्‍वाड कॉप्‍टर भी कहते हैं। ड्रोन शब्द अंग्रेजी भाषा का शब्द है जिसका हिंंदी भाषा में अर्थ होता है नर मधुमक्‍खी। असल में यह नाम इसके उडने के कारण इसे मिला  यह बिलकुल एक मधुमक्‍खी की तरह ही उडता है, एक जगह पर स्थिर भी रह सकता है यानि मंडरा सकता है।

ड्रोन का प्रयोग पहली बार आस्ट्रिया ने वेनिस पर बम बरसाने के लिए किया था और प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 'फ्लाइंग बम'  का काफी इस्तेमाल किया गया था असल में यह मानव रहित विमान थे जो विकसित होकर आज के दौर के ड्रोन बने हैं।

अभी भारत में ड्रोन के सटीक कानून नहीं है, लेकिन (डीजीसीए) यानि नागर विमानन महानिदेशालय अब इसके लिए गाइडलाइन तैयार कर रहा है, जिसमें भारत में ड्रोन उडाने के लिये कडे नियम बनाये जा सकते हैं, जिसमें हर ड्रोन के लिये एक अलग यूनिक आइडैंटीफिकेशन नंबर (यू.एन.आई.) नंबर होगा बिलकुल फोन के आईईएमआई नंबर की तरह।

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What is Dictaphone - क्‍या है डिक्टाफोन

डिक्टाफोन (Dictaphone) शायद यह नाम बहुत कम लोगों ने सुना होगा, लेकिन आपको जानकार आश्‍चर्य होगा कि यह तकनीक 1881 को हमारे बीच में आ गयी थी, डिक्टाफोन (Dictaphone) ध्वनि रिकॉर्डिंग करने वाला एक अविष्‍कार था, जिसे बनाने में अलेक्जेंडर ग्राहम बेल (Alexander Graham Bell) महत्‍वपूर्ण योगदान रहा- आईये जानते हैं क्‍या है डिक्टाफोन - What is Dictaphone

क्‍या है डिक्टाफोन - Kya Hai Dictaphone



आज आप बोले गये शब्‍दों (Speech) को Text में Converter के लिये Speech Recognition जैसे Software का इस्‍तेमाल करते हैं, जिसके लिये अापको माइक्रोफोन (Microphone) और कंप्‍यूटर (computer) का इस्‍तेमाल करना होगा, लेकिन हर जगह तो आप माइक्रोफोन (Microphone) और कंप्‍यूटर (computer) नहीं ले जा सकते हैं, लेकिन डिक्‍टाफोन ( Dictaphone) एक ऐसा उपकरण है जो बोले हुए शब्दों को रिकार्ड कर सकता है और जरूरत पडने पर टाइप में या Text में Convert भी कर सकता है।


अभी हाल ही में दिल्‍ली की निचली अदालत में डिक्‍टाफोन ( Dictaphone) का प्रयोग करने पर विचार किया गया है, जिसमें डिक्‍टाफोन ( Dictaphone) स्टेनो टाइपिस्ट (Steno Taepist) की गैरमौजदूगी में भी जजों द्वारा दी गयी डिक्टेशन (dictation ) के आधार पर जजमेंट टाइप कर सकेेगा। यानि जज बिना स्टेनो टाइपिस्ट (Steno Taepist) के भी आर्डर टाइप कर सकेंगें।


"डिक्टाफोन" नाम वाई-फाई (Wi-Fi) की तरह ही एक अमेरिकी कंपनी का ट्रेडमार्क है, जो श्रुतलेख मशीन (dictation machine) बनाया करती थी, जिससे अाप किसी भी भाषण आद‍ि को रिकार्ड कर बाद में सुन सकते थे और टाइप कर सकते थे। सन् 2000 से पहले डिक्टाफोन केवल आवाज रिकार्ड कर सकता था, इनमें वॉइस रिकग्निशन सिस्टम (Voice Recognition Systems) जो रिकार्ड किये गये शब्‍दों को टाइप करने में सक्षम था। वर्तमान में "डिक्टाफोन" कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कंपनी Nuance Communications की एक शाखा है।

आज के समय में कई कंपनियॉ वॉइस रिकग्निशन सिस्टम (Voice Recognition Systems) का प्रयोग कर रही हैं लेकिन यह सब "डिक्टाफोन" से ही प्रेरित हैं।


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क्या है ड्रोन/क्‍वाड कॉप्‍टर विमान - What is Drone/Quadcopter

अभी हाल ही में गूगल और एमेजन में ड्रोन (Drone) के माध्‍यम से सामान की होम डिलेवरी करने की तैयारी है, भारत में ड्रोन (Drone) का प्रयोग बढता जा रहा है, कहीं पुलिस अपराधियों को पडकने के लिये तो कहीं किसान अपने खेतों में कीटनाशक का छिड़काव करने के लिये ड्रोन (Drone)  का इस्‍तेमाल कर रहे हैं और कुछ जगह तो शादियों में भी वीडियोग्राफी करने के लिये ड्रोन कैमरे (Drone Camera) का इस्‍तेमाल हो रहा है, लेकिन अभी भी बहुत लोगों के ड्रोन अभी भी एक पहेली है तो आईये जानते हैं क्या है ड्रोन/क्‍वाड कॉप्‍टर विमान - Kya Hai Drone/Quadcopter

क्या है ड्रोन/क्‍वाड कॉप्‍टर विमान - Kya Hai Drone Quadcopter



ड्रोन एक आधुनिक युग का चालक रहित विमान है, इसे कहीं दूर से रिमोट या कंप्‍यूटर द्वारा ऑपरेट किया जा सकता है, एक बेसिक ड्रोन डिजायन चार विंंग यानि पंखोंवाला (चतुष्कोण) होता है, इसलिये इसे क्‍वाड कॉप्‍टर भी कहते हैं। ड्रोन शब्द अंग्रेजी भाषा का शब्द है जिसका हिंंदी भाषा में अर्थ होता है नर मधुमक्‍खी। असल में यह नाम इसके उडने के कारण इसे मिला  यह बिलकुल एक मधुमक्‍खी की तरह ही उडता है, एक जगह पर स्थिर भी रह सकता है यानि मंडरा सकता है।

ड्रोन का प्रयोग पहली बार आस्ट्रिया ने वेनिस पर बम बरसाने के लिए किया था और प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 'फ्लाइंग बम'  का काफी इस्तेमाल किया गया था असल में यह मानव रहित विमान थे जो विकसित होकर आज के दौर के ड्रोन बने हैं।

अभी भारत में ड्रोन के सटीक कानून नहीं है, लेकिन (डीजीसीए) यानि नागर विमानन महानिदेशालय अब इसके लिए गाइडलाइन तैयार कर रहा है, जिसमें भारत में ड्रोन उडाने के लिये कडे नियम बनाये जा सकते हैं, जिसमें हर ड्रोन के लिये एक अलग यूनिक आइडैंटीफिकेशन नंबर (यू.एन.आई.) नंबर होगा बिलकुल फोन के आईईएमआई नंबर की तरह।

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क्‍या होता है एनएफसी फीचर - What Is NFC Feature

एनएफसी फीचर (NFC feature) -  अगर आपने अभी हाल ही में सैमसंग स्मार्टफोन गैलेक्सी जे 3 (Samsung Galaxy J3) हो तो इसमें मोटरसाइकिल सवारों के लिए एक खास फीचर बाइक एस मोड दिया गया है और साथ में एक एस बाइक मोड का स्‍टीकर (S Bike Mode Sticker) दिया गया है, जिस पर मोबाइल टच करने से मोबाइल का एस बाइक मोड (S Bike Mode) एक्टिविट हो जाता है, असल में यह फोन एनएफसी इंटिग्रेटेड (Integrated NFC) है। आईये जानते हैं कि आखिर क्‍या है एनएफसी तकनीक (NFC technology) और यह कैसे काम करती है - क्‍या होता है एनएफसी फीचर - What Is NFC Feature

क्‍या होता है एनएफसी फीचर - Kya Hota Hai NFC Feature




एनएफसी क्या है - NFC Kya Hai ?


असल में एनएफसी ( NFC) की फुलफार्म है नियर फील्ड कम्युनिकेशन (Near Field Communication) है, यह एक High Frequency Wireless Communication Technology है, जो कम दूरी यानि ज्‍यादा से ज्‍यादा 10 सेमी की दूरी से दो डिवाइसों के बीच डाटा ट्रांंसफर कर सकती है, इसकी मदद से आप केवल एक फोन का दूसरे फोन से टच करने भर से ही तेज गति से डाटा ट्रांसफर कर सकते हैं। NFC कनेक्‍शन डिवाइस का टच करने पर तुरंत जुड जाता है और काम खत्‍म होने पर अपनेआप बंद हो जाता है। NFC कनेक्‍शन ब्लूटूथ के मुकाबले 300 MBPS की गति सेे डाटा ट्रांसफर कर सकता है।


सैमसंग स्मार्टफोन गैलेक्सी जे 3 (Samsung Galaxy J3) के साथ में एस बाइक मोड का स्‍टीकर (S Bike Mode Sticker) दिया जाता है यह स्‍टीकर एक NFC Tag है, जिसमें NFC टैग एक तरह की चिप होती है, जिसमें छोटी सी इन्फोर्मेशन (Information) सेव की जा सकती हैै, बिलकुल क्‍यूआर कोड (QR Code) की तरह और जब आप इससे मोबाइल टच करते हैं जिसमें डाली गयी सूचना केे अााधार पर आपके फोन का एस बाइक मोड (S Bike Mode) एक्टिव हो जाता है।

इसके अलावा आप NFC से आप डाटा ट्रांसफर कर सकते हैं, मोबाइल वॉलेट (Mobile Wallet) का इस्‍तेमाल कर मोबाइल पेमेंट कर सकते हैं। अब तो NFC Business Card का भी प्रयोग होने लगा है, जिसमें आपकी सारी सारी डिटेल्स रहती है, जब किसी को वह डिटेल्स देनी हो तो बस अपना मोबाइल उसके मोबाइल से टच कर दिया।


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मोबाइल प्रोसेसर क्या है - What Is Mobile Processor

स्‍मार्टफोन भी एक प्रकार का कंप्यूटर होता है और जिस प्रकार कंप्‍यूटर में प्रोसेसर (Processor) लगा होता है, उसकी प्रकार स्‍मार्टफोन में भी प्रोसेसर (Processor) होता है और आजतक लोग फोन खरीदने से पहले यह देखने लगे हैं उसमें कौन सा प्रोसेसर (Processor) लगा है, अगर आप भी नया फोन खरीदने जा रहे हैं तो पहले मोबाइल प्रोसेसर (Mobile Processor) जान लें -

मोबाइल प्रोसेसर क्या है - What Is Mobile Processor



आजकल मार्केट में डुअल-कोर, क्वाड-कोर, ऑक्टा-कोर वाले फोन आ रहे हैं, लेकिन ज्‍यादातर यूजर्स पहले ही प्रोसेसर नाम से कंफ्यूज थे अब वे इससे परेशान हैं कि ये कोर क्‍या है वो भी कई तरह के ? अब कैसे एक अच्‍छे प्रोसेसर वाले फोन का चुनाव करें, सबसे पहले जानते हैं कि प्रोसेसर में कोर क्‍या है ?

प्रोसेसर में कोर क्‍या है - What Is Core In Processor


असल मेंं कोर (Core) सीपीयू यानि प्रोसेसर के अंदर लगी एक गणना (computation) करने वाली यूनिट या चिप होती है, एक कोर वाले को Single Core Processor कहते हैं प्रोसेसर की शक्ति गीगाहर्टज (GHz) पर निर्भर करती है, यानि जो प्रोससेर जितने ज्‍यादा गीगाहर्टज (GHz) का होगा उतनी ही तेजी से गणना करेगा। अब फिर सेे बात करते हैंं कोर की डुअल-कोर, क्वाड-कोर, ऑक्टा-कोर क्‍या हैं ?



Single Core Processor ज्‍यादा बोझ पडते ही हैंग होने लगता था, इसलिये इसकी क्षमता बढाने के लिये प्रोसेसर में अतिरिक्‍त कोर (Core) लगाये जाते हैं, इनकी संख्‍या के आधार पर ही प्रोसेसर के नाम पडें आईये जानते हैं -


  1. दो कोर मतलब -  Dual Core Processor

  2. चार कोर मतलब - Quad Core Processor

  3. छह कोर मतलब - Hexa Core Processor

  4. आठ कोर मतलब - Octo Core Processor

  5. दस कोर मतलब - Deca Core Processor


स्‍मार्टफोन के लिये Snapdragon, Mediatek और ARM Cortex जैसी कंपनियां Processor बना रहीं हैं, आप अपने बजट के हिसाब से कोर (Core) और गीगाहर्टज (GHz) को देखते हुए मोबाइल प्रोसेसर (Mobile Processor) के अनुसार स्‍मार्टफोन का चुनाव कर सकते हैं।



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प्रोसेसर में गीगाहर्ट्ज़ क्‍या होता है - What Is GHZ (Gigahertz) in Processor

प्रोसेसर ( Processor) को तो आप समझ ही चुके हैं, लेकिन इसकी क्षमता निर्धारित करने वाला शब्‍द और भी है गीगाहर्ट्ज़ (Gigahertz), हमने यही पढा है कि प्रोसेसर जितने ज्‍यादा गीगाहर्ट्ज़ (Gigahertz) का होगा, वह उतना ही शक्तिशाली होगा लेकिन यह गीगाहर्ट्ज़ (Gigahertz) होता है, आईये जानते हैं -

प्रोसेसर में गीगाहर्ट्ज़ क्‍या होता है - What Is GHZ (Gigahertz) in Processor



गीगाहर्ट्ज़ को समझने से पहले हमें हर्ट्ज़ या CPU Clock Rate या CPU Clock Speed को समझना होना, प्रोससर के अंदर एक प्रकार की घडी होती है वह एक सेकेण्‍ड में जितनी बार घूमती है, यानि गणना करने में जितना समय लेती है उसे Clock Speed कहते है और इस घडी की ईकाई है हर्ट्ज, यानि अगर आपके सीपीयू की क्षमता 1 हर्ट्ज है, Clock Speed 1 चक्र प्रति सेकंड मानी जायेगी

अब जरा इस टेबल को देखिये  -



  • 1 गीगाहर्ट्ज़ = 1000 मेगाहर्ट्ज़ = 1000000 किलोहर्ट्ज =  1000000000 हर्ट्ज

  • 1 मेगाबाइट = 1,000,000 बाईट = 1024 किलाेबाइट = 1024 हर्ट्ज



इस प्रकार 1 गीगाहर्ट्ज़ (Gigahertz) का मतलब 1,000,000,000 हर्ट्ज होता है, इसका मतलब अगर आपके प्रोसेसर पर लिखा है कि वह 2.1 GHz का है तो वह तो वह उसकी Clock Speed होगी यानि वह 1 सेकेण्‍ड में 2.1x 1000000000 = 2100000000 किलाेबाइट डाटा की गणना कर सकता है।


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कैप्चा क्‍या है - What Is Captcha

अक्सर आप जब किसी साइट पर नई ईमेल आईडी या नया अकाउंट बनाते हैं तो एक टेढ़ी-मेढ़ी सी इमेज दिखाई देती है जिसमें कुछ नंबर या फोटो दिखाई देते हैंं इसे कैप्चा (Captcha) कहते हैं, लेकिन यह कैप्चा (Captcha) होता क्या है जो आम यूजर्स को अक्सर परेशान करता है, आखिर कैप्चा (Captcha) बनाने की क्‍या जरूरत थी, आईये जानने की कोशिश करते हैं - कैप्चा क्‍या है -  What Is Captcha

कैप्चा क्‍या है - Captcha Kya Hai



कैप्चा (Captcha) एक प्रकार का चैलेंज टेस्ट होता है कैप्चा (Captcha) की फुल फॉर्म है, (Completely Automated Public Turing Test to tell Computers and Humans Apart) जिसे केवल इंसान ही सुलझा सकता है इससे पता चलता है की अकाउंट बनाने वाला व्यक्ति इंसान ही है ना कि कंप्यूटर।


कैप्चा (Captcha) के टेढ़े-मेढ़े अक्षरों को केवल मनुष्‍य ही पढ सकता हैै और समझ सकता है, फिलहाल कैप्चा (Captcha) को पढना कंंप्‍यूटर के बस में नहीं है। कैप्चा (Captcha) का सीधा सा फार्मूला है कि कैप्चा (Captcha) हल कीजिये और साबित कीजिये कि आप कंप्‍यूटर नहीं मनुष्‍य हैं। लेकिन मनुष्‍य को खुद को साबित करने की जरूरत क्‍यों पडी ?


चलिये उदाहरण के लिये जीमेल को लेते हैं, जब आप जीमेल पर नया अकाउंट बनाते हैं तो आपकी सुविधा के लिये गूगल की तरफ से अपने सर्वर पर 15 GB का स्‍पेस फ्री दिया जाता है, अब कुछ खुरापती लोग ऐसे भी होते हैं जिन्‍हें आप स्पैमर के नाम सेे भी जानते हैं वो कुुछ ऐसे ऑटोमेटिक कंप्‍यूटर प्रोग्राम बना देते हैं जो दिन भर बिना बात जीमेल पर नया अकाउंट बनाते रहेंं, अब सोचिये अगर दिन भर में इस ऑटोमेटिक कंप्‍यूटर प्रोग्राम ने 100 नयेे अकाउंट बना दिये तो जीमेल का 1500 GB यानि 1.5 TB स्‍पेस बेकार कर दिया बस उन्‍हीं से बचने के लिये कैप्चा (Captcha) कोड को बनाया गया है

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क्‍या है एफिलिएट मार्केटिंग - What is Affiliate Marketing

इंटरनेट पर सर्फ करते समय आपको कई सारी वेबसाइट ऐसे मिल जायेगीं, जिन पर एफिलिएट मार्केटिंग (Affiliate Marketing ) शब्‍द का प्रयोग किया जाता है, तो क्‍या होता है ये एफिलिएट मार्केटिंग (Affiliate Marketing ) और क्‍या फायदा है इसका आईये जानते हैं - क्‍या है एफिलिएट मार्केटिंग - What is Affiliate Marketing -

क्‍या है एफिलिएट मार्केटिंग - Kya Hai Affiliate Marketing




आज जब डिजिटल मार्केट अपने पैर भारत में जमा रहा है तो ऐसे कई सारी ई-कॉमर्स (E-commerce) कंपनियां नये ग्राहकों को जोडनेे और प्रचार करने के लिये एफिलिएट मार्केटिंग (Affiliate Marketing) का सहारा लेती है, एफिलिएट मार्केटिंग (Affiliate Marketing) के लिये आम यूजर्स का ही सहारा लिया जाता है और होने वाले फायदे में यूजर्स को कुछ कमीशन दिया जाता है, जिससे प्रचार करने वाले यूजर की भी कुछ कमाई हो जाती है

Affiliate Marketing कैसे काम करता है


जब आप किसी ई-कॉमर्स (E-commerce) कंपनी का एफिलिएट मार्केटिंग (Affiliate Marketing) प्रोग्राम ज्वाइन करते है तो आपको एक रेफरल लिंक/कोड (Referral Link/Code) प्राप्त होता है और जब भी कोई व्यक्ति या ग्राहक आपके रेफरल लिंक/कोड (Referral Link/Code) पर क्लिक कर कोई सामान खरीदता या कुछ डाउनलोड करता है तो कंपनी आपको कमीशन देती है, इस प्रकार कंपनी और आपका दोनों का फायदा होता है, इसमें कमाई सीमित नहीं होती है आपकी परफॉरमेंस जितनी अच्‍छी होगी आप उनका ही फायदा एफिलिएट मार्केटिंग (Affiliate Marketing) से ले पायेगेंं


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क्‍या है टाइम जोन ? What is Time Zone

टाइम जोन (Time Zone) या मानक समय इसे आप क्षेत्रीय समय के नाम सेे भी जानते हैं यह 1884 में 13 अक्टूबर के ही दिन ग्रीनविच मीन टाइम तय किया गया था और दुनिया भर की घडियों का समय इसी टाइम जोन (Time Zone) सेे तय किया जाता है लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि आखिर इस टाइम जोन (Time Zone) को निर्धारित करने की क्‍या जरूरत है, आईये जानते हैं क्‍या है टाइम जोन ? What is Time Zone

क्‍या है टाइम जोन ? What is Time Zone




18 वींं सदी से पहले दुनिया भर में सूर्य घड़ी (Sun Clock) सेे समय देखा और मिलाया जाता था, लेकिन  सर सैंडफोर्ड फ्लेमिंग (Sir Sandford Fleming) 1884 में टाइम जोन को बनाया, जिससे दुनिया भर के समय को सही द‍िशा मिली


असल में जब सूर्य उदय होता है तो एक समय में पृथ्वी के किस एक ही हिस्से में रह सकता है। इस प्रकार पृथ्वी किसी हिस्से में सूर्य की तिरछी किरणें पड़ती हैं तो कहीं सीधी किरणें। इसीलिए जब किसी स्थान में दोपहर का समय होता है किसी स्थान में शाम का और किसी में रात का समय भी हो सकता है।


अगर पूरी दुनिया की घडियांं एक साथ मिला दी जायें तो बहुत बडी गडबड हो जायेगी जैसे किसी के यहां 5 बजे सुबह होगी तो किसी के यहां 5 बजे दोपहर तो किसी के यहां 5 शाम। इस समस्या को हल करने के लिए समय देशांश रेखाओं के आधार पर क्षेत्रीय समय को बनाया गया।


पूरी दुनिया के नक्‍शे को देशांश रेखाओं (Longitude lines) के आधार पर प्रत्येक 15 अंश के अंतर पर 24 बराबर बराबर के काल्‍पनिक हिस्सों में बाँट दिया गया है और इसकी शुरुआत (0 अंश) से होती है। यह 0 अंश वाली रेखा इंग्लैंड के ग्रीनविच में स्थित वेधशाला से शुरू होती है, समय की गणना यहींं आरंभ होती है। इसे अंतर्रराष्ट्रीय मानक समय (ग्रीनविच मीन टाईम) के नाम से जाना जाता है। ग्रीनविच रेखा से दाहिनी ओर वाले देशों का समय आगे होता है और ग्रीनविच रेखा से बाईं ओर वाले देशों का समय पीछे होता है


इसी प्रकार हर देश का अपना मानक समय है भारत में यह रेखा जो कि इलाहाबाद के निकट नैनी से गुजरती है यही से भारत का राष्ट्रीय मानक समय माना जाता है भारत का मानक समय ग्रीनविच रेखा से 82.5° अंश दाहिनी ओर है, जिसका अर्थ है कि भारत का मानक समय ग्रीनविच के मानक समय से साढ़े पाँच घंटे आगे है। यानि जब ग्रीनविच रेखा के पास रात के 12 बजेंगे तब यहां के सुबह के 5.30 बजेंगे।



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Friday, 22 December 2017

क्‍या है इलेक्ट्रॉनिक आर्टिकल सर्विलांस - What is Electronic Article Surveillance (EAS)

EAS यानि इलेक्ट्रॉनिक आर्टिकल सर्विलांस (Electronic Article Surveillance) नये जमाने का एंटी थीफ सिस्‍टम (Anti-thief systems) है, EAS (Electronic Article Surveillance) का इस्‍तेमाल अब भारत में भी होने लगा है, आईये जानते हैं EAS (Electronic Article Surveillance) के बारे में


क्‍या है इलेक्ट्रॉनिक आर्टिकल सर्विलांस - What is Electronic Article Surveillance (EAS)


असल में ईएएस (EAS) का प्रयोग रात के चोरों के लिये नहीं बल्कि दिन के चोरों के लिये किया जा रहा है, ऐसे लोग जो दिन के समय भी लाइब्रेरी या शॉपिंग मॉल से लोगों की नजर बचाकर सामान चोरी कर लेते हैं, यह तकनीक उन्‍हीं लोगों को पकडने के लिये है। अभी हाल ही में विश्व पुस्तक मेला 2017 में भी किताब चोरों के लिए EAS यानि इलेक्ट्रॉनिक आर्टिकल सर्विलांस का तकनीक का प्रयोग किया गया हैै।

कैसे काम करती है EAS यानि इलेक्ट्रॉनिक आर्टिकल सर्विलांस


इसके तहत लाइब्रेरी या शॉपिंग मॉल हर प्रोडक्‍ट पर एक एक्टिवेटेड चिप लगाई जाती है इसे Security Tag या EAS Tag भी कहते हैं, अगर कोई व्‍यक्ति पेमेंट काउंटर पर बिना पेमेंट किये बाहर जाता है गेट पर लगे eas sensor उसे पकड लेते हैं जिससे सिक्‍योरिटी अलार्म (Security Alarm) बज उठता है और चोर पकडा जाता है, लेकिन जब आप पेमेंट काउंटर पर पेमेंट करते हैं तो EAS Tag को Tags Removal मशीन से डीएक्टिवेट कर दिया जाता है।


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क्‍या होता है कंप्‍यूटर में अवतार - What Is Avatar in Computer

जब से James Cameron की अवतार मूवी (Avatar Movie) आयी है तब लोगों में अवतार (Avatar) को लेकर जिज्ञासा बढ गयी है, वैसे तो हिंदू धर्म में जब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं या जन्‍म लेते हैं तो उसे अवतार कहते हैं लेकिन कंप्‍यूटर की दुनिया में अवतार (Avatar) अर्थ अलग ही होता है, तो क्‍या आप जानना नहीं चाहते हैं कि computing में क्‍या होता है अवतार (Avatar) -

क्‍या होता है कंप्‍यूटर में अवतार - What Is Avatar in Computer




कंप्‍यूटर Avatar आपका ग्राफिकल प्रतिरूप होता है, असल में जब आप गेम खेलते हैं या किसी चैटग्रुप में चैट करते हैं तो यह Avatar आपको री प्रेजेंट करता है, यह और भी कारगर तब होता है जब आप ऑनलाइन  मल्‍टीप्‍लेयर गेम खेल रहे होते हैं, जिसमें 2 या उससे अधिक प्‍लेयर होते हैं तब आपका अवतार ही आपको री प्रेजेंट करता है, चूंकि आप तो गेम में नहीं जा सकते हैं


Avatar एक आयकन भी हो सकता है या कोई 2D या 3D Realistic Character भी हो सकता है अगर अवतार मूवी की बात करें तो वहां भी कुछ कुछ ऐसा ही किया गया है, लेकिन वास्‍तविक दुनिया में आप अपना ऐसा अवतार नहीं बना सकते हैं जो आपकी तरह सोचता हो और या आपको दूसरे ग्रह पर ले जा सकता हो,  खैैर चलिये वास्‍त‍ि‍विक दुनिया की बात करते हैं, यहां Role Playing Video Games में अवतार का इस्‍तेमाल होता है


सबसे पहले कंप्‍यूटर की दुनिया में अवतार शब्‍द का इस्‍तेमाल 1979 में हुआ था, उस समय एक Role Playing Video Game आया था जिसका नाम था Avatar, इसे University of Illinois PLATO system ने बनाया था


अवतार आपके Gaming Experience को कई गुना बढा देते हैं, अगर आपको याद हो 8bit Games के समय में भी Avatar हुआ करते थे, अगर आपने Strike Games खेले हों तो उनमें आपके प्‍लेयर का Avatar दिया गया होता है, अगर आप गेम में आपके अवतार के घायल होने का मतलब है कि आप हार रहे हैं,


आज तक बहुत से लोग अपनी फेसबुक या अन्‍य सोशल नेटवर्किंग साइट के लिये अपने फोटो के बजाय अपने Avatar का इस्‍तेमाल करते हैं, इसके अलावा Artificial intelligence के लिये भी Avatar का इस्‍तेमाल किया जाता है


ऐसी कई वेबसाइट हैं जहां आप अपना Avatar बना सकते हैं -



  • doppelme.com

  • avatarmaker.com

  • Pickaface.net

  • avatarmaker.net


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क्‍या होता है एनॉनमस ईमेल - What is Anonymous Email

अक्सर कभी कभी हमें कुछ जगह पर अपनी पहचान छिपा कर जानकारी देने की जरूरत होती है, एनॉनमस ईमेल (Anonymous-email) की सहायता से आप बिना अपनी ईमेल आईडी के किसी भी व्‍यक्ति को ईमेल कर सकते है, लेकिन इसके लिये आपको एनॉनमस ईमेल (Anonymous-email) के बारे में जानना जरूरी है, आईये जानते हैं Anonymous-email क्या है? और आप एक Anonymous Email किस प्रकार भेज सकते हैं?

क्‍या होता है एनॉनमस ईमेल - What is Anonymous Email


Anonymous email क्या है?


आपको क्या लगता है । Anonymous-email का क्या मतलब हो सक़ता है? आइए जरा इस Group of words को Break करके बारी-बारी से इनका मतलब समझते हैं। Anonymous: गुमनाम, बेनाम और Email: यानि ई-चिठ्ठी

👉 इस तरह की मेल का गलत प्रयोग कभी न करें क्‍योंकि अगर इस तरह की मेल का प्रयोग आपने किसी गलत काम के लिए किया तो मेल भेजने वाले यूजर को आसानी से ट्रैक कर सकता है, इस प्रकार के ईमेल का दुरूपयोग करने पर आपको साइबर क्राइम के तहत सजा 👽 हो भी सकती हैै 👈

Anonymous-email उस Email को कहते हैं जिसका कोई नाम पता नहीं होता है या फिर अगर होता भी है तो बिल्कुल Fake होता है। जब हम Gmail या किसी और Email-service से email भेजते हैं तो Receiver को यह पता होता है कि यह email whatever@example.com के द्वारा send की गई है और उसे यह पता होता है कि यह email इस व्यक्ति ने भेजा है पर Anonymous - email में Receiver को यह पता नहीं होता है कि यह Email किसके द्वारा भेजी गई है। तो आप Anonymous-email का मतलब अच्छे से समझ गए होंगे। अब चलिए यह सीख लेते हैं कि आप एक Anonymous email किस प्रकार भेज सकते हैं।

Anonymous Email कैसे भेजें?


वैसे तो Online ऐसे बहुत से Websites हैं जिनकी मदद से आप Anonymous-email भेज सकते हैं, ऐसी ही एक बेवसाइट है Anonymousemail.me तो एक Anonymous-email भेजने के लिए आप नीचे दिए गए Steps को One-by-One follow करें –



  • अपने Browser को Open करें और Anonymousemail.me को Open करें।

  • आपके सामने एक वेबसाइट Open होगी जो नीचे दिए गए Image की तरह ही दिखेगी


Note: हो सकता है कि इस वेबसाइट के खुलने से पहले Security reasons की वजह से आपको I am not a robot कैप्चा को Solve करना पड़े और उसके बाद आपको इस वेबसाइट पर भेजा जाए।



अब आप इस वेबसाइट के द्वारा माँगे गए Information को निम्‍नानुसार Fill-up करें –


  • Name: यहाँ पर आप वो नाम लिखें जिसे आप Receiver को Display कराना चाहते हैं।

  • From (Email): यहाँ पर आप वो Email-Address लिखें जिसे आप Receiver को Display कराना चाहते हैं। आप चाहें तो कोई भी Fake email-address लिख सकते हैं।

  • To: यहाँ पर आप उस व्यक्ति का असली Email-Address टाईप करें जिसको आप यह Email भेजना चाहते हैं।

  • Reply To: अगर आप एक ऐसी Email भेज रहें हैं जिसका Receiver Reply भी कर सकता है और आप चाहते हैं कि वो Reply आपको मिल जाए तो आप यहाँ पर अपना असली Email-Address टाईप करें। जिस पर आप वो रिप्लाई मैसेज चाहते हैं।

  • Subject: यहाँ पर आप अपने Message का Subject लिखें।

  • अब आप अपना Message दिए गए बड़े Text-Box में Type कर सकते हैं।

  • अगर आप कोई फाइल Attach करना चाहते हैं तो दिए गए Option की मदद से कर सकते हैं पर ध्यान रहे कि फाइल साईज 2 MB से अधिक नहीं होनी चाहिए।

  • अब आप I am not a robot कैप्चा को Solve करें और फिर आखिर में Send-Email नामक लाल Button पर क्लिक करें।

  • Congrats! अब आपका Email Successfully भेज दिया गया है।



यह गेस्‍ट पोस्‍ट हमें ताशिफ इकबाल जी ने भेजी है, अगर आप भी इसी तरह की तकनीकी जानकारी रखते हैं आप चाहते हैं कि आपका लेख माय बिग गाइड पर प्रकाशित हो तो हमें आप हमें guest@mybigguide.com गेस्‍ट पोस्‍ट भेज सकते हैं। अधिक जानकारी के लिये देखें - आप भी बनें गेस्ट ब्लॉगर : करें गेस्‍ट पोस्‍ट

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क्या है मोबाइल रेडिएशन - What is Mobile Radiation

मोबाइल के अधिक प्रयोग प्रयोग से होने वाले नुकसानों में सबसे खतरनाक है मोबाइल रेडिएशन (Mobile Radiation) या मोबाइल विकिरण, मोबाइल रेडिएशन (Mobile Radiation) आपके स्‍वास्‍थ्‍य पर कितना दुष्प्रभाव डाल सकता है आप सोच भी नहीं सकते, तो आईये जानते हैं क्या है मोबाइल रेडिएशन - (What is Mobile Radiation) और इससे आपके शरीर पर क्‍या प्रभाव पडता है

क्या है मोबाइल रेडिएशन - What is Mobile Radiation



क्या है रेडिएशन - What is Radiation


रेडिएशन या विकिरण अंतरिक्ष की एक ऐसी ऊर्जा है जो तरंगों के रूप में चलती है, इन्‍हेंं आप रेडियो तरंगें (radio waves) भी कह सकते हैं ये मानवनिर्मित भी होती हैं और प्राकृतिक भी। सूर्य के प्रकाश में भी विकिरण होता है लेकिन हमारे वायुमंडल के कारण वह हमें हानि नहीं पहुॅचाता है, इसके अलावा टीवी का रिमोट, मोबाइल फोन और एक्स रे से भी रेडियेशन या विकिरण उत्‍पन्‍न होता है और जिस माइक्रोवेव में आप रसोई में खाना पकाते हैं उसमें भी रेडियो वेव्स से ही से खाना पकता है

जब आप एक्स रे करते हैं तो यहीं तरगें आपकी हड्डियों को छोडकर आपके शरीर के आर-पार निकल जाती है, अधिक माञा में या अधिक समय तक रेडिएशन के सम्‍पर्क में रहने से हमारे शरीर की कोशिकाओं पर बुरा प्रभाव पडता है
ऐसा नहीं कि रेडशयन हमेशा खतरनाक ही होता है आजकल कैंसर जैसे रोग को ठीक करने के लिए रेडियेशन थेरेपी का प्रयोग किया जाता है, इसमें हाई वोल्‍टेज किरणों से कैंसर की कोशिकाओं का समाप्‍त किया जाता है 



क्या है मोबाइल रेडिएशन - What is Mobile Radiation



मोबाइल फोन के इस्तेमाल के दौरान शरीर में जाने वाले रेडिएशन की मात्रा को स्पेसिफिक एब्सार्पशन रेट (एसएआर) कहते है,  एसएआर वह स्तर होता है, यह बताता है कि हमारा शरीर कितनी मात्रा में रेडिएशन को ग्रहण कर सकता है।

भारत में वर्तमान में स्पेसिफिक एब्सार्पशन रेट (एसएआर) के लिये मानक तय किया गया है जिसके तहत प्रत्‍येक मोबाइल फोन का स्पेसिफिक एब्जार्प्शन यानी एसआर रेट का स्‍तर 1.6 वॉट प्रति किग्रा से ज्‍यादा नहीं होना चाहिये अगर यह इससे ज्‍यादा है तो यह आपके शरीर के लिए नुकसानदेह है



अपने मोबाइल का रेडियशन स्‍तर यानि स्पेसिफिक एब्सार्पशन रेट (एसएआर) जॉचने के लिये आप *#07# डायल करें, यह एक USSD code कोड है और हां यदि आपके फोन में True Caller है तो उसे uninstall कर लें उसमें USSD code काम नहीं करते हैैं अपने फोन में डायलर से Code डायल करें और अगर आपके फोन का SAR levels 1.6 वॉट प्रति किग्रा (1.6 W/kg) से अधिक है तो तुरंत अपना फोन बदलें


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Thursday, 21 December 2017

क्‍या है सीजीआई और वीएफएक्‍स What is CGI and VFX

अगर आपने मूूवी बाहुबली-द बिगनिंग और बाहुबली द कॉन्क्लूज़न देखी हो तो आपको पूरी मूवी में आश्यर्चजनक सीन हर दो तीन मिनट में दिखाई देेते रहे होगें, इसलिये यह मूवी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भव्य फिल्म कही जा रही है और इसकी भव्‍यता की वजह है इसके विश्‍ााल और भव्‍य सेट जिसमें माहिष्मती का महल, आकाश छूता झरना या कालकेय केे साथ्‍ा युद्ध जिसमें वीएफएक्स और सीजीआई का प्रयोग किया गया गया है, आईये जानते हैं क्‍या होते हैं वीएफएक्स और सीजीआई स्पेशल इफेक्ट्स-

सीजीआई (CGI)


सीजीआई (CGI) का पूरा अर्थ है (कंप्यूटर ग्राफिक्स इमेज) इस तकनीक का प्रयोग आज कल की सभी फिल्‍मों में हो रहा है, वजह सीधी सी है  सीजीआई (CGI) के प्रयोग से किसी भी प्रकार का सेट तैयार कर सकते हैं, जो देखने में बिलकुल असली जैसा होता है, इसे फिल्‍म में इस तरह से प्रयोग किया जाता है कि आप असली नकली में अंतर नहीं कर सकते हैं साथ ही आपका सेट बनाने का हजारों लाखों का खर्चा बच जाता है, अगर आपने अवतार मूवी देखी हो तो पूरी की पूरी मूवी में कंप्यूटर ग्राफिक्स इमेज का प्रयोग किया गया है


सीजीआई (CGI) से क्‍या क्‍या कर सकते हैं


सीजीआई (CGI) से आप बडें बडें विशाल सेट बना सकते हैं, अतंरिक्ष जीव बना सकते हैं, डायनासोर बना सकते हैं, परमाणु विस्‍फोट बना सकते हैं और आपकी कल्‍पना शक्ति पर निर्भर करता है

वीएफएक्स (VFX)


कई बार फिल्मों के दृश्य देखकर हमारी सांसें थम जाती हैं। हम सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि कैसे शूट किया गया होगा, लेकिन यह कमाल है VFX तकनीक का वीएफएक्स (VFX) असल मेें होता है विजुअल इफेक्ट्स (Visual Effects) यह ऐसी तकनीक होती है जहां सीजीआई (CGI) से तैयार दृश्यों को वास्‍तविक दृश्यों से इस प्रकार जोडा जाता है कि दोनों में कोई अंतर दिखाई न दे, इसके इसके लिये ग्रीन या ब्‍लू स्‍क्रीन का प्रयोग किया जाता है, अब तो वीएफएक्स श्रेणी में ऑस्कर भी दिये जाते हैं लाइफ ऑफ पाई’ याद है ना जिसमें एक लडका नाव में एक शेर के साथ रहता है


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7 उपाय मोबाइल फोन रेडिएशन से बचने के - 7 Ways to Prevent Dangerous Cell Phone Radiation

मोबाइल के अधिक प्रयोग प्रयोग से होने वाले नुकसानों में सबसे खतरनाक है मोबाइल रेडिएशन (Mobile Radiation) या मोबाइल विकिरण, मोबाइल रेडिएशन (Mobile Radiation) आपके स्‍वास्‍थ्‍य पर कितना दुष्प्रभाव डाल सकता है आप सोच भी नहीं सकते, तो आईये जानते हैं 7 उपाय मोबाइल रेडिएशन (Mobile Radiation) से बचने के -

7 उपाय मोबाइल फोन रेडिएशन से बचने के - 7  Ways to Prevent Dangerous Cell Phone Radiation




  1. मोबाइल फोन का इस्‍तेमाल केवल जरूरी बातें करने के लिये किया जाये तो बेहतर है ज्‍यादा देर मतलब 10 मिनट से लेकर 30 मिनट या उससे ज्‍यादा बातें आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिये हानिकारक हो सकती हैं

  2. बात करते समय जितना हो सके मोबाइल को अपने शरीर से दूर रखें। हो सके तो स्‍पीकर फोन पर या ब्‍लूटूथ डिवाइस का प्रयोग करें

  3. कॉल करते समय और सुनते समय फोन को सिर से दूर रखें। मोबाइल फोन को किसी भी कीमत पर सिर से नहीं दबाएँ। खासतौर पर बच्चे मोबाइल रेडिएशन(विकिरण) की चपेट में ज्यादा आते हैं और सेल फोन की रेडिएशन से बच्चों में ल्यूकेमिया जैसी गंभीर बीमारियाँ भी होती हैं। बच्‍चों को तो फोन से दूर ही रखें

  4. कार में भी ब्लूटूथ पर बात करने के लिये अलग से स्‍पीकर आने लगे हैं जो आपको सुरक्षा के साथ सहूलियत भी देेेता है

  5. जितना हो सके लोगों से एसएमएस या सोशल मीडीया नेटवर्क जैसे व्‍हाट्सएप या फेसबुक जैसे मैसेंजर से चैट कर बात करें और अगर अच्‍छे वाईफाई जोन में हैं तो आप इंटरनेट कॉलिग का भी लाभ ले सकते हैं

  6. मोबाइल फोन को अपनी छाती यानि दिल के पास न रखें और पैंट की जेब में रखें। मोबाइल का रेडिएशन आपके हार्ट और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।

  7. जब आप नहाकर निकलें और आपके बाल गीले हों तब भी फोन पर बात न करें क्यों कि पानी और धातु दोनों रेडियो तरंगों के बेहतरीन सुचालक हैं।


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क्‍या है वानाक्राई रैंसमवेयर वायरस - What is Wanna Cry 'ransomware' Virus

12 मई 2017 को दुनियाभर में कप्‍यूटरों पर एक वायरस का हमला हुआ है, जिससे भारत भी अछूता नहीं है इस वायरस का नाम है "वानाक्राई" यह एक रैंसमवेयर वायरस है, तो आईये जानते हैं क्‍या है 'वानाक्राई' रैंसमवेयर वायरस - What is Wanna Cry Ransomware Virus -

क्‍या है वानाक्राई रैंसमवेयर वायरस - What is Wanna Cry Ransomware Virus


सबसे पहले जानते हैं रैंसमवेयर "Ransomware" क्‍या होता है, इसका अर्थ है फिरौती मॉगने वाले कंप्‍यूटर प्रोग्राम, जिनके प्रभाव से आपके कंप्‍यूटर काम करना बंद कर देता है और कंप्‍यूटर को मुक्‍त करने के बदले फिरौती की रकम मॉगी जाती है और असल जिंदगी की तरह ही इसकी कोई गारंटी नहीं है कि फिरौती की रकम मिलने के बाद भी आपका कंप्‍यूटर वायरस से मुक्‍त हो जायेगा


इसी प्रकार का एक रैंसमवेयर "Ransomware" वायरस वानाक्राई (Wanna Cry) का विश्‍व भर के लगभग 100 देशों में के कंप्यूटरों पर Attack हुआ है इसे Ransomware Virus Attack कहा जा रहा है इस वायरस का अटैक जिन कंप्‍यूटरों पर हुआ है उन कंप्यूटर ने काम करना बंद कर दिया है, यह दुनिया सबसे बड़ा साइबर हमला बताया जा रहा है


जब Ransomware Virus Attack आपके Computer पर होता है तो आपकेे Computer की सभी फाइलें लॉक हो जाती है अगर तकनीकी भाषा में कहें तो encrypt हो जाती है इनक्रिप्ट का अर्थ है यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें data या information को secret codes में convert कर दिया है और उसे जब तक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है जबकि उसे de encrypt न किया जाये


चलिये समझते हैं आपके कंप्‍यूटर में पुराने गानों का कलेक्‍शन, आपकी शादी का वीडीयो आपके गेम्‍स आपके एमएस वर्ड में बनाई गयी जरूरी फाइलें, पावर पाइंट में बनाये गये जरूरी स्‍लाइड शो और पीडीएफ ईबुक सभी एक ऐसी फाइल में बदल जायेगें जिन्‍हें किसी भी software में खोला नहीं जा सकता है, जब तक कि इस Ransomware Virus को रिमूव न कर दिया जाये


इस वायरस के मामले में भी ऐसा ही है जो कंप्यूटर्स हैक हुए हैं उन्हें खोलने पर एक मैसेज दिखाई दे रहा है जिसमें कहा गया है कि यदि फाइल वापस पाना चाहते हो तो पैसे चुकाने होंगे, यानि फाइलों को encrypt किया गया है और de encrypt करने के लिये पैसे की मॉग की जा रही है यानि फिरौती मॉगी जा रही है

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Major Technological Inventions And Inventors - प्रमुख तकनीकी आविष्कार और आविष्कारक

आप तो जानते है कि "आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है" लेकिन इन आविष्कार को करने के लिये आविष्कारक भी होने चाहिये, अगर ये आविष्कारक (...