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Saturday, 23 December 2017

What is Wi-Fi - वाई-फाई क्या है

वाई-फाई ( Wi-Fi) आधुनिक युग का डाटा और इंटरनेट शेयर करने का सबसे आसान और तेज तरीका है, लेकिन ये वाई-फाई ( Wi-Fi ) आखिर है क्‍या और किस तकनीक पर आधारित है आईये जानने की कोशिश करते हैं - वाई-फाई क्या है (Kya Hai Wi-Fi) -

वाई-फाई क्या है - What is Wi-Fi



वाई-फाई ( Wi-Fi) की पूरा नाम (full form) वायरलेस फिडेलिटी (Wireless fidelity) है, वाई-फाई ( Wi-Fi) आविष्‍कार John O'Sullivan और John Deane ने सन् 1991 में किया था। असल में यह एक वायरलैस नेटवर्किंग सुविधा है, जिसे आप (WLAN) यानि Wireless Local Area Network के नाम से जानते हैं, जिसकी सहायता से आप बडी आसानी से मोबाइल, लैपटॉप, कंम्‍प्‍यूटर और प्रिंटर जैसी डिवाइसों को इंटरनेट और नेटवर्क से जोड सकते हैं।

वाई-फाई के नाम से जुडा तथ्‍य - Facts About Wi-Fi Technology



कहते हैं वायरलेस फिडेलिटी (Wireless fidelity) का असल में कोई मतलब नहीं है, असल में वाई-फाई एलायंस (Wi-Fi Alliance) कंपनी इस वाई-फाई ( Wi-Fi) डिवाइस को बनाती है उन्‍होनें हाई-फाई ( Hi-fi ) यानि हाई फिडेलिटी की तर्ज पर इसे वाई-फाई नाम दिया है, जिसका कोई अर्थ नहीं है। यह केवल वाई-फाई एलायंस पंजीकृत ट्रेडमार्क शब्द है। लेकिन फिर भी इसे वायरलेस फिडेलिटी (Wireless fidelity) केे नाम सेे जाना जाता है।

वाई-फाई कैसे काम करता है - How Does Wi-Fi Technology Work



वाई-फाई ( Wi-Fi) डिवाइस बिना किसी तार के दो डिवाइसों के बीच में कनेक्‍शन बनाता है, जिसके लिये यह रेडियो फ्रीक्वेंसी (Radio Frequency) का इस्‍तेमाल करता है, यह टेक्नोलॉजी IEEE 802.11 कई स्टैण्डर्ड पर बेस्ड है जिसकी आवृत्ति 2.4GHz से 5GHz के बीच होती है, वायरलेस नेटवर्क किसी भी डिवाइस को कनेक्‍ट करने के लिये एक Access Point (AP) की आवश्‍कयता होती है और जिस ऐरिया में वाई-फाई ( Wi-Fi) होता है उसे हॉट-स्पॉट (Hotspot) कहते है।



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Friday, 22 December 2017

क्या है रेफरल लिंक/कोड - What is a Referral Link/Code

अक्‍सर आपको इंंटरनेट का इस्‍तेमाल करते समय रेफरल लिंक (Referral Link) या रेफरल कोड (Referral Code) जैसे शब्‍द दिखाई देते होगें, या तो यह लिंक आपको किसी वेबसाइट पर या व्‍हाट्सएप और फेसबुक ग्रुप में आपके दोस्‍तों द्वारा शेयर किये जाते हैं तो आखिर क्‍या होता है रेफरल लिंक (Referral Link) या रेफरल कोड (Referral Code) का मतलब और इनसे क्‍या फायदा होता है आईये जानते हैं क्या होता है रेफरल लिंक/कोड - What is a Referral Link/Code -


क्या होता है रेफरल लिंक/कोड - What is a Referral Link/Code




रेफरल लिंक (Referral Link) या रेफरल कोड (Referral Code) का सीधा संबंध एफिलिएट मार्केटिंग (Affiliate marketing) से असल में कुछ बेवसाइट या एप्‍लीकेशन अपने प्रोडक्‍ट या एप्‍लीकेशन को प्रमोट करने के इंटरनेट और मोबाइल यूूजर्स का सहारा लेती हैैंं, जिसके बदले वह प्रमोट करने व्‍यक्ति को कमीशन भी देती है, जब कंपनी अपने किसी प्रोडक्‍ट को अापसे प्रमोशन कराती है तो वह आपको एक यूनिक लिंक देती हैै, असल में यह लिंक एक ट्रेकिंग लिंक (Tracking Links) होता हैै, जिससे पता चलता हैै कि आपके द्वारा किये गये प्रमोशन से कंपनी की वेबसाइट को कितने क्लिक मिलेे या अगर एप्‍लीकेशन है तो किनते बार वह एप्‍लीकेशन आपके द्वारा दिये गये लिंक से डाउनलोड हुई, इन्‍हींं लिंक्‍स को रेफरल लिंक (Referral Link) कहते हैं, इसके अलावा कुछ एप्‍लीकेशन में रेफरल कोड (Referral Code) का आप्‍शन होता है, यह कोड भी यूनिक और ट्रेकिंग कोड होता है अौर बिलकुल ट्रेकिंग लिंक (Tracking Links) की तरह ही काम करता है।

रेफरल लिंक का फायदा - Benefits Of the Referral Link


कई सारी कंपनिया रेफर और अर्न प्रोग्राम चलाती है, जिसके लिये आपको उनकी बेवसाइट या एप्‍लीकेशन पर रजिस्‍टर करना होता है वहां सेे आपको एक रेफरल लिंक (Referral Link) या रेफरल कोड (Referral Code) दिया जाता हैै, इस लिंक को आप कहीं भी शेयर कर सकते हैं, अगर आपके रेफरल लिंक (Referral Link) पर क्लिक कर या रेफरल कोड (Referral Code) का इस्‍तेमाल कर कंपनी को कोई फायदा होता है तो वह उसमें आपको भी तय कमीशन देती है, इस तरह सेे आपकी घर बैठे कमाई हो जाती है, बहुत से इंटरनेट यूजर्स इन्‍हीं से पैसा कमा रहे हैं, यह ऑनलाइन पैसे कमाने के कुछ आसान तरीकों में से एक है।


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Thursday, 21 December 2017

क्‍या है वानाक्राई रैंसमवेयर वायरस - What is Wanna Cry 'ransomware' Virus

12 मई 2017 को दुनियाभर में कप्‍यूटरों पर एक वायरस का हमला हुआ है, जिससे भारत भी अछूता नहीं है इस वायरस का नाम है "वानाक्राई" यह एक रैंसमवेयर वायरस है, तो आईये जानते हैं क्‍या है 'वानाक्राई' रैंसमवेयर वायरस - What is Wanna Cry Ransomware Virus -

क्‍या है वानाक्राई रैंसमवेयर वायरस - What is Wanna Cry Ransomware Virus


सबसे पहले जानते हैं रैंसमवेयर "Ransomware" क्‍या होता है, इसका अर्थ है फिरौती मॉगने वाले कंप्‍यूटर प्रोग्राम, जिनके प्रभाव से आपके कंप्‍यूटर काम करना बंद कर देता है और कंप्‍यूटर को मुक्‍त करने के बदले फिरौती की रकम मॉगी जाती है और असल जिंदगी की तरह ही इसकी कोई गारंटी नहीं है कि फिरौती की रकम मिलने के बाद भी आपका कंप्‍यूटर वायरस से मुक्‍त हो जायेगा


इसी प्रकार का एक रैंसमवेयर "Ransomware" वायरस वानाक्राई (Wanna Cry) का विश्‍व भर के लगभग 100 देशों में के कंप्यूटरों पर Attack हुआ है इसे Ransomware Virus Attack कहा जा रहा है इस वायरस का अटैक जिन कंप्‍यूटरों पर हुआ है उन कंप्यूटर ने काम करना बंद कर दिया है, यह दुनिया सबसे बड़ा साइबर हमला बताया जा रहा है


जब Ransomware Virus Attack आपके Computer पर होता है तो आपकेे Computer की सभी फाइलें लॉक हो जाती है अगर तकनीकी भाषा में कहें तो encrypt हो जाती है इनक्रिप्ट का अर्थ है यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें data या information को secret codes में convert कर दिया है और उसे जब तक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है जबकि उसे de encrypt न किया जाये


चलिये समझते हैं आपके कंप्‍यूटर में पुराने गानों का कलेक्‍शन, आपकी शादी का वीडीयो आपके गेम्‍स आपके एमएस वर्ड में बनाई गयी जरूरी फाइलें, पावर पाइंट में बनाये गये जरूरी स्‍लाइड शो और पीडीएफ ईबुक सभी एक ऐसी फाइल में बदल जायेगें जिन्‍हें किसी भी software में खोला नहीं जा सकता है, जब तक कि इस Ransomware Virus को रिमूव न कर दिया जाये


इस वायरस के मामले में भी ऐसा ही है जो कंप्यूटर्स हैक हुए हैं उन्हें खोलने पर एक मैसेज दिखाई दे रहा है जिसमें कहा गया है कि यदि फाइल वापस पाना चाहते हो तो पैसे चुकाने होंगे, यानि फाइलों को encrypt किया गया है और de encrypt करने के लिये पैसे की मॉग की जा रही है यानि फिरौती मॉगी जा रही है

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Wednesday, 20 December 2017

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट क्या है - What Is Central Processing unit in hindi

सीपीयू यानि सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) इनपुट डाटा को प्रोसेस करता है इसके लिये सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट और अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट दोनों मिलकर अंकगणितीय गणना (Arithmetic Calculation) और तार्किक गणना करते हैैं और डाटा को प्रोसेस करते हैं CPU को कंप्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता है आईये जानते हैं सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) क्‍या है -


सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट क्या है - What Is Central Processing Unit in Hindi


कंप्‍यूटर की संरचना (Computer Architecture) में सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit)  केेन्‍द्र में रहता है इनपुट यूनिट (Input unit) द्वारा डाटा और निर्देशों को कंप्‍यूटर में एंटर किया जाता है और इसके बाद सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) डाटा को प्रोसेस करता है और आपको आउटपुट देता है, डाटा को प्रोसेेस करनेे में यह अपने दो भागोंं की मदद लेता है अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) और कंट्रोल यूनिट (Control Unit)

अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit )


अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) अंकगणितीय गणना (Arithmetic Calculation) और तार्किक गणना (Logical calculation) का काम करता है, जैसे जोड़, घटाव, गुणा, भाग और <, >, =, हाँ या ना

कंट्रोल यूनिट (Control Unit)


कंट्रोल यूनिट (Control Unit) कंप्‍यूटर में हो रहे सारे कार्यो नियंत्रित करता है और इनपुट, आउटपुट डिवाइसेज, और अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) के सारे गतिविधियों के बीच तालमेल बैठाता है।


प्रोसेसर में कोर क्‍या है - What Is Core In Processor


कोर (Core) सीपीयू यानि प्रोसेसर के अंदर लगी एक गणना (computation) करने वाली यूनिट या चिप होती है, एक कोर वाले को Single Core Processor कहते हैं प्रोसेसर की शक्ति गीगाहर्टज (GHz) पर निर्भर करती है, यानि जो प्रोससेर जितने ज्‍यादा गीगाहर्टज (GHz) का होगा उतनी ही तेजी से गणना करेगा। अब फिर सेे बात करते हैंं कोर की डुअल-कोर, क्वाड-कोर, ऑक्टा-कोर क्‍या हैं ?



Single Core Processor ज्‍यादा बोझ पडते ही हैंग होने लगता था, इसलिये इसकी क्षमता बढाने के लिये प्रोसेसर में अतिरिक्‍त कोर (Core) लगाये जाते हैं, इनकी संख्‍या के आधार पर ही प्रोसेसर के नाम पडें आईये जानते हैं -


  1. दो कोर मतलब -  Dual Core Processor

  2. चार कोर मतलब - Quad Core Processor

  3. छह कोर मतलब - Hexa Core Processor

  4. आठ कोर मतलब - Octo Core Processor

  5. दस कोर मतलब - Deca Core Processor


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नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है - What is Network Topology in Hindi

टोपोलॉजी (Topology)- नेटवर्क (Network) कंप्यूटर, सर्वर, मेनफ्रेम, नेटवर्क डिवाइस या अन्‍‍‍य ऐसी डिवाइस जो एक दूसरे से डाटा शेयर करती है उनका आपस का कनेक्‍शन चाहे वह वायरलैस हो या केबल द्वारा नेटवर्क (Network) कहलाता है और यह नेटवर्क (Network) किस तरह का है यानि इसकी आकृति, ले-आउट या संरचना किस प्रकार की है इसे टोपोलॉजी (Topology) और ये दोनोंं शब्‍‍‍द मिलकर ही बनते हैं नेटवर्क टोपोलॉजी (Network topology) तो आईये जानते हैैं नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है - What is Network Topology in Hindi

नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है - What is Network Topology in Hindi




नेटवर्क टोपोलॉजी (Network topology) 4 प्रकार की होती है:-



  • रिंग नेटवर्क टोपोलॉजी (Ring Network Topology)

  • बस नेटवर्क टोपोलॉजी (Bus Network Topology)

  • स्टार नेटवर्क टोपोलॉजी (Star Network Topology)

  • मेश नेटवर्क टोपोलॉजी (Mesh Network Topology)


रिंग नेटवर्क टोपोलॉजी (Ring Network Topology)



  

रिंग नेटवर्क टोपोलॉजी (Ring Network Topology) में सभी कंप्‍यूटर एक गोलाकार आकृति में अपने अधीनस्थ (Subordinate) कम्प्यूटर से जुड़े होते हैंं, इसमें कोई होस्ट (Host) या कंट्रोलिंग कम्प्यूटर (Controlling Computer) नही होता है, इसमें कोई भी कंप्‍यूटर किसी दूसरे कंप्‍यूटर पर निर्भर नहीं होता है, रिंग नेटवर्क (Ring Network) में साधारण गति से डाटा का आदान-प्रदान होता है

बस नेटवर्क टोपोलॉजी (Bus Network Topology)




बस नेटवर्क टोपोलॉजी (Bus Network Topology) मेंं एक ही केेेबल सेे सभी कंम्‍यूटरों को एक ही क्रम में जोडा जाता है, जोडने के लिये टर्मिनेटर (Terminator) का इस्‍तेमाल किया जाता है, इस नेटवर्क को इंस्‍टॉल करना सरल होता है, लेकिन किसी एक कंप्‍यूटर में खराबी होने पर पूरा नेटवर्क काम करना बंद कर देता है

स्टार नेटवर्क टोपोलॉजी (Star Network Topology)





स्टार नेटवर्क टोपोलॉजी (Star Network Topology) मेंं एक हब से ही सारे कंप्‍यूूटरों को जोडा जाता है, इस नेटवर्क में एक होस्ट कम्प्यूटर होता है, जिससेे बाकी सभी कंप्‍यूटरों कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन अगर हब में कोई खराबी आती है तो सारा नेटवर्क बेकार हो जाता है, लेकिन अगर कोई लोकल कम्प्यूटर ख़राब होता है तो शेष नेटवर्क इससे प्रभावित नही होता है

मेश नेटवर्क टोपोलॉजी (Mesh Network Topology)





मेश नेटवर्क टोपोलॉजी (Mesh Network Topology) में सारे कंप्यूटर कही न कही एक दूसरे से जुड़े रहते हैं और एक दूसरे से जुड़े होने के कारण ये अपनी सूचनाओ का आदान प्रदान आसानी से कर सकते हैं, इसमें कोई होस्ट कंप्यूटर नहीं होता है, अगर किसी भी कंप्यूटर मेश कोई खराबी आती है तो भी यह नेटवर्क काम करता रहता है टोपोलॉजी को मेश नेटवर्क (Mesh Network) या मेश भी कहा जाता है
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Saturday, 4 March 2017

Chapter-3 | मैमोरी और प्रोसेसर | From The Computer World

मैमोरी और प्रोसेसर


संचित युक्तिः-
यह कम्प्यूटर के स्थाई तौर तर बहुत अधिक मात्रा में आंकडों को संचित करने की अनुमति प्रदान करता है। उदाहरण डिस्क ड्राइव टेप ड्राइव।

सेकेंडरी मेमोरीः- यह एक स्थाई संग्रहण युक्ति है। इसमें संग्रहित डेटा तथा प्राग्राम्स कम्प्यूटर के आॅफ होने के बाद भी इसमें स्थित रहते हैं।


गौण स्मृतिः 40 जी0बी0 हार्ड डिस्क ड्राइव, कम्प्यूटर में द्वितीयक भंडारण स्मृति।
गौण स्मृति या आॅक्जिलरी स्टोरेज यूनिट इसे द्वितीयक भंडार इकाई या सेकेण्डरी यूनिट भी कहते हैं। हार्ड डिस्स जिसका कि मुख्य काम है जानकारी को हमेशा के लिए सुरक्षित रखना और वो जानकारी तभी हटाई जा सकेगी यदि उसे स्वयं हटाना चाहते हैं। इस मेमोरी की खास बात ये है कि बिजली चले जाने के बावजूद जानकारी को सुरक्षित रखती है जैसे कि जब आप कम्प्यूटर बंद कर देते है तो आपके आंकडे इसी डिसक में सुरक्षित रहते हैं। इस मेमोरी को तकनीकी भाषा में स्थायी मेमोरी या नाॅन-वोलाटाईल मेमोरी भी कहते है। ये विभिन्न प्रकार की क्षमताओं में उपलब्ध है जैसे 10, 20, 40, 80, 256, 500, जी0बी0 या उससे भी ज्यादा।

मैग्नेटिक टेपः- डाटा को स्थाई तौर पर संग्रहित कर सकने वाले उपकरणों में मैग्नेटिक टेप का नाम प्रमुखता से आता है। इसमें 1/2 इंच चैडाई वाली प्लास्टिक की बिना जोड वाली लम्बी पट्टी होती है। जिस पर फैरोमेग्नेटिक पदार्थ की पर्त चढाई जाती है। इस पट्टी को हम टेप कहते हैं। टेप विभिन्न लम्बाईयों में उपलब्ध होते हैं, 400, 800, 1200, या 2400 फीट लम्बाई वाले मैग्नेटिक टेप उपलब्ध होते है। टेप पर डाटा मेग्नेटाइज्ड या नाॅ मैग्नेटाइज्ड बिन्दुओं के रूप में लिखा जाता है। एक अक्षर के लिए सात बिट या नौ बिट कोड प्रयोग में लाया जाता है। मैग्नेटाइज्ड एवं नाॅन मैग्नेटाइज्ड बिन्दुओं की कतारें टेप की लम्बाई के समानान्तर बन जाती है। इन्हें हम ज्तंबो कहते हैं।

मैग्नेटिक डिस्कः- मैग्नेटिक डिस्क की तुलना रिकार्ड प्लेयर के लाॅग प्लेविंग एल0पी0 रिकार्ड से कर सकते है। ऐसे कई रिकार्डस या डिस्क को एक के उपर एक कुछ अन्तर से लगा दिया जाये तो वे मैग्नेटिक डिस्क के समान दिखेगा। सभी डिस्क एक के उपर एक समान्तर लगी होती है। सभी डिस्कों के बने इस माध्यम को डिस्क पैक कहते है। डिस्क पैक में 11 अथवा 20 ऐसी सतहें होती हैं प्रायः सबसे उपरी तथा सबसे निचली सतह पर डाटा नहीं लिखा जाता है। इस ड्राइव में रीड व राइट हेड लगे होते हैं। जो डाटा को लिखने और पढने का काम करते हैं। ये डाटा को ज्तंबो के रूप में डिस्क पैक पर लिखते हैं।

फ्लाॅपी डिस्कः- यह एस छोटी लचीली डिस्क होती है जिसकी डाटा संग्रह करने की क्षमता बहुत अधिक नहीं होती। कीमत की लिहाज से यह बहुत सस्ती होती है। एक लचीली प्लास्टिक शीट के उपर मैग्नेटिक आॅक्साइड कोटिंग करके इसे तैयार किया जाता है। इसके एक रीड/राइट हैड होता है जो फ्लापी की सतह से स्पर्श करके डाटा लिखता व पढता हैं। ये 1.44 और 2.44 एम0बी0 की क्षमता में उपलब्ध होती है, फ्लापी डिस्क की तरह ही एक जिप डिस्क होती है। जिसकी क्षमता 100 एम0बी0 से 250 एम0बी0 और 750 एम0बी0 होती है।

पेन ड्राइवः- ये एक एक्सटर्नल होता है जिसे हम सीधे यू0एस0बी0 पोर्ट पर लगा सकते है, ये इस्तेमाल करने में बहुत आसान होता है और आसानी से उपलब्ध भी है, इसकी डाटा संग्रह करने की क्षमता भी ज्यादा होती है, ये सामान्यतः 1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, जी0बी0 या उससे भी अधिक क्षमता में उपलब्ध है, यही कारण है कि आजकल इसका अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहा है।

आॅप्टिकल डिस्कः- आॅप्टिकल डिस्क एक इलेंक्ट्राॅनिक डाटा भंण्डारण मध्यम जिसमें से डेटा पढ सकते हैं और एक कम शक्ति लेजर बीम का उपयोग करके लिखा है, यह फ्लैट, पिरपत्र, प्लास्टिक या कांच डिस्क पर डेटा जो प्रकाश और अंधेरे गड्ढों के रूप् में संग्रहीत किया जाता हैं, लेजर बीम गड्ढे पढता हैं और डेटा तक पहॅुचा जा सकता है।
एक आॅप्टिकल डिस्क चुबंकीय भंण्डारण मीडिया पर कई लाभ प्रदान करता है।

फ्लैश मैमोरीः- आजकल हर व्यक्ति पेनड्राइव का उपयोग करता मिल जाएगा यह फ्लैश मैमोरी का ही एक उदाहरण है। फ्लैश मैमोरी नाॅन-वोलेटाइल कम्प्यूटर स्टोरेज होती है, जिसमें डाटा परमानेंटली स्टोर रहता है। मैमोरी कार्ड, यू0एस0बी0, डिजिटल कैमरा आदि में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

मैमोरी स्टिकः- मैमोरी स्टिक एक खास फ्लैश मैमोरी कार्ड है, जिसका उपयोग डाटा स्टोरेज के रूप में किया जाता है। अब इसका छोटा वर्जन भी उपलब्ध है, जिसकी क्षमता काफी अधिक होती है। इसके अलावा सीडी रोम, डीवीडी रोम, आॅप्टिकल मैमोरी, मैग्नेटिक टेप आदि भी कम्प्यूटर स्टोरेज के उदाहरण है। जिनका उपयाग आप डाटा स्टोर करने के लिए करते है।

सीडी/डीवीडी ड्राईवः- ये भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले स्टोरेज डिवाइस है सस्ती होती है इसकी संग्रहण क्षमता काफी अधिक होती है। आम तौर पर एक सीडी की संग्रहण क्षमता 700-800 एम0बी0 और एक डीवीडी की अधिकतम क्षमता 17 जीबी होती है।

हार्ड डिस्क ड्राइवः- ये किसी भी कम्प्यूटर की सबसे मुख्य स्टोरेज डिवाइस होती है। इसकी संग्रहण क्षमता काफी अधिक होती है इसलिए ये कम्प्यूटर के मुख्य संग्रहण के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। आजकल हार्ड डिस्क ड्राइव 40, 80, 160, 320, 500 जी0बी0 या उससे अधिक क्षमता में उपलब्ध है।

सी0पी0यू0 प्रोसेस और मैमोरीः-


सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट या सी0पी0यू0ः- सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट कम्प्यूटर के सभी आॅपरेशनों का समन्वय एवं संगठन करके प्रणाली को नियंत्रित करती हैं। यह की-बोर्ड जैसे विभिन्न इनपुट उपकराणों द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन करती है और प्रिंटर जैसे विभिन्न पैरीफेरल उपकरणों के लिए आउटपुट का इंतजाम करती है। यह प्राइमरी स्टोरेज में स्टोर निर्देशों को लाने के लिए उत्तरदायी होती है, उनकी व्याख्या करती है और उन सभी हार्डवेयर यूनिटों को निर्देश जारी करती है जो उन निर्देशों पर कार्य करने के लिए उत्तरदायी होता है।

ए0एल0यू0ः- यह उपकरण कम्प्यूटर की सभी गणितीय और तार्किक आॅपरेशनों को करने के लिए जिम्मेदार होता है। गणितीय आॅपरेशनों का प्रयोग संख्याओं की तुलना और ‘‘लैस दैन‘‘, ‘‘इक्वल टू‘‘ और ‘‘ग्रेटर दैन‘‘ इत्यादि निरूपित करने में किया जाता है। ए0एल0यू0 टेक्स्ट व संख्याओं दोनांे को ही संभाल सकता है। कभी-कभी कम्प्यूटर में गणितीय को-प्रोसेसर लगा होता है जो दूसरा माइक्रोप्रोसेसर होता है गणितीय कार्य के लिए ही होता है। को-प्रोसेसर का मुख्य लाभ गणना की बढी हुई गति होती है।
कम्प्यूटर स्मृति या मैमोरी का कार्य किसी भी निर्देशों, सूचना अथवा परिणामों को संचित करके रखना होता है। कम्प्यूटर के सी0पी0यू0 में होने वाली समस्त क्रियायें सर्वप्रथम स्मृति में जाती है। यह एक प्रकार के कम्प्यूटर का संग्रहशाला है। मैमोरी कम्प्यूटर का अत्यधिक महत्वपूर्ण भाग है। जहां डाटा, सूचना और प्रोग्राम प्रक्रिया के दौरान स्थित रहते है और आवश्यकता पडने पर तत्काल उपलब्ध होते है।

प्राइमरी मैमोरीः-


1. रैमः- त्ंदकवउ ।बबमेे डमउवतल ;त्।डद्ध कम्प्यूटर की यह सबसे महत्वपूर्ण मैमोरी होती है। इस मैमोरी में प्रयोगकर्ता अपने प्रोग्राम केा कुछ देर के लिए स्टोर कर सकते हैं। साधारण भाषा में इस मैमोरी को त्।ड कहते है। यही कम्प्यूटर की बेसिक मैमोरी भी कहलाती है। यह निम्नलिखित दो प्रकार की होती है-
डायनेमिक रैम ;क्त्।डद्ध:- डायनेमिक का अर्थ है गतिशील इस रैम पर यदि 10 आंकडे संचित कर दिए जाएं और फिर उनमंे बीच के दो आंकडे मिटा दिए जाएं, तो उसके बाद वाले बचे सभी आंकडे बीच के रिक्त स्थान में स्वतः चले जाते है और बीच के रिक्त स्थान का उपयोग हो जाता है।
स्टैटिक रैम :- स्टैटिक रैम में संचित किए गये आंकडे स्थित रहते है। इस रैम में बीच के दो आंकडे मिटा दिए जाएं तो इस खाली स्थान पर आगे वाले आंकडे खिसक कर नहीं आएंगे। फलस्वरूप यह स्थान तब तक प्रयोग नहीं किया जा सकता जब तक कि पूरी मैमोरी ‘‘वाश‘‘ करके न किया जाए।
2. रोम :- इसमें संचित सूचना को केवल पढा जा सकता है उसे परिवर्तित नहीं किया जा सकता कम्प्यूटर के बंद होने पर भी राम में सूचनाएं संग्रहित रहती हैं नष्ट नहीं होती।
रीड ओनली मैमोरी:- आधुनिक कम्प्यूटर की महत्वपूर्ण मैमोरी रोम उसे कहते है, जिसमें लिखें प्रोग्राम के आउटपुट को केवल पढा जा सकता है। बेसिक आउटपुट सिस्टम ;ठप्व्ैद्ध नाम का एक प्रोग्राम रोम का उदाहरण है, जो कम्प्यूटर के आॅन होने पर उसकी सभी इनपुट डिवाइसेस की जांच करने एवं नियंत्रित करने का काम करता है।
इरेजिबल प्राॅम :- इस प्ण्ब्ण् में संचित किया गया प्रोग्राम पराबैंगनी किरणों के माध्यम से मिटाया ही जा सकता है। फलस्वरूप यह प्ण्ब्ण् दाबारा प्रयोग की जा सकती है।
इलैक्ट्रिकल ई-प्राॅम:- इलैक्ट्रिकल इरेजिबल प्राॅम पर स्टोर किये गये प्रोग्राम को मिटाने अथवा संशोधित करने के लिए किसी अन्य उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। कमाण्ड्स दिये जाने पर कम्प्यूटर में उपलब्ध इलैक्ट्रिक सिंग्नल्स ही इस प्रोग्राम को संशोधित कर देते हैं।

मदर बोर्डः-


यह कम्प्यूटर का सबसे मेन पार्ट होता है। इसके बिना हम कम्प्यूटर की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। वैसे तो कम्प्यूटर में कैबिनेट के अन्दर हर पार्ट अपने आप में जरूरी होता हैं। परन्तु मदर बोर्ड का स्थान सबसे उपर है क्योंकि इसके बिना हम कम्प्यूटर की कल्पना तक नहीं कर सकते हैं। यह कम्प्यूटर का मेन सर्किट बोर्ड होता हैं। यह प्रोसेसिंग डिवाइस का एक हिस्सा है।

Sunday, 26 February 2017

Chapter - 2 | हार्डवेयर

हार्डवेयर




साधारण रूप से कम्प्यूटर के वे सभी प्रभाग जिन्हें देखा तथा छुआ जा सकता है, कम्प्यूटर हार्डवेयर कहलाते हैं। इनमें मुख्य रूप से कम्प्यूटर यांत्रिक, विधुत तथा इलैक्ट्रोनिक प्रभाग आते हैं। कम्प्यूटर के अन्दर तथा बाहर के सभी प्रभाग, कम्प्यूटर की इनपुट तथा आउटपुट डिवाइस आदि सभी कम्प्यूटर हार्डवेयर ही हैं। कम्प्यूटर की वे डिवाइस जो कि कम्प्यूटर को चलाए जाने के लिए आवश्यक होती है, स्टैण्डर्ड डिवाइस कहलाती है। जैसे- की-बोर्ड, फ्लापी डिवाइस, हार्डडिस्क आदि। इन डिवाइसेस के अतिरिक्त वे डिवाइस, जिनको कम्प्यूटर से जोडा जाता है, पेरीफेरल डिवाइसेस कहलाती है। स्टैण्डर्ड तथा प्ररीफेरल डिवाइसेस को मिलाकर ही कम्प्यूटर हार्डवेयर तैयार होता है।
इनपुट और आउटपुट उपकरण कम्प्यूटर और मानव के मध्य सम्पर्क की सुविधा करते हैं। इनपुट डिवाइसेज मानवीय भाषा में दिये डाटा और प्रोग्रामों को कम्प्यूटर के समझने योग्य रूप में परिवर्तित करतती है और आउटपुट डिवाइसेज स्क्रीन पर या प्रिंटर द्वारा कागज पर छापकर प्रस्तुत करते हैं। इनपुट या आउटपुट डिवाइस प्रायः कम्प्यूटर के सीधे नियंत्रण में रहते हैं।

आपरेटर इंटरफेसः- कम्प्यूटर से आॅपरेटर का सम्पर्क इंटरफेस कहलाता है। ये उचित इनपुट हार्डवेयर और डिस्प्ले साॅफ्टवेयर उपलब्ध हो तो आॅपरेटर जो कि डिस्प्ले डिवाइस के सम्पर्क में है अपने कार्य को प्राावशाली रूप् से कर सकता है। हार्डवेयर इंटरफेस आॅपरेटर कम्प्यूटर के माॅनिटर और इनपुट डिवाइस का एक साथ उपयोग करता है। इनपुट डिवाइस के रूप् में प्रायः की-बोर्ड या माउस का प्रयोग किये जाते हैं। जब भी की-बोर्ड से किसी अक्षर या कैरेक्टर की कुंजी दबाई जाती है तो यह करेक्टर डिस्प्ले स्क्रीन पर कर्सर की स्थिति में दिखाई देता है। कर्सर स्क्रीन पर टिमटिमाता एक चिन्ह होता है जो यह बताता है कि आॅपरेटर द्वारा इनपुट कैरेक्टर द्वारा इनपुट कैरेक्टर कहाॅ दिखाई देखा माउस स्क्रीन पर उपस्थित कर्सर या पाॅइटंर को इधर-उधर से जाने का कार्य करता है।

कम्प्यूटर अपना काम कैसे करता है?

1. इनपुट के साधन जैसे की-बोर्ड, माउस, स्कैनर आदि के द्वारा हम अपने निर्देश, प्रोग्राम तथा इनपुट डेटा, प्रोसेसर को भेजते है।
2. प्रोसेसर हमारे निर्देश तथा प्रोग्राम का पालन करके कार्य सम्पन्न करता है।
3. प्रोग्राम का पालन हो जाने पर आउटपुट को स्क्रीन, प्रिंटर आदि साधनों पर भेज दिया जाता है।
4. भविष्य के प्रयोग के लिए सूचनाओं को संग्रह के माध्यमों जैसे हार्डडिस्क, फ्लाॅपी डिस्क आदि पर एकत्र किया जा सकता है।

1. इनपुट डिवाइस


आमतौर पर की-बोर्ड एवं माउस है। इनपुट युक्ति के द्वारा आंकडे एवं निर्देश कम्प्यूटर में प्रवेश करते है।
या
जिन डिवाइसेस का प्रयोग डेटा और निर्देशों को कम्प्यूटर में प्रविष्ट करने के लिए किया जाता है, वे सभी डिवाइस आगम अथवा इनपुट डिवाइस कहलाती है। यह भी कहा जा सकता है कि मानवीय भाषा में प्रविष्ट किए जा रहे डेेटा अथवा प्रोग्राम को कम्प्यूटर के समझने योग्य रूप् में परिवर्तित करने के लिए प्रयोग की जाने वाली डिवाइसेस को इनपुट डिवाइस कहा जाता है। ये डिवाइस अक्षरों, अंकों तथा अन्य विशिष्ट चिन्हों को बायनरी डिजिट अर्थात 0 तथा 1 में परिवर्तित करके सी0पी0यू0 के समझने योग्य बनाती है। इनपुट के लिए सबसे अधिक प्रयोग की जाने वाली युक्ति की-बोर्ड और माउस है। इन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जा सकता है।

कुछ और इनपुट डिवाइस निम्न है।
1. की-बोर्ड
2. ट्रैकबाॅल
3. लाइट पेन
4. जाॅसस्टिक
5. बार कोड रीडर
6. स्कैनर
7. मइक
8. ओ0एम0आर0, ओ0सी0आर0 एवं एम0आई0सी0आर0 आदि।

टैक्स्ट इनपुट डिवाइस
की-बोर्ड टाइप टाइप राइटर की तरह बटन दबाकर शब्द और करेक्टर लिखने के लिए उपयोग किया जाने वाला यंत्र है। अंग्रेजी भाषा के सबसे सामान्य कुंजी लेआउट फॅम्त्ज्ल् लेआउट है।

संकेतन यंत्र


1. माउसः- एक संकेतक यंत्र जो इसके सहयोगी धरातल के सदर्श दो परिणाम वाली गतियों की पहचान करली है।
2. ट्रैकबाॅलः- एक संकेतन यंत्र जिसमें साकेट के अंदर उभरा हुआ एक बाॅल होता है जो दोनों अक्षों के बारे में घूर्णन की पहचान करता है।
3. एक्सबाॅक्स 360 नियंत्रकः- एक्सबाॅक्स 360 को नियंत्रित करने के लिए प्रयुक्त एक यंत्र जो स्विचब्लेड अनुप्रयोग के उपयोग द्वारा बायें अथवा दायें अंगूठे की सहायता से अतिरिक्त संकेतक के रूप् में प्रयोग किया जा सकता है।

गेमिंग डिवाइस


1. जाॅसस्टिकः- नियंत्रण करने वाला एक सामान्य यंत्र जिसमें हाथ में पकडी जाने वाली एक छडी होती है जो इसके एक किनारे पर दो या तीन परिमाप वाले कोणों की पहचान करने के लिए धुरी का कार्य करती है।
2. गेमपेडः- हाथ मंे पकडने वाला एक सामान्य खेल नियंत्रक जो इनपुट प्रदान करने के लिए अंकों पर निर्भर रहता है।
3. खेल नियंत्रकः- कुछ निश्चित खेल उद्देश्यों के लिए विशेष प्रकार से निर्मित की विशिष्ट किस्म।

फोटो व वीडियो इनपुट डिवाइस


1. इमेज स्कैनरः- इमेज, प्रिंट किए हुए लेख, हस्तलेख अथवा किसी वस्तु को विश्लेषित कर इनपुट प्रदान करने वाला एक यंत्र।
2. वेबकेमः- यह जो विजुअल प्रदान करने के लिए अल्प ध्वनि वाला अीडियों कैमरा होता है। इस इनपुट को आसानी से इंटरनेट पर हस्तांतरित किया जा सकता है।

आॅडियो इनपुट डिवाइस


1. माइक्रोफोनः- ध्वनि संवेदक जो आवाज को विधुत संकेतों में बदलने के लिए इनपुट प्रदान करता है।

आॅन लाइन इनपुट डिवाइसः- यह वह युक्तियां है जिससे हम सिस्टम मंे सीधे इनपुट प्रदान कर सकते हैं। यह सिस्टम से जुडे रहते हैं। उदाहरण- माउस, की-बोर्ड, लाइटपेन, जायस्टिक आदि।

आॅफ लाइन इनपुट डिवाइसः- यह वह युक्तियां है जिसमें सिस्टम में जोडने से पहले हम इनपुट तैयार कर लेते हैं। और फिर आवश्यकता अनुसार उनसे इनपुट के लिए हम सिस्टम से जोड लेते हैं। उदाहरण- की से पंच कार्ड, की से टेप सिस्टम आदि।

सोर्सडेटा इनपुट युक्तियाॅंः- यह वह युक्तियां हैं जो किसी भी सोर्स से इनपुट पढ सकती है व सिस्टम में संचित कर लेती है। बाद में उसे आवश्यकता अनुसार गणना के लिए उपयोग किया जा सकता है। उदाहरण- प्वांइट आॅफ सेल टर्मिनल, स्कैनर आदि।

2. आउटपुट डिवाइस


मुख्य रूप से माॅनीटर और प्रिंटर इसके उदाहरण है इसके अलावा वे सभी युक्ति जो आपको बताए कि कम्प्यूटर ने क्या संपादित किया है आउटपुट युक्ति कहलाती है। या
निर्गम उपकरण से तात्पर्य ऐसे उपलकरणों से होता है जो कि संगणना के परिणामों को निर्गम तक पहंुचाते हैं। ये परिणाम दृश्य प्रदर्शन इकाई द्वारा दिखलाये जा सकते हैं। प्रिंटर द्वारा मुद्रित कराये जा सकते हैं, चुम्बकीय माध्यमों पर संग्रहित किये जा सकते हैं अथवा अन्य किसी विधि द्वारा यह निर्गम प्राप्त किये जा सकते हैं। एक कम्प्यूटर प्रणाली के विभिन्न अवयवों में कई उपकरण जो कि चुम्बकीय सिद्वांतों पर कार्य करते हैं। कम्प्यूटर में आंकडों के आगम एवं निर्गम दानों की उपयोग हेतु प्रयोग किये जाते है। निर्गम युक्तियां दो प्रकार की होती है।

साॅफ्ट काॅपी युक्तियांः- यह वह युक्तियों है जिसमें हम सिस्टम पर अस्थाई रूप् से आउटपुट प्राप्त कर सकते हैं। जैसे माॅनिटर, एल0सी0डी0 आदि।

हाॅर्ड काॅपी युक्तियांः- यह वह युक्तियों है जिससे हम कागज पर आउटपुट प्राप्त कर सकते हैं। जैसे प्रिंटर, प्लाॅटर।

मुद्रण यंत्रः- मुद्रण यंत्रांे से तात्पर्य एक ऐसी प्रणाली से होता है जिसमें कि कम्प्यूटर द्वारा प्राप्त परिणामें को कागज के उपर छाप कर स्थायी रूप् से उपयागकर्ता को प्रस्तुत किया जाता है। इस पद्वति द्वारा प्राप्त परिणाम कागज पर मुद्रित होने के कारण स्थायी रूप् से प्राप्त होते हैं जो कि मानव द्वारा पठनीय होते हैं मुद्रण यंत्र कम्प्यूटर से परिणामों को विधुत तरंगों के रूप् में प्राप्त करता है एवं उन्हें कूट संकेत के अनुसार अक्षरों में परिवर्तित करके कागज पर छाप देतें हैं। यह छापने की प्रक्रीया मुद्रण यंत्र के प्रकार एवं उसमें उपयोग की जाने वाली तकनीक के अनुसार सम्पन्न होती है।

माॅनीटरः- कम्प्यूटर को हम जो भी निर्देश देते हैं या जिस प्रोसेस्ड जानकारी को हम ग्रहण करते हैं उसे माॅनीटर पर देखते हैं। मुख्य रूप् से दो प्रकार के माॅनीटर आजकल प्रचलन में हैं।

सी0आर0टी0 माॅनीटरः- यह माॅनीटर उसी सिद्वांत पर काम करता है जिस पर हमारे घर का पुराना टी0वी0, इसमें कैथोड रे ट्यूब होती है इसीलिए इसे सी0आर0टी0 माॅनीटर कहा जाता है। यह थोडा बडा होता है और इसकी स्क्रीन थोडी मुडी हुई रहती है।

टी0एफ0टी0ः- यह एक सीधा माॅनीटर होता है। यह बजन में कम होता है और जगह भी कम घेरता है। यह सी0आर0टी0 माॅनीटर से अपेक्षाकृत महंगा होता है।

प्रिंटरः- आवश्यकता और कार्य क्षमता तथा बजट के हिसाब से प्रिंटर अलग-अलग तरह के होते है। लेकिन घरों या आॅफिसों में मुख्यतः दो ही प्रकार के प्रिंटरों का प्रयोग किया जाता है।

समघात मुद्रण यंत्रः- ऐसे मुद्रण यंत्र जिनमें क अक्षर को मुद्रित कराने हेतु किसी ऐसी तकनीक का प्रयोग किया जाता है जिसमें कि अक्षर को कागज पर छापने के लिए अक्षर एवं कागज के मध्य स्याही युक्त फीते का इस्तेमाल किया जाता है, एवं कागत पर उस अक्षर की आकृति उभारने हेतु किसी विधि से अक्षर पर पीछे से प्रहार किया जाता है, वे समघात मुद्रण यंत्र कहलाते है। उदाहरण- डाॅट मैट्रिक्स प्रिंटर आदि।

नाॅन इम्पैक्ट प्रिंटरः- इसमें उपरोक्त अन्य मुद्रण यंत्रों की भांति किसी हैम्मर इत्यादि की तकनीक का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसमें डाॅट मैट्रिक्स मुद्रण यंत्र की भाॅति छोटी-छोटी पिनें नहीं होती बल्कि पिनों के स्थान पर छोटे-छोटे विभिन्न नोजल लगे होते हैं जिनसे कि कम्प्यूटर से प्राप्त संकेतों के अनुसार स्याही की पतली विभिन्न धारायें छूटती हैं जो कि आपस में मिलकर वांछित अक्षर की आकृति बना देती हैं। उदाहरण- लेजर प्रिंटर।

डाॅट मैट्रिक्स प्रिंटरः- इस प्रिंटर में रिबन का उपयोग होता है यह भी 80 काॅलम और 132 काॅलम दो तरह की क्षमताआंे में आते हैं। इसमें प्रिंटर का खर्चा बाकी पिं्रटरों की अपेक्षा कम आता है लेकिन प्रिंट की गुणवत्ता और स्पीड दूसरे प्रिंटर्स के मुकाबले कम होती हैं। इसमें एक बार में केवल एक रंग का पिं्रट लिया ता सकता है। इसलिए इसे मोनो पिं्रटर भी कहते है। इसकी स्पीड सी0पी0एस0 यानी कैरेक्टर पर सेकेण्ड में नापी जाती है।

इंकजैट प्रिंटरः- यह इंकजैट टैक्नोलाॅजी पर काम करता है। इसमें मोनो और कलर्ड या रंगीन दो तरह के पिं्रटर आते है। इसकी गुणवत्ता और स्पीड दोनांे बेहतर होती है लेकिन इसमें प्रिंटिग का खर्चा भी ज्यादा होता है।

लेजर प्रिंटरः- इसमें भी मोनो और रंगीन दो तरह के प्रिंटर आते हैं। इसकी गुणवत्त और स्पीड बाकी पिं्रटर्स से बेहतर होती है। इसकी स्पीड पी0पी0एम0 यानि पेज पर मिनट में नापी जाती है।

आजकल बाजार में आल-इन-वन प्रिंटस भी आते हैं। जिसे आप पिं्रटर के अलावा फोटो काॅपी मशीन, स्कैनर और फैक्स की तरह भी इस्तेमाल कर सकते है।

प्लाॅटरः- ग्राफ प्लाॅटर आउटपुट की एक ऐसी इकाई होती है जिसके द्वारा ग्राफों तथा डिजाइनांे की स्थायी प्रतिलिपि प्राप्त कर सकते हैं। कम्प्यूटर आउटपुट हेतु अन्य प्रयुक्त की जाने वाली विधियां जिनमें कि आउटपुट स्थायी प्रतिलिति के रूप में प्राप्त होता है। ग्राफ, डिजाइनों एवं अन्य आकृतियों को एकदम सही तरीके से नहीं छाप सकती। यदि हमें आउटपुट के रूप में स्पष्ट एवं उचित आकृतियों की आवश्यकता हो तो इस यंत्र का उपयोग किया जाता है। इससे काफी उच्च कोटि की परिशुद्वता प्राप्त की जा करती है। यह एक इंच के हजारवंे भाग के बराबर बिन्दु को भी छाप सकता है।

Chapter- 1 | कम्प्यूटर परिचय

कम्प्यूटर परिचय




कम्प्यूटर एक ऐसा यंत्र, औजार या डिवाइस है जो हमारे द्वारा दिये गये आंकडों या डाटा को ग्रहण कर उस पर हमारे द्वारा दिये गये निर्देशों के अनुसार काम करता है और हमें इच्छित परिणाम प्रदान करता है। जिन निर्देशों के आधार पर कम्प्यूटर काम करता है उन्हें हम प्रोग्राम कहते हैं। हिन्दी में कम्प्यूटर को संगणक भी कहा जाता है। कई बार हम कम्प्यूटर के लिए हम पी0सी0 शब्द का भी प्रयोग करते है। पी0सी0 एक अंग्रेजी शब्द है जिसका मतलब होता है पर्सनल कम्प्यूटर यानि व्यक्तिगत कम्प्यूटर। आपने शेयर्ड कम्प्यूटर का नाम भी सुना होगा। शेयर्ड कम्प्यूटर वह है जिसे कई भिन्न-भिन्न लोग उपयोग करते हैं। विशेष रूप से इसका तात्पर्य उस कम्प्यूटर से है, जो सार्वजनिक या साझा उद्देश्य के लिए उपलब्ध होते है। जैसे शालाएं, पुस्तकालय, इन्टरनेट और गेमिंग पैकेज और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पाए जाने वाले कम्प्यूटर।

पर्सनल कम्प्यूटर माईको्र कम्प्यूटर समानार्थक से जाने वाले वैसे कम्प्यूब्र प्रणाली है जो विशेष रूप से व्यक्तिगत अथवा छोटे समूह के द्वारा प्रयोग में लाये जाते हैं। इनक म्प्यूटरों को बनाने में माइक्रोप्रोसेसर मुख्य रूप् से सहायक होते हैं। पर्सनल कम्प्यूटर निर्माण विशेष क्षेत्र तथा कार्य को ध्यान में रखकर किया जाता है। उदाहरणार्थ- घरेलू कम्प्यूटर तथा कार्यालय में प्रयोग किये जाने वाले, बाजार में, छोटे स्तर की कम्पनियां अपने कार्यालयों के कार्य के लिए पर्सनल कम्प्यूटर को प्राथमिकता देते हैं।
पर्सनल कम्प्यूटर के मुख्य कार्याें में क्रीडा खेलना, इन्टरनेट का प्रयोग, शब्द प्रक्रिया इत्यादि शामिल हैं।

पर्सनल कम्प्यूटर के कुछ व्यवसायिक कार्य निम्नलिखित हैं-


1. कम्प्यूटर सहायक रूपरेखा तथा निर्माण
2. इन्वेंट्री प्रोडक्शन कंट्रोल
3. स्प्रेडशीट कार्य
4. एकाउटिंग
5. साॅफ्टवेयर निर्माण
6. वेबसइट डिजाइनिंग तथा निर्माण
7. संाख्यिकी गणना आदि

कम्प्यूटर के प्रकार


वर्तमान में कम्प्यूटर इलेक्ट्रानिक एवं डिजिटल है। इनमें मुख्य रूप से तार ट्रांजिस्टर एंव सर्किट का प्रयोग किया जाता है। जिसे हार्डवेयर कहा जाता है। निर्देश एवं डेटा को साॅफ्टवेयर कहा जाता है। कम्प्यूटर अपने काम काज, प्रयोजन या उद्देश्य तथा रूप-आकार के आधार पर विभिन्न प्रकार के होते है।
वस्तुतः इनका सीधे-सीधे अर्थात् प्रत्यक्षतः वर्गीकरण करना कठिन है, इसलिए इन्हें हम निम्नलिखित तीन आधारों पर वर्गीकृत करते हैं।
1. अनुप्रयोग
2. उद्देश्य
3. आकार

अनुप्रयोग के आधार पर कम्प्यूटरों के प्रकार यधपि कम्प्यूटर के अनेक अनुप्रयोग है लेकिन प्रमुख अनुप्रयोगों के आधार पर कम्प्यूटरों के तीन प्रकार होते है।
1. एनालाॅग कम्प्यूटर
2. डिजिटल कम्प्यूटर
3. हाईब्रिड कम्प्यूटर

उद्देश्य के आधार पर कम्प्यूब्र के प्रकारः- कम्प्यूटर को उद्देश्यों के लिए हम स्थापित कर सकते है।
1. सामान्य-उद्देश्यीय कम्प्यूटर
2. विशिष्ट-उद्देश्यीय कम्प्यूटर

आकार के आधार पर हम कम्प्यूटरों को निम्न श्रेणियाॅ प्रदान कर सकते हैं-
1. माइक्रो कम्प्यूटर
2. वर्क स्टेशन
3. मिनी कम्प्यूटर
4. मेनफ्रेम कम्प्यूटर
5. सुपर कम्प्यूटर

पर्सनल कम्प्यूटर ऐसे मइक्रों कम्प्यूटर है जो विशेष रूप से व्यक्तिगत अथवा छोटे समूह के द्वारा प्रयोग में लाए जाते हैं। इन कम्प्यूटर को बनाने में माइक्रो प्रोसेसर मुख्य रूप से सहायक होते है। पर्सनल कम्प्यूटर निर्माण विशेष क्षेत्र तथा कार्य को ध्यान में रखकर किया जाता है। उदाहरणार्थ- घरेलू कम्प्यूटर तथा कार्यालय में प्रयोग किये जाने वाले कम्प्यूटर।
पर्सनल कम्प्यूटर के मुख्य कार्यों में गेम- खेलना, इन्टरनेट का प्रयोग, शब्द-प्रक्रिया इत्यादि शामिल हैं।
कम्प्यूटर का मुख्य कार्य हमारे द्वारा दिये गये डाटा को स्टोर कर उसपर कार्य कर के हमें परिणाम देना है। इसी आधार पर उन्हें कार्य क्षमता के आधार पर कुछ श्रेणियों में बाॅटा गया है। वह हैं - सुपर कम्प्यूटर, मेनफ्रेम कम्प्यूटर, मिनी कम्प्यूटर, एवं माइक्रों कम्प्यूटर आदि। सुपर कम्प्यूटर इनमें सबसे बडी श्रेणी होती है, तथा माइक्रो कम्प्यूटर सबसे छोटी।

सुपर कम्प्यूटरः- यह सबसे तेज गति से कार्य करने वाले कम्प्यूटर होते हैं। वह बहुत अधिक डाटा को काफी कम समय में इंफार्मेशन में बदलने में सक्षम होते है। इनका प्रयोग बडे-बडे कार्य करने में होता है, जैसे मौसम की भविष्यवाणी, डाटा माइनिंग, जटिल सिमुलेशन, मिसाइलों के डिजाइन आदि। इनमें अनेक माइक्रोप्रोसेसर एक विशेष छोटी मशीन जो कम्प्यूटिंग के कार्य को काफी आसानी से तथा बहुत ही कम समय में कर सकने में सक्षम होती है। किसी जटिल गणना को कम समय में पूरा करने के लिए बहुत से प्रोसेसर एकसाथ काम कराने पडते हैं। इसे पैरेलेल प्रोसेसिंग कहा जाता है। इसके अन्तर्गत जटिल काम को छोटे-छोटे टुकडों में इस प्रकार बाॅंटा जाता है कि ये छोटे-छोटे कार्य एक साथ अलग-अलग प्रोसेसिंग द्वारा स्वतंत्र रूप से किये जा सकें।

मेनफ्रेम कम्प्यूटरः- सुपर कम्प्यूटर से कार्यक्षमता में छोटे परंतु फिर भी बहुत शक्तिशाली होते हैं। इन कम्प्यूटरों पर एक समय में 256 से अधिक व्यक्ति एक साथ काम कर सकते हैं। अमेरिका की आइ0बी0एम0 कम्पनी जिसका पूर्ण रूप इंटरनेशनल बिजनेस मशीन काॅर्पोरेशन है, मेनफ्रेम कम्प्यूटर को बनाने वाली सबसे बडी कम्पनी है।

मिनी कम्प्यूटरः- मेनफ्रेम से छोटे परन्तु माइक्रो कम्प्यूटर से बडे होते हैं।

माइक्रो कम्प्यूटरः- ये सबसे छोटे होते हैं तथा इन्हीं को पर्सनल कम्प्यूटर कहा जाता है। इसका प्रथम संस्करण 1981 में विकसित हुआ था, जिसमें 8088 माइक्रो प्रोसेसर प्रयुक्त हुआ था।

कम्प्यूटर के गुण
कम्प्यूटर हमारे द्वारा दिये जाने वाले हर कार्य को बखूबी करने में सक्षम होते हैं। इसके कुछ गुण इस प्रकार हैः-
1. गतिः- कम्प्यूटर काफी तेज गति से कार्य करते हैं, जब हम कम्प्यूटर के बारे में बात करते हैं तो हम मिनी सेकेण्ड, माइक्रो सेकेण्ड में बात नहीं करते, बल्कि हम 10-12 सेकेण्ड में एक कम्प्यूटर कितना कार्य कर लेता है, इस रूप में उसकी गति को आॅकते हैं।
2. स्मरण करने या संग्रह की क्षमताः- एक सामान्य कम्प्यूटर भी एक बाद दिये गये निर्देश को काफी समय तक स्मरा रखने में सक्षम होता है, तथा जब भी आवश्यकता पडे, उसे फिर से लिखा और भरा जा सकता हे।

Major Technological Inventions And Inventors - प्रमुख तकनीकी आविष्कार और आविष्कारक

आप तो जानते है कि "आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है" लेकिन इन आविष्कार को करने के लिये आविष्कारक भी होने चाहिये, अगर ये आविष्कारक (...