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Saturday, 23 December 2017

What is Wi-Fi - वाई-फाई क्या है

वाई-फाई ( Wi-Fi) आधुनिक युग का डाटा और इंटरनेट शेयर करने का सबसे आसान और तेज तरीका है, लेकिन ये वाई-फाई ( Wi-Fi ) आखिर है क्‍या और किस तकनीक पर आधारित है आईये जानने की कोशिश करते हैं - वाई-फाई क्या है (Kya Hai Wi-Fi) -

वाई-फाई क्या है - What is Wi-Fi



वाई-फाई ( Wi-Fi) की पूरा नाम (full form) वायरलेस फिडेलिटी (Wireless fidelity) है, वाई-फाई ( Wi-Fi) आविष्‍कार John O'Sullivan और John Deane ने सन् 1991 में किया था। असल में यह एक वायरलैस नेटवर्किंग सुविधा है, जिसे आप (WLAN) यानि Wireless Local Area Network के नाम से जानते हैं, जिसकी सहायता से आप बडी आसानी से मोबाइल, लैपटॉप, कंम्‍प्‍यूटर और प्रिंटर जैसी डिवाइसों को इंटरनेट और नेटवर्क से जोड सकते हैं।

वाई-फाई के नाम से जुडा तथ्‍य - Facts About Wi-Fi Technology



कहते हैं वायरलेस फिडेलिटी (Wireless fidelity) का असल में कोई मतलब नहीं है, असल में वाई-फाई एलायंस (Wi-Fi Alliance) कंपनी इस वाई-फाई ( Wi-Fi) डिवाइस को बनाती है उन्‍होनें हाई-फाई ( Hi-fi ) यानि हाई फिडेलिटी की तर्ज पर इसे वाई-फाई नाम दिया है, जिसका कोई अर्थ नहीं है। यह केवल वाई-फाई एलायंस पंजीकृत ट्रेडमार्क शब्द है। लेकिन फिर भी इसे वायरलेस फिडेलिटी (Wireless fidelity) केे नाम सेे जाना जाता है।

वाई-फाई कैसे काम करता है - How Does Wi-Fi Technology Work



वाई-फाई ( Wi-Fi) डिवाइस बिना किसी तार के दो डिवाइसों के बीच में कनेक्‍शन बनाता है, जिसके लिये यह रेडियो फ्रीक्वेंसी (Radio Frequency) का इस्‍तेमाल करता है, यह टेक्नोलॉजी IEEE 802.11 कई स्टैण्डर्ड पर बेस्ड है जिसकी आवृत्ति 2.4GHz से 5GHz के बीच होती है, वायरलेस नेटवर्क किसी भी डिवाइस को कनेक्‍ट करने के लिये एक Access Point (AP) की आवश्‍कयता होती है और जिस ऐरिया में वाई-फाई ( Wi-Fi) होता है उसे हॉट-स्पॉट (Hotspot) कहते है।



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क्‍या होता है एनएफसी फीचर - What Is NFC Feature

एनएफसी फीचर (NFC feature) -  अगर आपने अभी हाल ही में सैमसंग स्मार्टफोन गैलेक्सी जे 3 (Samsung Galaxy J3) हो तो इसमें मोटरसाइकिल सवारों के लिए एक खास फीचर बाइक एस मोड दिया गया है और साथ में एक एस बाइक मोड का स्‍टीकर (S Bike Mode Sticker) दिया गया है, जिस पर मोबाइल टच करने से मोबाइल का एस बाइक मोड (S Bike Mode) एक्टिविट हो जाता है, असल में यह फोन एनएफसी इंटिग्रेटेड (Integrated NFC) है। आईये जानते हैं कि आखिर क्‍या है एनएफसी तकनीक (NFC technology) और यह कैसे काम करती है - क्‍या होता है एनएफसी फीचर - What Is NFC Feature

क्‍या होता है एनएफसी फीचर - Kya Hota Hai NFC Feature




एनएफसी क्या है - NFC Kya Hai ?


असल में एनएफसी ( NFC) की फुलफार्म है नियर फील्ड कम्युनिकेशन (Near Field Communication) है, यह एक High Frequency Wireless Communication Technology है, जो कम दूरी यानि ज्‍यादा से ज्‍यादा 10 सेमी की दूरी से दो डिवाइसों के बीच डाटा ट्रांंसफर कर सकती है, इसकी मदद से आप केवल एक फोन का दूसरे फोन से टच करने भर से ही तेज गति से डाटा ट्रांसफर कर सकते हैं। NFC कनेक्‍शन डिवाइस का टच करने पर तुरंत जुड जाता है और काम खत्‍म होने पर अपनेआप बंद हो जाता है। NFC कनेक्‍शन ब्लूटूथ के मुकाबले 300 MBPS की गति सेे डाटा ट्रांसफर कर सकता है।


सैमसंग स्मार्टफोन गैलेक्सी जे 3 (Samsung Galaxy J3) के साथ में एस बाइक मोड का स्‍टीकर (S Bike Mode Sticker) दिया जाता है यह स्‍टीकर एक NFC Tag है, जिसमें NFC टैग एक तरह की चिप होती है, जिसमें छोटी सी इन्फोर्मेशन (Information) सेव की जा सकती हैै, बिलकुल क्‍यूआर कोड (QR Code) की तरह और जब आप इससे मोबाइल टच करते हैं जिसमें डाली गयी सूचना केे अााधार पर आपके फोन का एस बाइक मोड (S Bike Mode) एक्टिव हो जाता है।

इसके अलावा आप NFC से आप डाटा ट्रांसफर कर सकते हैं, मोबाइल वॉलेट (Mobile Wallet) का इस्‍तेमाल कर मोबाइल पेमेंट कर सकते हैं। अब तो NFC Business Card का भी प्रयोग होने लगा है, जिसमें आपकी सारी सारी डिटेल्स रहती है, जब किसी को वह डिटेल्स देनी हो तो बस अपना मोबाइल उसके मोबाइल से टच कर दिया।


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प्रोसेसर में गीगाहर्ट्ज़ क्‍या होता है - What Is GHZ (Gigahertz) in Processor

प्रोसेसर ( Processor) को तो आप समझ ही चुके हैं, लेकिन इसकी क्षमता निर्धारित करने वाला शब्‍द और भी है गीगाहर्ट्ज़ (Gigahertz), हमने यही पढा है कि प्रोसेसर जितने ज्‍यादा गीगाहर्ट्ज़ (Gigahertz) का होगा, वह उतना ही शक्तिशाली होगा लेकिन यह गीगाहर्ट्ज़ (Gigahertz) होता है, आईये जानते हैं -

प्रोसेसर में गीगाहर्ट्ज़ क्‍या होता है - What Is GHZ (Gigahertz) in Processor



गीगाहर्ट्ज़ को समझने से पहले हमें हर्ट्ज़ या CPU Clock Rate या CPU Clock Speed को समझना होना, प्रोससर के अंदर एक प्रकार की घडी होती है वह एक सेकेण्‍ड में जितनी बार घूमती है, यानि गणना करने में जितना समय लेती है उसे Clock Speed कहते है और इस घडी की ईकाई है हर्ट्ज, यानि अगर आपके सीपीयू की क्षमता 1 हर्ट्ज है, Clock Speed 1 चक्र प्रति सेकंड मानी जायेगी

अब जरा इस टेबल को देखिये  -



  • 1 गीगाहर्ट्ज़ = 1000 मेगाहर्ट्ज़ = 1000000 किलोहर्ट्ज =  1000000000 हर्ट्ज

  • 1 मेगाबाइट = 1,000,000 बाईट = 1024 किलाेबाइट = 1024 हर्ट्ज



इस प्रकार 1 गीगाहर्ट्ज़ (Gigahertz) का मतलब 1,000,000,000 हर्ट्ज होता है, इसका मतलब अगर आपके प्रोसेसर पर लिखा है कि वह 2.1 GHz का है तो वह तो वह उसकी Clock Speed होगी यानि वह 1 सेकेण्‍ड में 2.1x 1000000000 = 2100000000 किलाेबाइट डाटा की गणना कर सकता है।


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Friday, 22 December 2017

क्‍या होता है कंप्‍यूटर में अवतार - What Is Avatar in Computer

जब से James Cameron की अवतार मूवी (Avatar Movie) आयी है तब लोगों में अवतार (Avatar) को लेकर जिज्ञासा बढ गयी है, वैसे तो हिंदू धर्म में जब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं या जन्‍म लेते हैं तो उसे अवतार कहते हैं लेकिन कंप्‍यूटर की दुनिया में अवतार (Avatar) अर्थ अलग ही होता है, तो क्‍या आप जानना नहीं चाहते हैं कि computing में क्‍या होता है अवतार (Avatar) -

क्‍या होता है कंप्‍यूटर में अवतार - What Is Avatar in Computer




कंप्‍यूटर Avatar आपका ग्राफिकल प्रतिरूप होता है, असल में जब आप गेम खेलते हैं या किसी चैटग्रुप में चैट करते हैं तो यह Avatar आपको री प्रेजेंट करता है, यह और भी कारगर तब होता है जब आप ऑनलाइन  मल्‍टीप्‍लेयर गेम खेल रहे होते हैं, जिसमें 2 या उससे अधिक प्‍लेयर होते हैं तब आपका अवतार ही आपको री प्रेजेंट करता है, चूंकि आप तो गेम में नहीं जा सकते हैं


Avatar एक आयकन भी हो सकता है या कोई 2D या 3D Realistic Character भी हो सकता है अगर अवतार मूवी की बात करें तो वहां भी कुछ कुछ ऐसा ही किया गया है, लेकिन वास्‍तविक दुनिया में आप अपना ऐसा अवतार नहीं बना सकते हैं जो आपकी तरह सोचता हो और या आपको दूसरे ग्रह पर ले जा सकता हो,  खैैर चलिये वास्‍त‍ि‍विक दुनिया की बात करते हैं, यहां Role Playing Video Games में अवतार का इस्‍तेमाल होता है


सबसे पहले कंप्‍यूटर की दुनिया में अवतार शब्‍द का इस्‍तेमाल 1979 में हुआ था, उस समय एक Role Playing Video Game आया था जिसका नाम था Avatar, इसे University of Illinois PLATO system ने बनाया था


अवतार आपके Gaming Experience को कई गुना बढा देते हैं, अगर आपको याद हो 8bit Games के समय में भी Avatar हुआ करते थे, अगर आपने Strike Games खेले हों तो उनमें आपके प्‍लेयर का Avatar दिया गया होता है, अगर आप गेम में आपके अवतार के घायल होने का मतलब है कि आप हार रहे हैं,


आज तक बहुत से लोग अपनी फेसबुक या अन्‍य सोशल नेटवर्किंग साइट के लिये अपने फोटो के बजाय अपने Avatar का इस्‍तेमाल करते हैं, इसके अलावा Artificial intelligence के लिये भी Avatar का इस्‍तेमाल किया जाता है


ऐसी कई वेबसाइट हैं जहां आप अपना Avatar बना सकते हैं -



  • doppelme.com

  • avatarmaker.com

  • Pickaface.net

  • avatarmaker.net


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Thursday, 21 December 2017

क्‍या है सीजीआई और वीएफएक्‍स What is CGI and VFX

अगर आपने मूूवी बाहुबली-द बिगनिंग और बाहुबली द कॉन्क्लूज़न देखी हो तो आपको पूरी मूवी में आश्यर्चजनक सीन हर दो तीन मिनट में दिखाई देेते रहे होगें, इसलिये यह मूवी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भव्य फिल्म कही जा रही है और इसकी भव्‍यता की वजह है इसके विश्‍ााल और भव्‍य सेट जिसमें माहिष्मती का महल, आकाश छूता झरना या कालकेय केे साथ्‍ा युद्ध जिसमें वीएफएक्स और सीजीआई का प्रयोग किया गया गया है, आईये जानते हैं क्‍या होते हैं वीएफएक्स और सीजीआई स्पेशल इफेक्ट्स-

सीजीआई (CGI)


सीजीआई (CGI) का पूरा अर्थ है (कंप्यूटर ग्राफिक्स इमेज) इस तकनीक का प्रयोग आज कल की सभी फिल्‍मों में हो रहा है, वजह सीधी सी है  सीजीआई (CGI) के प्रयोग से किसी भी प्रकार का सेट तैयार कर सकते हैं, जो देखने में बिलकुल असली जैसा होता है, इसे फिल्‍म में इस तरह से प्रयोग किया जाता है कि आप असली नकली में अंतर नहीं कर सकते हैं साथ ही आपका सेट बनाने का हजारों लाखों का खर्चा बच जाता है, अगर आपने अवतार मूवी देखी हो तो पूरी की पूरी मूवी में कंप्यूटर ग्राफिक्स इमेज का प्रयोग किया गया है


सीजीआई (CGI) से क्‍या क्‍या कर सकते हैं


सीजीआई (CGI) से आप बडें बडें विशाल सेट बना सकते हैं, अतंरिक्ष जीव बना सकते हैं, डायनासोर बना सकते हैं, परमाणु विस्‍फोट बना सकते हैं और आपकी कल्‍पना शक्ति पर निर्भर करता है

वीएफएक्स (VFX)


कई बार फिल्मों के दृश्य देखकर हमारी सांसें थम जाती हैं। हम सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि कैसे शूट किया गया होगा, लेकिन यह कमाल है VFX तकनीक का वीएफएक्स (VFX) असल मेें होता है विजुअल इफेक्ट्स (Visual Effects) यह ऐसी तकनीक होती है जहां सीजीआई (CGI) से तैयार दृश्यों को वास्‍तविक दृश्यों से इस प्रकार जोडा जाता है कि दोनों में कोई अंतर दिखाई न दे, इसके इसके लिये ग्रीन या ब्‍लू स्‍क्रीन का प्रयोग किया जाता है, अब तो वीएफएक्स श्रेणी में ऑस्कर भी दिये जाते हैं लाइफ ऑफ पाई’ याद है ना जिसमें एक लडका नाव में एक शेर के साथ रहता है


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क्‍या है वानाक्राई रैंसमवेयर वायरस - What is Wanna Cry 'ransomware' Virus

12 मई 2017 को दुनियाभर में कप्‍यूटरों पर एक वायरस का हमला हुआ है, जिससे भारत भी अछूता नहीं है इस वायरस का नाम है "वानाक्राई" यह एक रैंसमवेयर वायरस है, तो आईये जानते हैं क्‍या है 'वानाक्राई' रैंसमवेयर वायरस - What is Wanna Cry Ransomware Virus -

क्‍या है वानाक्राई रैंसमवेयर वायरस - What is Wanna Cry Ransomware Virus


सबसे पहले जानते हैं रैंसमवेयर "Ransomware" क्‍या होता है, इसका अर्थ है फिरौती मॉगने वाले कंप्‍यूटर प्रोग्राम, जिनके प्रभाव से आपके कंप्‍यूटर काम करना बंद कर देता है और कंप्‍यूटर को मुक्‍त करने के बदले फिरौती की रकम मॉगी जाती है और असल जिंदगी की तरह ही इसकी कोई गारंटी नहीं है कि फिरौती की रकम मिलने के बाद भी आपका कंप्‍यूटर वायरस से मुक्‍त हो जायेगा


इसी प्रकार का एक रैंसमवेयर "Ransomware" वायरस वानाक्राई (Wanna Cry) का विश्‍व भर के लगभग 100 देशों में के कंप्यूटरों पर Attack हुआ है इसे Ransomware Virus Attack कहा जा रहा है इस वायरस का अटैक जिन कंप्‍यूटरों पर हुआ है उन कंप्यूटर ने काम करना बंद कर दिया है, यह दुनिया सबसे बड़ा साइबर हमला बताया जा रहा है


जब Ransomware Virus Attack आपके Computer पर होता है तो आपकेे Computer की सभी फाइलें लॉक हो जाती है अगर तकनीकी भाषा में कहें तो encrypt हो जाती है इनक्रिप्ट का अर्थ है यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें data या information को secret codes में convert कर दिया है और उसे जब तक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है जबकि उसे de encrypt न किया जाये


चलिये समझते हैं आपके कंप्‍यूटर में पुराने गानों का कलेक्‍शन, आपकी शादी का वीडीयो आपके गेम्‍स आपके एमएस वर्ड में बनाई गयी जरूरी फाइलें, पावर पाइंट में बनाये गये जरूरी स्‍लाइड शो और पीडीएफ ईबुक सभी एक ऐसी फाइल में बदल जायेगें जिन्‍हें किसी भी software में खोला नहीं जा सकता है, जब तक कि इस Ransomware Virus को रिमूव न कर दिया जाये


इस वायरस के मामले में भी ऐसा ही है जो कंप्यूटर्स हैक हुए हैं उन्हें खोलने पर एक मैसेज दिखाई दे रहा है जिसमें कहा गया है कि यदि फाइल वापस पाना चाहते हो तो पैसे चुकाने होंगे, यानि फाइलों को encrypt किया गया है और de encrypt करने के लिये पैसे की मॉग की जा रही है यानि फिरौती मॉगी जा रही है

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क्लाउड कम्प्यूटिंग और उसके प्रकार (Types Of Cloud Computing)

Cloud Computing के बारे में हम आये दिन News और Internet पर पढते रहते हैं, Cloud Computing एक बहुत ही Useful Technology है, आईये जानते हैं क्‍या है क्लाउड कम्प्यूटिंग (Cloud Computing) और यह कितने प्रकार की होती है - क्लाउड कम्प्यूटिंग और उसके प्रकार (Types Of Cloud Computing)

क्लाउड कम्प्यूटिंग और उसके प्रकार Types Of Cloud Computing


इससे आप अपनी सभी जरूरी files को जैसे Documents, photos, music, videos etc. को Computer के साथ साथ Internet पर भी Save करके रख सकते हो, जैसे बादल कहीं से पानी लेते हैं और कहीं पे भी बरसा देते हैं उसी आधार पर है Cloud Computing यह भी नेेेटवर्क के माध्‍यम से काम करती है, आईये जानते हैं यह कैसे काम करती है


Cloud Computing के लिये बडी बडी कंंपनियों जैसे Google या microsoft बहुत ही विशाल डाटा सेेंटर (Data center) बनाती है डाटा सेेंटर (Data center) वह जगह होती है जहां एक बहुत बडें पैमाने पर डाटा (जैसे आपके वीडीयो, फोटो या डाक्‍यूमेंट) काे स्‍टोर किया जाता है यह आपस में एक नेटवर्क से जुडे रहते हैं और कहीं भी जरूरत पडने पर इंटरनेट के माध्‍यम से वहां तुरंत डाटा का पहुंचा दिया जाता है, उदाहरण के लिये फेसबुक डाटा सेंटर (Facebook Data Center) को ले लीजिये यह भी क्‍लाउड से जुडा है आपके द्वारा फेसबुक अपलोड किये जाने वाले फोटो और वीडीयो यहीं सुुुुरक्षित रहते हैैं और आप इस डाटा का उपयोग फेसबुक की एप्‍लीकेशन या वेबसाइट के जरिये दुनियां में किसी भी स्‍थान पर कर सकते हैं बस आपको चाहिये फेसबुक की एप्‍लीकेशन और यूजर आईडी पासवर्ड


लेकिन छोटी कंपनीया जिनके पास इतना पैसा नहीं है कि वह अपना खुद का डाटा सेंटर बना सकें तो वह क्‍लाउड के माध्‍यम से इंटरनेट पर हार्डवेयर और स्‍पेस किराये पर ले सकते हैं, उदाहरण के लिये अगर अाप जीमेल पर अपनी ईमेल आईडी बनाते हैं तो आपको गूगल की तरफ से 15GB का क्‍लाउड स्‍टोरेज फ्री दिया जाता है, लेकिन अगर आपको 15GB से ज्‍यादा की आवश्‍यकता है तो आप इसे गूगल क्‍लाउड से किराये पर ले सकते हैं Google Drive पर एक ईमेल आईडी पर 30 TB तक का स्‍पेस किराये के लिये उपलब्‍ध है 30 TB का मासिक किराया है 19500 रू0 महीना, आप पूरी लिस्‍ट यहां से चैक कर सकते हैं

Cloud Computing का अर्थ सिर्फ डाटा अपलोड करना ही नहीं है, गूगल ने Google Drive के माध्‍यम से Cloud पर कई सारी एप्‍लीकेशन भी उपलब्‍ध करा रखीं हैं जिन्‍हेें आप बिना अपने कंम्‍यूटर में इस्‍टॉल किये सीधे अपने ब्राउजर में चला सकते हैं ये एप्‍लीकेशन हैं - Google Docs, Google Sheets, Google Slides, Google Forms, google drawings और google sites, इसके अलावा अगर आपके कंप्‍यूटर में फोटोशॉप नहीं चल रहा है तो आप Cloud Computing की सहायता से उसे भी चला सकते हैं, लेकिन Cloud Computing के लिये आपके पास एक अच्‍छा इंटरनेट कनेक्‍शन होना जरूरी है

अब बात करते हैैं Cloud Computing कितने प्रकार की हाेती है - अभी वर्तमान में Cloud Computing चार प्रकार की है -

  1. प्राइवेट क्लाउड कंप्यूटिंग(Private Cloud Computing) - प्राइवेट क्‍लाउड का उदाहरण है Google Drive जहां आपके सारे डाक्‍यूमेंट आपके ईमेल आईडी और पासवर्ड से सुरक्षित रहते हैं, इन्‍हें आपके अलावा और कोई उपयोग नहीं कर सकता है यह कुछ हद तक ज्यादा सुरक्षित माना जाता है

  2. पब्लिक क्लाउड कंप्यूटिंग (Public Cloud Computing) - पब्लिक क्लाउड हर सामान्‍य व्‍यक्ति के लिये उपलब्‍ध रहता है, उदाहरण के लिये अगर किसी साइट पर कोई ईबुक फ्री डाउनलोड के लिये उपलब्‍ध करायी गयी हो और आप उसे एक ही क्लिक में बिना अकांउट बनाये डाउनलोड कर पाते हों पब्लिक क्लाउड थोड़ा कम सुरक्षित माना जाता है

  3. कम्युनिटी क्लाउड कंप्यूटिंग (Community Cloud Computing) -कम्युनिटी क्लाउड कंप्यूटिंग केवल एक ग्रुप के सदस्‍यों के लिये उपलब्‍ध्‍ा रहती है, इसके अलावा और कोई बाहरी व्‍यक्ति इस डाटा का इस्‍तेमाल नहीं कर सकता है, उदाहरण के लिये किसी कंपनी के कर्मचारी ही केवल उस कंपनी के साइट पर उपलब्‍ध डाटा का इस्‍तेमाल कर सकते हैं या किसी स्‍कूूूल द्वारा बनायी गयी वेबसाइट और उस पर उपलब्‍ध सामग्री का उपयोग केवल उस स्‍कूल या संस्‍था के छाञ ही कर सकते हैं

  4. हाइब्रिड क्लाउड कंप्यूटिंग (Hybrid Cloud Computing) - हाइब्रिड क्लाउड में पब्लिक क्लाउड और प्राइवेट क्लाउड दोनों का इस्‍तेमाल किया जाता है, ऐसे  किसी साइट पर कुछ सामग्री सार्वजनिक उपलब्‍ध हो और कुछ सामग्री केवल रजिस्‍टर्ड यूजर्स के लिये ही उपलब्‍ध हो ऐसे क्‍लाउड को हाइब्रिड क्लाउड कहते हैं


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डार्क इंटरनेट क्‍या है - What is Dark Internet

ब्‍लू व्‍हेल गेम आने के बाद आपने डार्क इंटरनेट (Dark Internet ), डीप वेब (Deep web) और डार्क वेब (Dark web) जैसे शब्‍द सुने होगें और जानने की जिज्ञासा भी रही होगी कि आखिर क्‍या है ये डार्क इंटरनेट (Dark Internet ), डीप वेब (Deep web) और डार्क वेब (Dark web) क्‍या है तो आईये जानने की कोशिश करते हैं कि डार्क इंटरनेट क्‍या है - What is Dark Internet

डार्क इंटरनेट क्‍या है - What is Dark Internet


अगर इंटरनेट (Internet ) की बात की जाये तो आप तुरंत ही बतायेंगे कि आप इंटरनेट को अच्‍छे से जानते हैं, आप गूगल, फेसबुक, यूट्यूूब और इसके अलावा लाखों ऐसी वेबसाइट हैं जिन्‍हें अाप और आपके साथ दुनिया भर के लोग हर रोज इस्‍तेमाल करते हैं, लेकिन अगर हम कहें दुनिया भर के लोग इंटरनेट का जो हिस्‍सा इस्‍तेमाल करते हैं वह केवल पूरे इंटरनेट का केवल 5 प्रतिशत ही है तो शायद कई लोग यकीन नहीं मानेगें लेकिन ये सच है आप साधारण ताैर इंटरनेट को जो हिस्‍सा इस्‍तेमाल करते हैं या सीधे शब्‍दों में कहें तो आप इंटरनेट के जिस हिस्‍से तक पहुॅच रखते हैं वह Public Internet है इसेे Surface web भी कहते हैैं वह केवल 5 प्रतिशत ही है, अब प्रश्‍न है कि बाकी 95% इंटरनेट कौन प्रयोग करता है और वह कहां हैं तो आईये जानने की कोशिश करते हैं

इंटरनेट को access कर पाने के अनुसार उसे तीन भागों में बॉटा गया है -



  1. सर्फेस वेब (Surface Web)

  2. डीप वेब (Deep Web)

  3. डार्क वेब (Dark Web)


क्‍या है सर्फेस वेब (Surface Web)



सर्फेस वेब (Surface Web) इंटरनेट का वह भाग है जिसे आप आमतौर पर इस्‍तेमाल करते हैं इसके लिये आपको किसी special permission की अावश्‍यकता नहीं हाेती है, इन वेेबपेज पर पहुॅचने के लिये आप search engine का सहारा लेते हैं इस दूसरे तरीके से देखें तो सर्फेस वेब (Surface Web) को Google और Bing जैसे search engine इंडेक्स करते हैं और आपके द्वारा कोई भी क्‍वेरी सर्च करने पर Result के तौर पर दर्शाते हैं और ज्‍यादातर लोग इन्‍हीं सर्च इंजन का प्रयोग कर सर्फेस वेब (Surface Web) की इन वेबसाइट पर पहुॅचते हैैं, लेकिन उन पेज का क्‍या जो Google और Bing जैसे Search Engine इंडेक्स नहीं करते हैं वही होता है डीप वेब (Deep Web) और डार्क वेब (Dark Web) चलिये समझने की काेशिश करते हैं

क्‍या है डीप वेब (Deep Web)


क्‍या आप किसी के बैंक खाते की जानकारी को इंटरनेट पर सर्च करते हैं या आप किसी वेेेबसाइट का एडिमिन पैनल देख्‍ा सकते है, क्‍या ईमेल को गूगल पर सर्च किया जा सकता है या फिर ब्‍लॉगर या वर्डप्रेस की ड्राफ्ट पोस्‍ट को इंटरनेट पर सर्च किया जा सकता है ? तो इसका सीधा जबाब होगा नहीं, इसके लिये आपको उस पेज के एडमिन की परमीशन की आवश्‍यता होगी साथ ही आपको Access करने के लिए password का पता होना भी जरूरी है तभी आप उस जानकारी को Access कर पायेगें यानि डीप वेब (Deep Web) के अन्‍तर्गत internet के वे सभी Web Pages आते हैं, जिन्‍हे Search Engine में सर्च नहीं कर पाते हैं लेकिन ये लीगल होते हैं, डीप वेब (Deep Web) को Invisible Web के नाम से भी जाना जाता है, इसमें अन्‍तर्गत जो पेज आते हैं वह हैं ब्लॉग प्लेटफार्म, ड्राफ्ट पेज, साइंटिफिक रिसर्च, एकेडमिक और कॉर्पोरेट डाटाबेस, गवर्नमेंट पब्लिकेशन्स, इलेक्ट्रॉनिक बुक्स, ईमेल, डिरेक्टरी आदि



क्‍या है डार्क वेब (Dark Web)


कुछ सालाें पहले डीप वेब (Deep Web) अाैर डार्क वेब (Dark Web) काे एक ही माना जाता था लेकिन गैर कानूनी गतिविधियों वजह से इसे दो हिस्‍सों डीप वेब (Deep Web) अाैर डार्क वेब (Dark Web) में विभाजित कर दिया गया डार्क वेब (Dark Web) डीप वेब (Deep Web) का ही हिस्‍सा है, इसका प्रयोग इंटरनेट पर सभी प्रकार के गैर कानूनी काम करने के लिये किया जाता है जैसे ड्रग्स खरीदना व बेचना, किसी भी तरह का ख़तरनाक से ख़तरनाक हथियार खरीदना व बेचना, मानव तस्करी, ATM Debit/Credit Card की जानकारी चुराकर किसी को बेचना आदि, डार्क वेब (Dark Web) पेज पर आम तरीकों से नहीं पहुॅचा जा सकता है, यहां पहुुॅुचने के लिये लोग एक अलग ब्राउजर का इस्‍तेमाल करते हैं, जिसे टॉर कहते हैं, TOR एन्क्रिप्शन टूल से डार्क वेब (Dark Web) पेज को एनक्रिप्ट किया जाता है ये साइट छुप जाती है, सर्च इंंजन इसे इंडेक्स नहीं पाते और यह सिर्फ टॉर ब्राउजर पर ही दिखती हैं


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क्या है टॉर ब्राउजर - What is Tor browser in Hindi

हमने ब्‍लू व्‍हेल गेम और डार्क वेब (Dark Web) की जानकारी में टॉर (TOR) के बारे में उल्‍लेख किया था, इसमें हमने बताया था कि कैसे लोग डार्क वेब (Dark Web) में अपनी पहचान छुपाने के लिये टॉर (TOR) का इस्‍तेमाल करते हैं तो आईये जानते हैं आखिर क्या है टॉर - What is TOR in Hindi

क्या है टॉर ब्राउजर - What is Tor browser in Hindi


क्‍या है टॉर - What is TOR


टॉर (TOR) द ऑनियन रूटर इंटरनेट का एक प्रकार है, इसमें एक खास किस्म फ़ायरफॉक्स ब्राउज़र की सहायता से इंटरनेट पर बिना ट्रैक हुए अनॉनिमस (अपनी पहचान छिपाकर) ब्राउज़ किया जाता है, टॉर (TOR) को अमरीकी नेवी रिसर्च लैब ने बनाया था

इंटरनेट पर आपकी पहचान क्‍या होती है ?


असल में जब आप अपने फोन या कम्‍प्‍यूटर को इंटरनेट से जोडते हैं तो आपके डिवाइस को इंटरनेट पर पहचाने के लिये एक खास कोड दिया जाता है, जिससे आपकी लोकेशन और नेटवर्क का पता चलता है। इस कोड को आईपी एड्रेस (IP address) या इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस (Internet Protocol Address) कहते हैं।


टॉर क्‍या काम करता है


किसी साइट को खोलने पर जो डिजिटल चिह्न, जिन्‍हें आप कुकी कहते हैं उन्हें समझ पाना इतना कठिन बना देता है, यानि यह उन्‍हें इन्स्क्रिप्ट कर देता है जिससे उन्‍हें इंटरनेट पर ट्रैक नहीं किया जा सकता है और टॉप पर खुलने वाली साइट .COM के बजाय .Onion में ओपन होती है .Onion टॉप लेबल डोनेम का एक प्रकार है जिसका प्रयोग Anonymous Hidden Service देने के किया जाता है, इस प्रकार की वेबसाइट केवल टॉर ब्राउजर पर ही ओपन होती हैं कोई सर्च इंजन जैसे गूगल और बिंंग इन्‍हें इंडेक्स नहीं कर पाता है और Tor browser के नेटवर्क से connect होने के बाद ही आपकी असली पहचान आईपी एड्रेस (IP address) को छुपता है


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प्रोग्रामिंग भाषा अनुवादक क्‍या है - What Is Programming Language Translator in Hindi


प्रोग्रामिंग भाषा अनुवादक ( Programming Language Translator ) ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जो प्रोग्रमिंंग भाषाओं में लिखे गये प्रोग्रामों का अनुवाद बिना कोड को बदले कंप्‍यूटर की मशीनी भाषा ( Machine language ) में करते हैं आईये प्रोग्रामिंग भाषा अनुवादक ( Programming Language Translator ) बारे में और जानते हैं -



प्रोग्रामिंग भाषा अनुवादक क्‍या है - What Is Programming Language Translator in Hindi



सबसे पहले समझते हैं मशीनी भाषा (Machine language )किसे कहते हैंं




मशीनी भाषा ( Machine language ) वह भाषा होती है जिसमें केवल 0 और 1 दो अंको का प्रयोग होता है यह कंप्‍यूटर की आधारभूूत भाषा होती है जिसे कंप्‍यूटर सीधे सीधे समझ लेता है, मशीनी भाषा बायनरी कोड में लिखी जाती है जिसके केवल दो अंक होते हैं 0 और 1 चूंकि कम्प्यूटर मात्र बाइनरी संकेत अर्थात 0 और 1 को ही समझता है और कंप्‍यूटर का सर्किट यानी परिपथ इन बायनरी कोड को पहचान लेता है और इसे विधुत संकेतो ( Electrical signals ) मे परिवर्तित कर लेता है इसमें 0 का मतलब low या Off है और 1 का मतलब High या On


भाषा अनुवादक ( Language Translator ) की जरूरत क्‍यों होती है


मशीनी भाषा ( Machine language ) के अतिरिक्‍त सभी प्रोग्रामिंग भाषा ( Programming Language ) में 0 और 1 के अलावा अन्‍य अंकाेें और शब्‍दोंं का प्रयोग होता है लेकिन कंप्‍यूटर सीधे इस पढ नहीं पाता है,  लेकिन भाषा अनुवादक ( Language Translator ) इन अंकों और शब्‍दों को मशीनी भाषा अथवा बायनरी अंकों में बदल देता है ताकि कंप्‍यूटर इस आसानी से पढ सके और प्रोग्राम के अनुसार काम कर सके 

प्रोग्राम अनुवादक के प्रकार ( Types of Program Translators )


प्रोग्रामिंग भाषा अनुवादक ( Programming Language Translator ) तीन प्रकार के होते हैं -


  1. असेम्बलर ( Assembler )

  2. कम्पाइलर (Compiler)

  3. इन्टरप्रेटर


सीधेे सीधे मशीनी भाषा में प्रोग्राम क्‍यों नहीं लिखे जाते हैं


चूंकि मशीनी भाषा में किसी भी प्रोग्राम को लिखना बहुत कठिन है, अगर आपको मशीनी भाषा में यानि बायनरी में लिखना हो - I LOVE MYBIGGUIDE.COM

तो आपको यह मशीनी भाषा ( Machine language ) में कुछ ऐसा लिखना होगा -

01001001 00100000 01001100 01001111 01010110 01000101 00100000 01001101 01011001 01000010 01001001 01000111 01000111 01010101 01001001 01000100 01000101 00101110 01000011 01001111 01001101


आशा है आप समझ गये होगें :)


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Wednesday, 20 December 2017

Who owns the INTERNET ? इंटरनेट का मालिक कौन ?

अगर आप अपने फोन में आज INTERNET इस्‍तेमाल कर रहे होगें तो आप मन में कभी ना कभी यह सवाल तो आया होगा कि INTERNET का मालिक कौन है, लेकिन बहुत से INTERNET यूजर अपने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) को ही इंटरनेट का मालिक समझते हैं जैसे वह अगर जियाे को इंटरनेट इस्‍तेमाल कर रहे हैं तो उनके लिये रिलायंस जिओ ही इंटरनेट का मालिक है लेकिन ऐसा नहीं हैं इस पोस्‍ट में हम जानने की कोशिश करेंगे कि कौन है इंटरनेट का मालिक Who owns the INTERNET ?

इंटरनेट का मालिक कौन ? Who owns the INTERNET ?




इंटरनेट कब शुरू हुुुुआ ?




1969 में अमेरिका के रक्षा विभाग में एडवांस रिसर्च प्रोजेक्‍ट एजेंसी (ए0आर0पी0ए0) नाम का नेटवर्क लांच किया गया, जो युद्ध के समय एक दूसरे को गोपनीय सूचना भेजने के प्रयोग में लाया गया। 1972 में रेटॉमलिसंन ने पहला ईमेल संदेश भेजा और जैसे जैसे ईमेल के जरिये सूचना भेजने के फायदों का पता चलता गया इसका प्रयोग भी बढता गया और इस तरह यह नेटवर्क लोकप्रिय हो गया।

इंटरनेट क्‍या है ?


इंटरनेट एक प्रकार का नेटवर्क है जो दो या दो से अधिक कंप्‍यूटरों को एक दूसरे से कनेक्‍ट करता है, जिसकी सहायता से आप कोई भी सूचना एक कंप्‍यूटर से दूसरे कंप्‍यूटर तक कुछ ही सेकेण्‍ड में पहुॅचा सकते हैं, इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटर क्लाइंट और सर्वरों का इस्तेमाल कर दुनिया भर में एक दूसरे को Data Tranfer करते है। आज केवल भारत में ही 1 करोड से ज्‍यादा व्‍‍यक्ति इन्‍टरनेट से प्रयोग करते हैं।



इंटरनेट आप तक कैसे पहुॅचता है ?


पूरी दुनिया में तेज गति से इंटरनेट पहुॅचाने के लिये फाइबर ऑप्टिक केबल का इस्‍तेमाल किया जाता है, जो समुद्र के नीचे बिछाई जाती है, इन्‍हीं फाइबर ऑप्टिक केबल की सहायता से पूरी दुनिया में इंंटरनेट पहुॅचाया जाता है

फाइबर ऑप्टिक केबल ही क्‍यों ?


फाइबर ऑप्टिक केबल की डेटा ट्रान्सफर स्पीड भी बाकी केबल्स से अधिक होती है, उसका कारण्‍ा है कि फाइबर ऑप्टिक केबल को छोडकर और सभी केबल में डाटा का संचार इलेक्ट्रिक करंट के रूप में किया जाता है लेकिन फाइबर ऑप्टिक केबल में डाटा ट्रांसमिशन् इलेक्ट्रिक करंट के रूप में नहीं बल्कि प्रकाश के रूप में किया जाता है और फाइबर ऑप्टिक केबल के कारण ही 1 सेकेण्‍ड से कम समय में आप Google.com ओपन कर पाते हैं जबकि उसका सर्वर अमेरिका में है आपको जानकार आश्‍चर्य होगा कि इंटरनेट के लिये समुद्र में 8 लाख किलोमीटर से ज्‍यादा लम्‍बाई के फाइबर ऑप्टिक केबल बिछाये गये हैं

इंटरनेट आप तक कौन पहुॅॅॅचाता है ?


जैसा कि हमने बताया है फाइबर ऑप्टिक केबल द्वारा आप तक इंटरनेट पहुॅचाया जाता है लेकिन आप तो जीयो, आयडिया या एयरटेल का इंंटरनेट इस्‍तेमाल करते हैं या कुुुछ लोग अपने शहर से लोकल इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) से इंटरनेट कनेक्‍शन लेते हैं, चलिये समझते हैं, इन तीनों लोगों की वजह से ही इंटरनेट आप तक पहुॅचा तो इसी आधार पर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है -


  • TEAR 1 - वह इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) हैं जिन्‍होंने समुद्र में फाइबर ऑप्टिक केबल बिछाये हैं, इन्‍हें Tier 1 networks के नाम से जाना जाता है, इसमें भारत की कंम्‍पनी Tata Communications भी शामिल है

  • TEAR 2 - वह इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) हैं जो Tier 1 Networks से इंटरनेट सेवा लेते हैं और आप तक पहुॅचाते हैं, जैसे जियो, आयडिया, वोडाफोन आदि

  • TEAR 3 - ये वो इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) है तो TEAR 2 से इंटरनेट सेवा लेते हैं और अपने लोकल ऐरिया में सर्विस देते हैं इनके पास लिमिडेट कनैक्‍शन देने का अधिकार होता है जैसे Tikona


क्‍या इंटरनेट फ्री है ?


जी हॉ इंटरनेट बिलकुल फ्री है, लेकिन जो अापसे चार्ज लिया जाता है वह आप तक उसको लाने में जो खर्चा होता है उसका लिया जाता है अगर इंटरनेट का चार्ज होता है तो आपको Google.com खोलने के अलग पैसे देने होते और mybigguide.com देखने के अलग तो भगवान शुक्र है इंटरनेट फ्री है



कौन है इंटरनेट का मालिक Who owns the INTERNET ?


तो इन सवाल का जबाब साफ है इंटरनेट पर किसी का अधिकार नहीं है यानि इंटरनेट का मालिक कोई नहीं सब एक दूसरे के सहयोग से आप तक इंटरनेट सेवा पहुॅचाते हैं, इसीमें सबका फायदा है

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सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट क्या है - What Is Central Processing unit in hindi

सीपीयू यानि सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) इनपुट डाटा को प्रोसेस करता है इसके लिये सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट और अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट दोनों मिलकर अंकगणितीय गणना (Arithmetic Calculation) और तार्किक गणना करते हैैं और डाटा को प्रोसेस करते हैं CPU को कंप्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता है आईये जानते हैं सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) क्‍या है -


सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट क्या है - What Is Central Processing Unit in Hindi


कंप्‍यूटर की संरचना (Computer Architecture) में सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit)  केेन्‍द्र में रहता है इनपुट यूनिट (Input unit) द्वारा डाटा और निर्देशों को कंप्‍यूटर में एंटर किया जाता है और इसके बाद सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) डाटा को प्रोसेस करता है और आपको आउटपुट देता है, डाटा को प्रोसेेस करनेे में यह अपने दो भागोंं की मदद लेता है अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) और कंट्रोल यूनिट (Control Unit)

अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit )


अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) अंकगणितीय गणना (Arithmetic Calculation) और तार्किक गणना (Logical calculation) का काम करता है, जैसे जोड़, घटाव, गुणा, भाग और <, >, =, हाँ या ना

कंट्रोल यूनिट (Control Unit)


कंट्रोल यूनिट (Control Unit) कंप्‍यूटर में हो रहे सारे कार्यो नियंत्रित करता है और इनपुट, आउटपुट डिवाइसेज, और अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) के सारे गतिविधियों के बीच तालमेल बैठाता है।


प्रोसेसर में कोर क्‍या है - What Is Core In Processor


कोर (Core) सीपीयू यानि प्रोसेसर के अंदर लगी एक गणना (computation) करने वाली यूनिट या चिप होती है, एक कोर वाले को Single Core Processor कहते हैं प्रोसेसर की शक्ति गीगाहर्टज (GHz) पर निर्भर करती है, यानि जो प्रोससेर जितने ज्‍यादा गीगाहर्टज (GHz) का होगा उतनी ही तेजी से गणना करेगा। अब फिर सेे बात करते हैंं कोर की डुअल-कोर, क्वाड-कोर, ऑक्टा-कोर क्‍या हैं ?



Single Core Processor ज्‍यादा बोझ पडते ही हैंग होने लगता था, इसलिये इसकी क्षमता बढाने के लिये प्रोसेसर में अतिरिक्‍त कोर (Core) लगाये जाते हैं, इनकी संख्‍या के आधार पर ही प्रोसेसर के नाम पडें आईये जानते हैं -


  1. दो कोर मतलब -  Dual Core Processor

  2. चार कोर मतलब - Quad Core Processor

  3. छह कोर मतलब - Hexa Core Processor

  4. आठ कोर मतलब - Octo Core Processor

  5. दस कोर मतलब - Deca Core Processor


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नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है - What is Network Topology in Hindi

टोपोलॉजी (Topology)- नेटवर्क (Network) कंप्यूटर, सर्वर, मेनफ्रेम, नेटवर्क डिवाइस या अन्‍‍‍य ऐसी डिवाइस जो एक दूसरे से डाटा शेयर करती है उनका आपस का कनेक्‍शन चाहे वह वायरलैस हो या केबल द्वारा नेटवर्क (Network) कहलाता है और यह नेटवर्क (Network) किस तरह का है यानि इसकी आकृति, ले-आउट या संरचना किस प्रकार की है इसे टोपोलॉजी (Topology) और ये दोनोंं शब्‍‍‍द मिलकर ही बनते हैं नेटवर्क टोपोलॉजी (Network topology) तो आईये जानते हैैं नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है - What is Network Topology in Hindi

नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है - What is Network Topology in Hindi




नेटवर्क टोपोलॉजी (Network topology) 4 प्रकार की होती है:-



  • रिंग नेटवर्क टोपोलॉजी (Ring Network Topology)

  • बस नेटवर्क टोपोलॉजी (Bus Network Topology)

  • स्टार नेटवर्क टोपोलॉजी (Star Network Topology)

  • मेश नेटवर्क टोपोलॉजी (Mesh Network Topology)


रिंग नेटवर्क टोपोलॉजी (Ring Network Topology)



  

रिंग नेटवर्क टोपोलॉजी (Ring Network Topology) में सभी कंप्‍यूटर एक गोलाकार आकृति में अपने अधीनस्थ (Subordinate) कम्प्यूटर से जुड़े होते हैंं, इसमें कोई होस्ट (Host) या कंट्रोलिंग कम्प्यूटर (Controlling Computer) नही होता है, इसमें कोई भी कंप्‍यूटर किसी दूसरे कंप्‍यूटर पर निर्भर नहीं होता है, रिंग नेटवर्क (Ring Network) में साधारण गति से डाटा का आदान-प्रदान होता है

बस नेटवर्क टोपोलॉजी (Bus Network Topology)




बस नेटवर्क टोपोलॉजी (Bus Network Topology) मेंं एक ही केेेबल सेे सभी कंम्‍यूटरों को एक ही क्रम में जोडा जाता है, जोडने के लिये टर्मिनेटर (Terminator) का इस्‍तेमाल किया जाता है, इस नेटवर्क को इंस्‍टॉल करना सरल होता है, लेकिन किसी एक कंप्‍यूटर में खराबी होने पर पूरा नेटवर्क काम करना बंद कर देता है

स्टार नेटवर्क टोपोलॉजी (Star Network Topology)





स्टार नेटवर्क टोपोलॉजी (Star Network Topology) मेंं एक हब से ही सारे कंप्‍यूूटरों को जोडा जाता है, इस नेटवर्क में एक होस्ट कम्प्यूटर होता है, जिससेे बाकी सभी कंप्‍यूटरों कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन अगर हब में कोई खराबी आती है तो सारा नेटवर्क बेकार हो जाता है, लेकिन अगर कोई लोकल कम्प्यूटर ख़राब होता है तो शेष नेटवर्क इससे प्रभावित नही होता है

मेश नेटवर्क टोपोलॉजी (Mesh Network Topology)





मेश नेटवर्क टोपोलॉजी (Mesh Network Topology) में सारे कंप्यूटर कही न कही एक दूसरे से जुड़े रहते हैं और एक दूसरे से जुड़े होने के कारण ये अपनी सूचनाओ का आदान प्रदान आसानी से कर सकते हैं, इसमें कोई होस्ट कंप्यूटर नहीं होता है, अगर किसी भी कंप्यूटर मेश कोई खराबी आती है तो भी यह नेटवर्क काम करता रहता है टोपोलॉजी को मेश नेटवर्क (Mesh Network) या मेश भी कहा जाता है
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Monday, 18 December 2017

USB क्या है? USB के types और versions

USB यानी Universal Serial Bus के बारे में तो आप जानते ही होंगे यह 90 के दशक के बहुत ही इनोवेटिव आईडियास में से एक है इसको intel, microsoft, compact, nortel और भी बहुत सारी कंपनियों ने मिलकर बनाया था। इसको बनाने का श्रेय intel के चीफ क्लाइंट प्लेटफार्म आर्किटेक्ट mr. अजय भट्ट को जाता है जिनकी वजह से यह आईडिया आज reality में कन्वर्ट हो पाया। तो आईये जानते हैं USB क्या है? USB के types और versions के बारे में-


What is USB and their Types in Hindi



USB एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसकी मदद से हम पॉवर को या डाटा को आसानी से एक device से दुसरे device में भेज पाते है अगर आप कंप्यूटर use हैं तो आपने इसका इस्तेमाल किया ही होगा। इस टेक्नोलॉजी की मदद से लगभग हर device को जिनमे डाटा या पॉवर रहती है को एक दुसरे से कनेक्ट किया जा सकता है। USB की मदद से ही हम अपने smartphone को चार्ज कर पाते है इसी की मदद से हम अपने मोबाइल और कंप्यूटर को कनेक्ट भी कर पाते है।चलिए जानतेहै USB की कुछबातें जो कम लोगो को ही पता है।


USB का इतिहास । History of USB


USB को सबसे पहले सन 1996 में लांच किया गया था जिसके बाद से USB के लगभग 5 version आ चुके है आइये जानते है इनके बारे में।

USB 1.0


यह USB का सबसे पहला version है इसे 1996 में लांच किया था इसकी स्पीड लगभग 1.5Mbit/s थी उस समय इतने ज्यादा devices उपलब्ध नहीं थे और लोग फ्लॉपी ड्राइव का इस्तेमाल करते थे इसलिए लोगो ने इसको इतना ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया।

USB 1.1



इसको USB 1.0 के दो साल बाद यानी 1998 में बाज़ार में उतारा यह USB 1.0 से कई मामलो में बहुत आगे था इसके जरिये 12MBit/s की स्पीड तक डाटा ट्रान्सफर क्या जासकता था। इसमें एक और नया फीचर भी था जिसके जरिये होस्ट से पेरिफेरल में2.5V और 500mA का पॉवर भी supply किया जा सकता था।

USB 2.0


USB 2.0 को सन 2000 में लांच किया गया था।यह USB का बहुत ही सफल version माना जाता है क्यूंकि इसी को सबसे ज्यादा devices में use किया गया है और आज भी ज्यादातर devices में यही देखने को मिलता है। इसकी डाटा स्पीड 480 MBit/s है और इससे 2.5V और 1.8 A का होस्ट से पेरिफेरल मेंpower भी supply कर सकते है।

USB 3.0


USB 3.0 को 2008 में लांच किया गया था इसमें USB 2.0 से बहुत ज्यादा बदलाब तो नहीं देखने को मिलते है लेकिन इसकी डाटा ट्रान्सफर स्पीड 5Gbit/s है जो की USB 2.0 से बहुत ज्यादा है।

USB 3.1


यह USB 3.0 का ही एक इम्प्रूव version है इसको 2013 में लांच किया गया था इसके द्वारा 20V और 5A तक power supply कर सकते है इसमें power ko bi-directional supply कर सकते है साथ ही साथ इसमें डाटा ट्रान्सफर की स्पीड भी 10Gbit/s है जो USB 3.0 से लगभग दोगुनी है।

USB के types


USB के तीन प्रकार होते है जिनमे सब की अपनी अपनी खासिय है USB types USB version से बिलकुल इंडिपेंडेंट है मतलब की USB का type मतलब USB का कनेक्टर।

USB type A


 


USB type A USB का सबसे ज्यादा use होने वाला कनेक्टर है यह हर कंप्यूटर या लैपटॉप में देखनेको मिल जाएगा यह रेक्टंगुलर शेप में होता है और साइज़ में बड़ा होता है इसे आप अपनी चार्जिंग केबल में अपने pendrive में या अपने कंप्यूटर में देख सकते है। इसका एक मिनी version भी होता है जिसकोप्रिंटर्स और कैमरा में use किया जाता है यह स्टैण्डर्ड version से साइज़ में छोटा होता है।

USB type B


   


USB type B बहुत कम इस्तेमाल किया जाता है इसे प्रिंटर्स, मॉडेम या स्कैनर में use किया जाता था। लेकिन इसका एक माइक्रो version भी उपलब्ध है जो काफी ज्यादा use होता है यह साइज़ में छोटा होता है इसीलिए हमारे मोबाइल फ़ोन में भी चार्जिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

USB type C


 


USB का यह कनेक्टर बहुत ही इनोवेटिव है यह साइज़ में छोटा होता है लेकिन इसको कुछ इस तरह डिजाईन किया गया है की इसको आसानी से इस्तेमाल कर सके साथ ही साथ इसमें reverse plug orientation टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल किया गया है जिसकी मदद से हम इसे उल्टा और सीधा दोनों प्रकार से इस्तेमाल कर पाते है।

USB के बारे में कुछ facts



  • USB को या उसके logo को अपने device पर use करने वाली हर कंपनी को इसे इस्तेमाल करने के लिए रॉयल्टी फीस देनी पड़ती है।

  • कंप्यूटर में सबसे ज्यादा USB पोर्ट को ही इस्तेमाल किया जाता है।

  • USB 3.0 के पोर्ट का color नीला होता है जिससे इसे आसानी से पहचाना जा सकता है।

  • USB टेक्नोलॉजी को आजकल चलने वाला लगभग हर operating system सपोर्ट करता है।


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Monday, 28 August 2017

कंप्यूटर क्विज

1.OCR का विस्तृत रूप क्या है?

1)  Optical Character Recognition

2)   Optical CPU Recognition

3)   Optimal Character Rendering

4)   Other Character Restoration

5) इनमें से कोई नहीं

2.यदि एक नया डिवाइस को कंप्यूटर के साथ जोड़ा जाता है जैसे प्रिंटर या स्कैनर तो डिवाइस के प्रयोग किये जाने के पहले उसका ____इनस्टॉल करना जरुरी होता है|

1)बफर
2) ड्राईवर
3) पेजर
4) सर्वर
5) इनमें से कोई नहीं

3.सॉफ्टवेयर जो यूजर को इंटरनेट सर्फ करने की अनुमति देता है उसे ____कहते हैं|

1) सर्च इंजन

2) इंटरनेट सेवा प्रदाता (आईएसपी)

3) मल्टीमीडिया आवेदन

4) ब्राउज़र

5)इनमें से कोई नहीं

4.एक्सेल में _______ में एक या अधिक वर्कशीट होती हैं|

1) टेम्पलेट
2) वर्कबुक
3) सक्रिय सेल

4) लेबल
5) इनमें से कोई नहीं

5.निम्न में से कौन मल्टीमीडिया वेब पेजों, वेबसाइटों, और वेब आधारित एप्लीकेशन के विकास के लिए एक लोकप्रिय प्रोग्रामिंग भाषा है?

1) COBOL
2) Java
3) BASIC

4) Assembler
5) इनमें से कोई नहीं

6.वेब साईट के पहले पेज को ____कहते हैं|

1) होम पेज
2) इंडेक्स

3) जावा स्क्रिप्ट
4) बुक मार्क

5) इनमें से कोई नहीं

7.एक वेब पेज में एक वर्ड जिसके क्लिक करने पर एक अन्य डॉक्यूमेंट खुलता है उसे ____कहते हैं|

1) एंकर
2)यूआरएल
3) हाइपरलिंक
4) रिफरेन्स
5) इनमें से कोई नहीं

  1. वर्ड प्रोसेसिंग प्रोग्राम द्वारा किस प्रकार की फ़ाइल बनाई जाती है?


1) डाटाबेस फाइल
2) स्टोरेज फाइल

3) वर्कशीट फाइल
4) डॉक्यूमेंट फाइल

5) ग्राफिकल फाइल

9.डिफ़ॉल्ट रूप से आपके डॉक्यूमेंट _____मोड में मुद्रित होते हैं|

1) लैंडस्केप
2) पोर्ट्रेट
3) पृष्ठ सेटअप

4) मुद्रण दृश्य
5) इनमें से कोई नहीं

10.कंट्रोल, शिफ्ट और ऑल्ट ______की हैं|

1) एडजस्टमेंट
2) फंक्शन
3) मोडीफायर

4) अल्फानुमेरिक
5) इनमें से कोई नहीं

उत्तर

1-1

2-2

3-4

4-2

5-2

6-1

7-3

8-4

9-2

10-3

Sunday, 27 August 2017

कंप्यूटर क्विज फॉर आई.बी.पी.एस क्लर्क परीक्षा

1. Extension name of flash file is ___.1) .pdf
2) .swf
3) .pmd
4) .prd
5) इनमें से कोई नहीं  

2. Who invented world wide web?
1) Mosaic corporation
2) Opera corporation
3) Tim berner lee
4) Vint cert
5) इनमें से कोई नहीं  

3. URL stands for ____.
1) Uniform Resource Locator
2) Universal resource locator
3) Address bar
4) All 1, 2 & 3 are correct
5) इनमें से कोई नहीं  

4. A thing present in real world in physical form is called____.
1) DBMS
2) Entity
3) Modulation
4) Keywords
5) इनमें से कोई नहीं  

5. BUG is -
1) To find error in any software testing
2) To find error in any software code
3) logical error of any program
4) both 1 & 2
5) इनमें से कोई नहीं  

6. Which of the following is not a type of key?
1) Alphabetic Keys
2) Numeric keys
3) Function keys
4) Toggle keys
5) इनमें से कोई नहीं  

7. If a previously saved file is edited ___?
(1) it cannot be saved again
(2) the changes will automatically be saved in the file
(3) the file will only have to be saved again if it is more than one page in length
(4) its name must be changed
(5) the file must be saved again to store the changes

8. Which of the following converts all the कथन  in a program in a single batch and the resulting collection of instructions is placed in a new file?
(1) Compiler
(2) Interpreter
(3) Converter
(4) Instruction
(5) इनमें से कोई नहीं  

9.A program that generally has more user-friendly interface than a DBMS is called a ____?
(1) front end
(2) repository
(3) back end
(4) form
(5) इनमें से कोई नहीं  

10.When you install new programs on your computer, it is typically added to the ___?
(1) All programs
(2) Select programs
(3) Start programs
(4) Desktop programs
(5) इनमें से कोई नहीं  

11. Which of the following कथन  is FALSE concerning file names?
(1) Files may share the same name or the same extension but not both
(2) Every file in the same folder must have a unique name
(3) File extension is another name for file type
(4) The file extension comes before the dot (.) followed by the file name
(5) इनमें से कोई नहीं  

12. Which of the following is the key function of a firewall?
(1) Monitoring
(2) Deleting
(3) Record
(4) Copying
(5) Moving

13. Programming language built into user programs such as Word and Excel are known as____?
(1) 4GLs
(2) macro languages
(3) object-oriented languages
(4) visual programming languages
(5) इनमें से कोई नहीं  

14. In MS Word Key F12 opens ____?
(1) Save dialog box
(2) print dialog box
(3) New dialog box
(4) Save as dialog
(5) none

15. What is gutter margin?
(1) Margin that is added to the left margin when printing
(2) Margin that is added to right margin when printing
(3) Margin that is added to the binding side of page when printing
(4) Margin that is added to the outside of the page when printing
(5) इनमें से कोई नहीं  

ANSWERS
1. 2
2. 3
3. 1
4. 2
5. 3
6. 5
7. 5
8. 1
9. 1
10. 1
11.  4
12. 1
13. 4
14. 4
15. 3

Saturday, 26 August 2017

कंप्यूटर क्विज फॉर आई.बी.पी.एस क्लर्क परीक्षा


  1. TCPका पूरा नाम क्या है:


(1) Transmission Control Protocol

(2) Total Control Protocol

(3) Transmission Control Program

(4) Totaling Control Program

(5) इनमें से कोई नहीं

 

  1. __एक समान्य एड्रेस देता है और पूरे इन्टरनेट पर डाटा के पैकेट के अनुसार चलता है?


(1) आई.पी

(2) टी.सी.पी

(3) यू.डी.पी

(4) ए.एल.यू

(5) इनमें से कोई नहीं

  1. साइबरस्पेस, ____ नामक कानून एवं विनिमयन प्रणाली द्वारा नियंत्रित किया जाता है|


(1) सिविल कानून

(2) आपराधिक कानून

(3) इलेक्ट्रॉनिक कानून

(4) साइबर कानून

(5) साइबर प्राधिकरण

  1. टेक्स्ट लाइन के आरम्भ में जाने के लिए किस बटन का प्रयोग करते हैं?


(1) होम

(2) कंट्रोल (Ctrl)

(3) स्पेस

(4) इंटर

(5) इनमें से कोई नहीं

  1. फॉण्ट और स्टाइल बदलने के लिए किस मेन्यू पर जाते हैं?


(1) टूल्स

(2) फाइल

(3) फॉर्मेट

(4) एडिट

(5) इनमें से कोई नहीं

  1. कम्प्यूटर को शुरू करना और कार्यान्वयन हेतु ऑपरेटिंग सिस्टम लोड करना, क्या कहलाता है?


(1) इनीश्लाइजेशन

(2) रिट्राइविंग

(3)लोडिंग

(4) सर्चिंग

(5) बूटिंग

  1. प्राथमिक मेमोरी का प्रयोग किसके द्वारा किया जाता है?


(1) प्रयोक्ता

(2) इनपुट उपकरण

(3) सी.पी.यू

(4) उपरोक्त सभी

(5) इनमें से कोई नहीं

  1. एक डिस्क में,एक डाटा का प्रत्येक खंड किसमें लिखा जाता है?


(1) एक सेक्टर

(2) तीन सेक्टर

(3) दो सेक्टर

(4) दो अथवा अधिक सेक्टर

(5) दो अथवा तीन सेक्टर

  1. पेंटियम प्रोसेसर में क्या शामिल है-


(1) 10 के गुणांक में हज़ार ट्रांजिस्टर

(2) सौ हज़ार  ट्रांजिस्टर

(3) हजारों  ट्रांजिस्टर

(4) कई मिलियन ट्रांजिस्टर

(5) सौ ट्रांजिस्टर

  1. आज हम __ को इन्टरनेट के अग्रदूत के रूप में जानते हैं?


(1) आरपानेट (ARPANET)

(2) यूजनेट (USENET)

(3) टेलनेट (TELNET)

(4) डी.बी.एम्.एस (DBMS)

(5) इनमें से कोई नहीं

  1. निम्नलिखित में से क्या एक ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं है?


(1) डी. ओ.एस

(2) ओर्कल

(3) लीनक्स

(4) विन्डोज़

(5) इनमें से कोई नहीं

  1. वर्ड में आप पूरे शब्द को हटाने के लिए बटन का किस संयोजन का प्रयोग करेंगे?


(1) Ctrl + del

(2) Alt + del

(3) Shift + Backspace

(4) Shift + Alt + del

(5) इनमें से कोई नहीं

  1. हार्डवेयर जो दो संख्याएं जोड़ता है:


(1) कंट्रोल यूनिट

(2) इंटरनल सी.पी.यू

(3) ए.एल.यू

(4) बराउज़र

(5) इनमें से कोई नहीं

  1. तीव्र गति से आई.डी एक्सेस के लिए कुछ मेमोरी की आवश्यकता होती है जिसे ___ कहते हैं?


(1) रजिस्टर

(2) कैच

(3) रैम (RAM)

(4) रोम (ROM)

(5) इनमें से कोई नहीं

  1. एक बाईट निम्नलिखित में से किस समूह को प्रस्तुत करता है?


(1) 10 बिट्स                          (2) 40 बिट्स

(3) 16 बिट्स                    (4) 18 बिट्स

(5) 8 बिट्स

उत्तर :












































1


165112

2


173125

3


28413

3


419414

2


5310115

5


Saturday, 11 March 2017

Computer Awareness Questions for SBI PO 2017

Q1. DBMS का पूर्ण रूप क्या है?
(a) Data Management System
(b) Database Management System
(c) Database Management Server
(d) Database Maintenance Server
(e) Data Management Server

Q2. निम्नलिखित में से कौन सा आरेख ग्राफ़िकली एक डेटाबेस में एंटिटी के बीच एक इंटर-रिलेशनशिप का प्रतिनिधित्व करता है?
(a) एंटिटी - रिलेशनशिप डायग्राम
(b) डाटा फ्लो डायग्राम
(c) कण्ट्रोल फ्लो डायग्राम
(d) सीक्वेंस डायग्राम
(e) इनमें से कोई नहीं

Q3. निम्नलिखित में से कौन सी कुंजी एक तालिका में एक फ़ील्ड है, जो किसी अन्य तालिका में एक प्राथमिक कीय फ़ील्ड के रूप में प्रयोग की जाती है?
(a) प्राइमरी कीय
(b) फॉरेन कीय
(c) कैंडिडेट कीय
(d) आइडेंटिटी कीय
(e) इनमें से कोई नहीं


Q4. एक डेटाबेस तालिका के दो या दो से अधिक फ़ील्ड को क्या कहा जाता है जब वे प्राथमिक कुंजी को निर्दिष्ट करने के लिए सामूहिक रूप से उपयोग किये जाते हैं?

(a) कम्पोजिट कीय
(b) प्राइमरी कीय
(c) फॉरेन कीय
(d) कैंडिडेट कीय
(e) आइडेंटिटी कीय

Q5. एक डेटाबेस तालिका में दो फ़ील्ड या कॉलम होते हैं जिसे प्राथमिक कुंजी के रूप में चुना जा सकता है. प्रथम फ़ील्ड या कॉलम हमेशा प्राथमिक कुंजी के रूप में माना जाता है, और दूसरे फ़ील्ड या कॉलम को ________ कहा जाता है.
(a) प्राइमरी कीय
(b) कैंडिडेट कीय
(c) कम्पोजिट कीय
(d) फॉरेन कीय
(e) आइडेंटिटी कीय

Q6. निम्नलिखित में से क्या DBMS में एक सामान्य फॉर्म नहीं है?
(a) First Normal Form (1NF)
(b) Second Normal Form (2NF)
(c) Third Normal Form (3NF)
(d) Ninth Normal For (9NF)
(e) Boyce-Codd Normal Form (BCNF)

Q7. निम्नलिखित में से क्या एक इंटरप्रेटर के उपयोग के विषय में सही वर्णन करता है?      
(a) छोटे प्रक्रियाओं का अधिक छोटी प्रक्रियाओं में परिवर्तित करता है
(b) हाई लेवल लैंग्वेज को लो लेवल लैंग्वेज में परिवर्तित करता है
(c) लो लेवल लैंग्वेज को हाई लेवल लैंग्वेज में परिवर्तित करता है
(d) कर्नेल और शेल कम्युनिकेशन को प्रबंधित करता है
(e) इनमें से कोई नहीं

Q8. निम्नलिखित में से कौन सा कथन UNIQUE KEY कंस्ट्रेंट्स के विषय में असत्य है?
(a) अद्वितीय कुंजी कॉलम डुप्लिकेट मान स्वीकार नहीं करते हैं.
(b) एक तालिका में केवल एक अद्वितीय कुंजी हो सकती है.
(c) डिफ़ॉल्ट रूप से, अद्वितीय कुंजी कॉलम शून्य मान स्वीकार करते हैं जब तक कि NOT NULL कंस्ट्रेंट्स    निर्दिष्ट नहीं ता है.
(d) कॉलम के समान संयोजनों को अद्वितीय और प्राथमिक कुंजी दोनों नहीं बनाया जा सकता है.
(e) इनमें से कोई नहीं

Q9. निम्नलिखित में से कौन सा हैडिंग एलिमेंट एक HTML डॉक्यूमेंट में सामान्य टेक्स्ट के रूप में समान आकार के साथ टेक्स्ट प्रदर्शित करता है?
(a) <H1>
(b) <H2>
(c) <H3>
(d) <H4>
(e) <H5>

Q10. निम्नलिखित में से कौन सा HTML टैग एक लॉजिकल स्टाइल टैग है?
(a) <B>
(b) <I>
(c) <SMALL>
(d) <ABBR>
(e) इनमें से कोई नहीं

Q11. DDoS का अर्थ है?
(a) Data Denial-of-Service
(b) Distributed Denial-of-Service
(c) Distributed Data of Server
(d) Distribution of Data Service
(e) इनमें से कोई नहीं

Q12. निम्नलिखित में से कौन सा कथन मेसेज-स्विच नेटवर्क के विषय में गलत हैं?
(a) यह ट्रैफिक अतिप्रजन को कम कर देता है.
(b) यह संदेशों को प्राथमिकता देता है.
(c) यह संदेशों के प्रसारण की अनुमति देता है.
(d) यह एक सस्ता नेटवर्क है.
(e) यह वीडियोकॉन्फरेंसिंग के साथ संगत नहीं है.

Q13. क्लाइंट / सर्वर नेटवर्क के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
(a) यह सेट अप करने के लिए महंगा है.
(b) इसके लिए एक विशेष सर्वर की आवश्यकता है
(c) यह एक धीमा नेटवर्क है.
(d) यह बेहद सुरक्षित है.
(e) यह एक संकुल नेटवर्क है.

Q14. ___________ कंप्यूटर के भीतर एक मार्ग जो हार्डवेयर कंपोनेंट्स के बीच डेटा का प्रवाह करता है.
(a) वाहक संकेत
(b) डेटा बस
(c) डिजिटल सिग्नल
(d) एनालॉग संकेत
(e) स्विचिंग

Q15. निम्नलिखित में से क्या सिम्पलेक्स कम्युनिकेशन से संबंधित है
(a) एकल तार और दो तरफा संचार
(b) टेलीविजन
(c) दो-तार संचार
(d) वॉकी टॉकी
(e) इनमें से कोई नहीं

उत्तर 

  1. Ans.(b)


Sol. Database Management System (DBMS) is a software application that can be used to create and maintain databases for various types of organizations. Some widespread DBMS applications are Microsoft SQL Server, Oracle, MySQL and Microsoft Access.

  1. Ans.(a)


Sol. A relationship is an association among entities. We can use the Entity-Relationship Diagram (ERD) to represent an inter-relationship between the entities of a database.

  1. Ans.(b)


Sol. Foreign key is a field in one table that is used as the primary key in another table. Whenever a relationship is created between two tables, a common field acts as the primary key in the first table and the foreign key in the second table.

  1. Ans.(a)


Sol. Composite key is formed when two or more fields of a database table are combined together in order to uniquely identify the records stored in the table.

  1. Ans.(b)


Sol. If a table has more than one field that can be selected as the primary key, the field that is not selected as the primary key is called a candidate key.

  1. Ans.(d)


Sol. In DBMS, the commonly used normal forms are 1NF, 2NF, 3NF and BCNF.

  1. Ans.(b)


Sol. The interpreter is a computer program that helps in executing programs written in high-level languages without the need to compile them first.

  1. Ans.(b)


Sol. Since one table can have at the most one primary key to avoid duplicates in other columns of the table, unique key can be defined. We can make one or more unique keys in a single table.

  1. Ans.(d)


Sol. The text written within the H4 element has the same size as the normal plain text, whereas the text written within the H1, H2 and H3 elements are larger than the normal text. Text written within the H5 and H6 elements has smaller size than the normal text.

  1. Ans.(d)


Sol. In HTML, logical style tags specify that the enclosed text has a specific meaning, context, or usage. The <ABBR> is a logical style tag, which conveys to the Web browser that the text enclosed within this tag is an abbreviation.

  1. Ans.(b)


Sol. Distributed Denial-of-Service (DDoS) attack is a type of attack that is carried out by using multiple computers. These DDoS attacks aim at targeting computer networks of an organisation, such as Digital Subscriber Line (DSL) and cable.

  1. Ans.(d)


Sol. In a message-switched network, a packet containing the entire message is transmitted over the network. It is a more expensive network.

  1. Ans.(c)


Sol. The client/server network contains a centralized server that manages and controls all the other nodes of the network. It is expensive as it requires NOS and a specialized server system. It is highly secure and prossesses good speed. However, it becomes congested when more clients simultaneously request for a service to the server.

  1. Ans.(b)


Sol. A data bus connects internal components to the motherboard and acts as a carrier for the data.

  1. Ans.(b)


Sol. Television is an example of simplex communication.

Saturday, 4 March 2017

Chapter-3 | मैमोरी और प्रोसेसर | From The Computer World

मैमोरी और प्रोसेसर


संचित युक्तिः-
यह कम्प्यूटर के स्थाई तौर तर बहुत अधिक मात्रा में आंकडों को संचित करने की अनुमति प्रदान करता है। उदाहरण डिस्क ड्राइव टेप ड्राइव।

सेकेंडरी मेमोरीः- यह एक स्थाई संग्रहण युक्ति है। इसमें संग्रहित डेटा तथा प्राग्राम्स कम्प्यूटर के आॅफ होने के बाद भी इसमें स्थित रहते हैं।


गौण स्मृतिः 40 जी0बी0 हार्ड डिस्क ड्राइव, कम्प्यूटर में द्वितीयक भंडारण स्मृति।
गौण स्मृति या आॅक्जिलरी स्टोरेज यूनिट इसे द्वितीयक भंडार इकाई या सेकेण्डरी यूनिट भी कहते हैं। हार्ड डिस्स जिसका कि मुख्य काम है जानकारी को हमेशा के लिए सुरक्षित रखना और वो जानकारी तभी हटाई जा सकेगी यदि उसे स्वयं हटाना चाहते हैं। इस मेमोरी की खास बात ये है कि बिजली चले जाने के बावजूद जानकारी को सुरक्षित रखती है जैसे कि जब आप कम्प्यूटर बंद कर देते है तो आपके आंकडे इसी डिसक में सुरक्षित रहते हैं। इस मेमोरी को तकनीकी भाषा में स्थायी मेमोरी या नाॅन-वोलाटाईल मेमोरी भी कहते है। ये विभिन्न प्रकार की क्षमताओं में उपलब्ध है जैसे 10, 20, 40, 80, 256, 500, जी0बी0 या उससे भी ज्यादा।

मैग्नेटिक टेपः- डाटा को स्थाई तौर पर संग्रहित कर सकने वाले उपकरणों में मैग्नेटिक टेप का नाम प्रमुखता से आता है। इसमें 1/2 इंच चैडाई वाली प्लास्टिक की बिना जोड वाली लम्बी पट्टी होती है। जिस पर फैरोमेग्नेटिक पदार्थ की पर्त चढाई जाती है। इस पट्टी को हम टेप कहते हैं। टेप विभिन्न लम्बाईयों में उपलब्ध होते हैं, 400, 800, 1200, या 2400 फीट लम्बाई वाले मैग्नेटिक टेप उपलब्ध होते है। टेप पर डाटा मेग्नेटाइज्ड या नाॅ मैग्नेटाइज्ड बिन्दुओं के रूप में लिखा जाता है। एक अक्षर के लिए सात बिट या नौ बिट कोड प्रयोग में लाया जाता है। मैग्नेटाइज्ड एवं नाॅन मैग्नेटाइज्ड बिन्दुओं की कतारें टेप की लम्बाई के समानान्तर बन जाती है। इन्हें हम ज्तंबो कहते हैं।

मैग्नेटिक डिस्कः- मैग्नेटिक डिस्क की तुलना रिकार्ड प्लेयर के लाॅग प्लेविंग एल0पी0 रिकार्ड से कर सकते है। ऐसे कई रिकार्डस या डिस्क को एक के उपर एक कुछ अन्तर से लगा दिया जाये तो वे मैग्नेटिक डिस्क के समान दिखेगा। सभी डिस्क एक के उपर एक समान्तर लगी होती है। सभी डिस्कों के बने इस माध्यम को डिस्क पैक कहते है। डिस्क पैक में 11 अथवा 20 ऐसी सतहें होती हैं प्रायः सबसे उपरी तथा सबसे निचली सतह पर डाटा नहीं लिखा जाता है। इस ड्राइव में रीड व राइट हेड लगे होते हैं। जो डाटा को लिखने और पढने का काम करते हैं। ये डाटा को ज्तंबो के रूप में डिस्क पैक पर लिखते हैं।

फ्लाॅपी डिस्कः- यह एस छोटी लचीली डिस्क होती है जिसकी डाटा संग्रह करने की क्षमता बहुत अधिक नहीं होती। कीमत की लिहाज से यह बहुत सस्ती होती है। एक लचीली प्लास्टिक शीट के उपर मैग्नेटिक आॅक्साइड कोटिंग करके इसे तैयार किया जाता है। इसके एक रीड/राइट हैड होता है जो फ्लापी की सतह से स्पर्श करके डाटा लिखता व पढता हैं। ये 1.44 और 2.44 एम0बी0 की क्षमता में उपलब्ध होती है, फ्लापी डिस्क की तरह ही एक जिप डिस्क होती है। जिसकी क्षमता 100 एम0बी0 से 250 एम0बी0 और 750 एम0बी0 होती है।

पेन ड्राइवः- ये एक एक्सटर्नल होता है जिसे हम सीधे यू0एस0बी0 पोर्ट पर लगा सकते है, ये इस्तेमाल करने में बहुत आसान होता है और आसानी से उपलब्ध भी है, इसकी डाटा संग्रह करने की क्षमता भी ज्यादा होती है, ये सामान्यतः 1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, जी0बी0 या उससे भी अधिक क्षमता में उपलब्ध है, यही कारण है कि आजकल इसका अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहा है।

आॅप्टिकल डिस्कः- आॅप्टिकल डिस्क एक इलेंक्ट्राॅनिक डाटा भंण्डारण मध्यम जिसमें से डेटा पढ सकते हैं और एक कम शक्ति लेजर बीम का उपयोग करके लिखा है, यह फ्लैट, पिरपत्र, प्लास्टिक या कांच डिस्क पर डेटा जो प्रकाश और अंधेरे गड्ढों के रूप् में संग्रहीत किया जाता हैं, लेजर बीम गड्ढे पढता हैं और डेटा तक पहॅुचा जा सकता है।
एक आॅप्टिकल डिस्क चुबंकीय भंण्डारण मीडिया पर कई लाभ प्रदान करता है।

फ्लैश मैमोरीः- आजकल हर व्यक्ति पेनड्राइव का उपयोग करता मिल जाएगा यह फ्लैश मैमोरी का ही एक उदाहरण है। फ्लैश मैमोरी नाॅन-वोलेटाइल कम्प्यूटर स्टोरेज होती है, जिसमें डाटा परमानेंटली स्टोर रहता है। मैमोरी कार्ड, यू0एस0बी0, डिजिटल कैमरा आदि में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

मैमोरी स्टिकः- मैमोरी स्टिक एक खास फ्लैश मैमोरी कार्ड है, जिसका उपयोग डाटा स्टोरेज के रूप में किया जाता है। अब इसका छोटा वर्जन भी उपलब्ध है, जिसकी क्षमता काफी अधिक होती है। इसके अलावा सीडी रोम, डीवीडी रोम, आॅप्टिकल मैमोरी, मैग्नेटिक टेप आदि भी कम्प्यूटर स्टोरेज के उदाहरण है। जिनका उपयाग आप डाटा स्टोर करने के लिए करते है।

सीडी/डीवीडी ड्राईवः- ये भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले स्टोरेज डिवाइस है सस्ती होती है इसकी संग्रहण क्षमता काफी अधिक होती है। आम तौर पर एक सीडी की संग्रहण क्षमता 700-800 एम0बी0 और एक डीवीडी की अधिकतम क्षमता 17 जीबी होती है।

हार्ड डिस्क ड्राइवः- ये किसी भी कम्प्यूटर की सबसे मुख्य स्टोरेज डिवाइस होती है। इसकी संग्रहण क्षमता काफी अधिक होती है इसलिए ये कम्प्यूटर के मुख्य संग्रहण के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। आजकल हार्ड डिस्क ड्राइव 40, 80, 160, 320, 500 जी0बी0 या उससे अधिक क्षमता में उपलब्ध है।

सी0पी0यू0 प्रोसेस और मैमोरीः-


सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट या सी0पी0यू0ः- सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट कम्प्यूटर के सभी आॅपरेशनों का समन्वय एवं संगठन करके प्रणाली को नियंत्रित करती हैं। यह की-बोर्ड जैसे विभिन्न इनपुट उपकराणों द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन करती है और प्रिंटर जैसे विभिन्न पैरीफेरल उपकरणों के लिए आउटपुट का इंतजाम करती है। यह प्राइमरी स्टोरेज में स्टोर निर्देशों को लाने के लिए उत्तरदायी होती है, उनकी व्याख्या करती है और उन सभी हार्डवेयर यूनिटों को निर्देश जारी करती है जो उन निर्देशों पर कार्य करने के लिए उत्तरदायी होता है।

ए0एल0यू0ः- यह उपकरण कम्प्यूटर की सभी गणितीय और तार्किक आॅपरेशनों को करने के लिए जिम्मेदार होता है। गणितीय आॅपरेशनों का प्रयोग संख्याओं की तुलना और ‘‘लैस दैन‘‘, ‘‘इक्वल टू‘‘ और ‘‘ग्रेटर दैन‘‘ इत्यादि निरूपित करने में किया जाता है। ए0एल0यू0 टेक्स्ट व संख्याओं दोनांे को ही संभाल सकता है। कभी-कभी कम्प्यूटर में गणितीय को-प्रोसेसर लगा होता है जो दूसरा माइक्रोप्रोसेसर होता है गणितीय कार्य के लिए ही होता है। को-प्रोसेसर का मुख्य लाभ गणना की बढी हुई गति होती है।
कम्प्यूटर स्मृति या मैमोरी का कार्य किसी भी निर्देशों, सूचना अथवा परिणामों को संचित करके रखना होता है। कम्प्यूटर के सी0पी0यू0 में होने वाली समस्त क्रियायें सर्वप्रथम स्मृति में जाती है। यह एक प्रकार के कम्प्यूटर का संग्रहशाला है। मैमोरी कम्प्यूटर का अत्यधिक महत्वपूर्ण भाग है। जहां डाटा, सूचना और प्रोग्राम प्रक्रिया के दौरान स्थित रहते है और आवश्यकता पडने पर तत्काल उपलब्ध होते है।

प्राइमरी मैमोरीः-


1. रैमः- त्ंदकवउ ।बबमेे डमउवतल ;त्।डद्ध कम्प्यूटर की यह सबसे महत्वपूर्ण मैमोरी होती है। इस मैमोरी में प्रयोगकर्ता अपने प्रोग्राम केा कुछ देर के लिए स्टोर कर सकते हैं। साधारण भाषा में इस मैमोरी को त्।ड कहते है। यही कम्प्यूटर की बेसिक मैमोरी भी कहलाती है। यह निम्नलिखित दो प्रकार की होती है-
डायनेमिक रैम ;क्त्।डद्ध:- डायनेमिक का अर्थ है गतिशील इस रैम पर यदि 10 आंकडे संचित कर दिए जाएं और फिर उनमंे बीच के दो आंकडे मिटा दिए जाएं, तो उसके बाद वाले बचे सभी आंकडे बीच के रिक्त स्थान में स्वतः चले जाते है और बीच के रिक्त स्थान का उपयोग हो जाता है।
स्टैटिक रैम :- स्टैटिक रैम में संचित किए गये आंकडे स्थित रहते है। इस रैम में बीच के दो आंकडे मिटा दिए जाएं तो इस खाली स्थान पर आगे वाले आंकडे खिसक कर नहीं आएंगे। फलस्वरूप यह स्थान तब तक प्रयोग नहीं किया जा सकता जब तक कि पूरी मैमोरी ‘‘वाश‘‘ करके न किया जाए।
2. रोम :- इसमें संचित सूचना को केवल पढा जा सकता है उसे परिवर्तित नहीं किया जा सकता कम्प्यूटर के बंद होने पर भी राम में सूचनाएं संग्रहित रहती हैं नष्ट नहीं होती।
रीड ओनली मैमोरी:- आधुनिक कम्प्यूटर की महत्वपूर्ण मैमोरी रोम उसे कहते है, जिसमें लिखें प्रोग्राम के आउटपुट को केवल पढा जा सकता है। बेसिक आउटपुट सिस्टम ;ठप्व्ैद्ध नाम का एक प्रोग्राम रोम का उदाहरण है, जो कम्प्यूटर के आॅन होने पर उसकी सभी इनपुट डिवाइसेस की जांच करने एवं नियंत्रित करने का काम करता है।
इरेजिबल प्राॅम :- इस प्ण्ब्ण् में संचित किया गया प्रोग्राम पराबैंगनी किरणों के माध्यम से मिटाया ही जा सकता है। फलस्वरूप यह प्ण्ब्ण् दाबारा प्रयोग की जा सकती है।
इलैक्ट्रिकल ई-प्राॅम:- इलैक्ट्रिकल इरेजिबल प्राॅम पर स्टोर किये गये प्रोग्राम को मिटाने अथवा संशोधित करने के लिए किसी अन्य उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। कमाण्ड्स दिये जाने पर कम्प्यूटर में उपलब्ध इलैक्ट्रिक सिंग्नल्स ही इस प्रोग्राम को संशोधित कर देते हैं।

मदर बोर्डः-


यह कम्प्यूटर का सबसे मेन पार्ट होता है। इसके बिना हम कम्प्यूटर की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। वैसे तो कम्प्यूटर में कैबिनेट के अन्दर हर पार्ट अपने आप में जरूरी होता हैं। परन्तु मदर बोर्ड का स्थान सबसे उपर है क्योंकि इसके बिना हम कम्प्यूटर की कल्पना तक नहीं कर सकते हैं। यह कम्प्यूटर का मेन सर्किट बोर्ड होता हैं। यह प्रोसेसिंग डिवाइस का एक हिस्सा है।

Sunday, 26 February 2017

Chapter - 2 | हार्डवेयर

हार्डवेयर




साधारण रूप से कम्प्यूटर के वे सभी प्रभाग जिन्हें देखा तथा छुआ जा सकता है, कम्प्यूटर हार्डवेयर कहलाते हैं। इनमें मुख्य रूप से कम्प्यूटर यांत्रिक, विधुत तथा इलैक्ट्रोनिक प्रभाग आते हैं। कम्प्यूटर के अन्दर तथा बाहर के सभी प्रभाग, कम्प्यूटर की इनपुट तथा आउटपुट डिवाइस आदि सभी कम्प्यूटर हार्डवेयर ही हैं। कम्प्यूटर की वे डिवाइस जो कि कम्प्यूटर को चलाए जाने के लिए आवश्यक होती है, स्टैण्डर्ड डिवाइस कहलाती है। जैसे- की-बोर्ड, फ्लापी डिवाइस, हार्डडिस्क आदि। इन डिवाइसेस के अतिरिक्त वे डिवाइस, जिनको कम्प्यूटर से जोडा जाता है, पेरीफेरल डिवाइसेस कहलाती है। स्टैण्डर्ड तथा प्ररीफेरल डिवाइसेस को मिलाकर ही कम्प्यूटर हार्डवेयर तैयार होता है।
इनपुट और आउटपुट उपकरण कम्प्यूटर और मानव के मध्य सम्पर्क की सुविधा करते हैं। इनपुट डिवाइसेज मानवीय भाषा में दिये डाटा और प्रोग्रामों को कम्प्यूटर के समझने योग्य रूप में परिवर्तित करतती है और आउटपुट डिवाइसेज स्क्रीन पर या प्रिंटर द्वारा कागज पर छापकर प्रस्तुत करते हैं। इनपुट या आउटपुट डिवाइस प्रायः कम्प्यूटर के सीधे नियंत्रण में रहते हैं।

आपरेटर इंटरफेसः- कम्प्यूटर से आॅपरेटर का सम्पर्क इंटरफेस कहलाता है। ये उचित इनपुट हार्डवेयर और डिस्प्ले साॅफ्टवेयर उपलब्ध हो तो आॅपरेटर जो कि डिस्प्ले डिवाइस के सम्पर्क में है अपने कार्य को प्राावशाली रूप् से कर सकता है। हार्डवेयर इंटरफेस आॅपरेटर कम्प्यूटर के माॅनिटर और इनपुट डिवाइस का एक साथ उपयोग करता है। इनपुट डिवाइस के रूप् में प्रायः की-बोर्ड या माउस का प्रयोग किये जाते हैं। जब भी की-बोर्ड से किसी अक्षर या कैरेक्टर की कुंजी दबाई जाती है तो यह करेक्टर डिस्प्ले स्क्रीन पर कर्सर की स्थिति में दिखाई देता है। कर्सर स्क्रीन पर टिमटिमाता एक चिन्ह होता है जो यह बताता है कि आॅपरेटर द्वारा इनपुट कैरेक्टर द्वारा इनपुट कैरेक्टर कहाॅ दिखाई देखा माउस स्क्रीन पर उपस्थित कर्सर या पाॅइटंर को इधर-उधर से जाने का कार्य करता है।

कम्प्यूटर अपना काम कैसे करता है?

1. इनपुट के साधन जैसे की-बोर्ड, माउस, स्कैनर आदि के द्वारा हम अपने निर्देश, प्रोग्राम तथा इनपुट डेटा, प्रोसेसर को भेजते है।
2. प्रोसेसर हमारे निर्देश तथा प्रोग्राम का पालन करके कार्य सम्पन्न करता है।
3. प्रोग्राम का पालन हो जाने पर आउटपुट को स्क्रीन, प्रिंटर आदि साधनों पर भेज दिया जाता है।
4. भविष्य के प्रयोग के लिए सूचनाओं को संग्रह के माध्यमों जैसे हार्डडिस्क, फ्लाॅपी डिस्क आदि पर एकत्र किया जा सकता है।

1. इनपुट डिवाइस


आमतौर पर की-बोर्ड एवं माउस है। इनपुट युक्ति के द्वारा आंकडे एवं निर्देश कम्प्यूटर में प्रवेश करते है।
या
जिन डिवाइसेस का प्रयोग डेटा और निर्देशों को कम्प्यूटर में प्रविष्ट करने के लिए किया जाता है, वे सभी डिवाइस आगम अथवा इनपुट डिवाइस कहलाती है। यह भी कहा जा सकता है कि मानवीय भाषा में प्रविष्ट किए जा रहे डेेटा अथवा प्रोग्राम को कम्प्यूटर के समझने योग्य रूप् में परिवर्तित करने के लिए प्रयोग की जाने वाली डिवाइसेस को इनपुट डिवाइस कहा जाता है। ये डिवाइस अक्षरों, अंकों तथा अन्य विशिष्ट चिन्हों को बायनरी डिजिट अर्थात 0 तथा 1 में परिवर्तित करके सी0पी0यू0 के समझने योग्य बनाती है। इनपुट के लिए सबसे अधिक प्रयोग की जाने वाली युक्ति की-बोर्ड और माउस है। इन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जा सकता है।

कुछ और इनपुट डिवाइस निम्न है।
1. की-बोर्ड
2. ट्रैकबाॅल
3. लाइट पेन
4. जाॅसस्टिक
5. बार कोड रीडर
6. स्कैनर
7. मइक
8. ओ0एम0आर0, ओ0सी0आर0 एवं एम0आई0सी0आर0 आदि।

टैक्स्ट इनपुट डिवाइस
की-बोर्ड टाइप टाइप राइटर की तरह बटन दबाकर शब्द और करेक्टर लिखने के लिए उपयोग किया जाने वाला यंत्र है। अंग्रेजी भाषा के सबसे सामान्य कुंजी लेआउट फॅम्त्ज्ल् लेआउट है।

संकेतन यंत्र


1. माउसः- एक संकेतक यंत्र जो इसके सहयोगी धरातल के सदर्श दो परिणाम वाली गतियों की पहचान करली है।
2. ट्रैकबाॅलः- एक संकेतन यंत्र जिसमें साकेट के अंदर उभरा हुआ एक बाॅल होता है जो दोनों अक्षों के बारे में घूर्णन की पहचान करता है।
3. एक्सबाॅक्स 360 नियंत्रकः- एक्सबाॅक्स 360 को नियंत्रित करने के लिए प्रयुक्त एक यंत्र जो स्विचब्लेड अनुप्रयोग के उपयोग द्वारा बायें अथवा दायें अंगूठे की सहायता से अतिरिक्त संकेतक के रूप् में प्रयोग किया जा सकता है।

गेमिंग डिवाइस


1. जाॅसस्टिकः- नियंत्रण करने वाला एक सामान्य यंत्र जिसमें हाथ में पकडी जाने वाली एक छडी होती है जो इसके एक किनारे पर दो या तीन परिमाप वाले कोणों की पहचान करने के लिए धुरी का कार्य करती है।
2. गेमपेडः- हाथ मंे पकडने वाला एक सामान्य खेल नियंत्रक जो इनपुट प्रदान करने के लिए अंकों पर निर्भर रहता है।
3. खेल नियंत्रकः- कुछ निश्चित खेल उद्देश्यों के लिए विशेष प्रकार से निर्मित की विशिष्ट किस्म।

फोटो व वीडियो इनपुट डिवाइस


1. इमेज स्कैनरः- इमेज, प्रिंट किए हुए लेख, हस्तलेख अथवा किसी वस्तु को विश्लेषित कर इनपुट प्रदान करने वाला एक यंत्र।
2. वेबकेमः- यह जो विजुअल प्रदान करने के लिए अल्प ध्वनि वाला अीडियों कैमरा होता है। इस इनपुट को आसानी से इंटरनेट पर हस्तांतरित किया जा सकता है।

आॅडियो इनपुट डिवाइस


1. माइक्रोफोनः- ध्वनि संवेदक जो आवाज को विधुत संकेतों में बदलने के लिए इनपुट प्रदान करता है।

आॅन लाइन इनपुट डिवाइसः- यह वह युक्तियां है जिससे हम सिस्टम मंे सीधे इनपुट प्रदान कर सकते हैं। यह सिस्टम से जुडे रहते हैं। उदाहरण- माउस, की-बोर्ड, लाइटपेन, जायस्टिक आदि।

आॅफ लाइन इनपुट डिवाइसः- यह वह युक्तियां है जिसमें सिस्टम में जोडने से पहले हम इनपुट तैयार कर लेते हैं। और फिर आवश्यकता अनुसार उनसे इनपुट के लिए हम सिस्टम से जोड लेते हैं। उदाहरण- की से पंच कार्ड, की से टेप सिस्टम आदि।

सोर्सडेटा इनपुट युक्तियाॅंः- यह वह युक्तियां हैं जो किसी भी सोर्स से इनपुट पढ सकती है व सिस्टम में संचित कर लेती है। बाद में उसे आवश्यकता अनुसार गणना के लिए उपयोग किया जा सकता है। उदाहरण- प्वांइट आॅफ सेल टर्मिनल, स्कैनर आदि।

2. आउटपुट डिवाइस


मुख्य रूप से माॅनीटर और प्रिंटर इसके उदाहरण है इसके अलावा वे सभी युक्ति जो आपको बताए कि कम्प्यूटर ने क्या संपादित किया है आउटपुट युक्ति कहलाती है। या
निर्गम उपकरण से तात्पर्य ऐसे उपलकरणों से होता है जो कि संगणना के परिणामों को निर्गम तक पहंुचाते हैं। ये परिणाम दृश्य प्रदर्शन इकाई द्वारा दिखलाये जा सकते हैं। प्रिंटर द्वारा मुद्रित कराये जा सकते हैं, चुम्बकीय माध्यमों पर संग्रहित किये जा सकते हैं अथवा अन्य किसी विधि द्वारा यह निर्गम प्राप्त किये जा सकते हैं। एक कम्प्यूटर प्रणाली के विभिन्न अवयवों में कई उपकरण जो कि चुम्बकीय सिद्वांतों पर कार्य करते हैं। कम्प्यूटर में आंकडों के आगम एवं निर्गम दानों की उपयोग हेतु प्रयोग किये जाते है। निर्गम युक्तियां दो प्रकार की होती है।

साॅफ्ट काॅपी युक्तियांः- यह वह युक्तियों है जिसमें हम सिस्टम पर अस्थाई रूप् से आउटपुट प्राप्त कर सकते हैं। जैसे माॅनिटर, एल0सी0डी0 आदि।

हाॅर्ड काॅपी युक्तियांः- यह वह युक्तियों है जिससे हम कागज पर आउटपुट प्राप्त कर सकते हैं। जैसे प्रिंटर, प्लाॅटर।

मुद्रण यंत्रः- मुद्रण यंत्रांे से तात्पर्य एक ऐसी प्रणाली से होता है जिसमें कि कम्प्यूटर द्वारा प्राप्त परिणामें को कागज के उपर छाप कर स्थायी रूप् से उपयागकर्ता को प्रस्तुत किया जाता है। इस पद्वति द्वारा प्राप्त परिणाम कागज पर मुद्रित होने के कारण स्थायी रूप् से प्राप्त होते हैं जो कि मानव द्वारा पठनीय होते हैं मुद्रण यंत्र कम्प्यूटर से परिणामों को विधुत तरंगों के रूप् में प्राप्त करता है एवं उन्हें कूट संकेत के अनुसार अक्षरों में परिवर्तित करके कागज पर छाप देतें हैं। यह छापने की प्रक्रीया मुद्रण यंत्र के प्रकार एवं उसमें उपयोग की जाने वाली तकनीक के अनुसार सम्पन्न होती है।

माॅनीटरः- कम्प्यूटर को हम जो भी निर्देश देते हैं या जिस प्रोसेस्ड जानकारी को हम ग्रहण करते हैं उसे माॅनीटर पर देखते हैं। मुख्य रूप् से दो प्रकार के माॅनीटर आजकल प्रचलन में हैं।

सी0आर0टी0 माॅनीटरः- यह माॅनीटर उसी सिद्वांत पर काम करता है जिस पर हमारे घर का पुराना टी0वी0, इसमें कैथोड रे ट्यूब होती है इसीलिए इसे सी0आर0टी0 माॅनीटर कहा जाता है। यह थोडा बडा होता है और इसकी स्क्रीन थोडी मुडी हुई रहती है।

टी0एफ0टी0ः- यह एक सीधा माॅनीटर होता है। यह बजन में कम होता है और जगह भी कम घेरता है। यह सी0आर0टी0 माॅनीटर से अपेक्षाकृत महंगा होता है।

प्रिंटरः- आवश्यकता और कार्य क्षमता तथा बजट के हिसाब से प्रिंटर अलग-अलग तरह के होते है। लेकिन घरों या आॅफिसों में मुख्यतः दो ही प्रकार के प्रिंटरों का प्रयोग किया जाता है।

समघात मुद्रण यंत्रः- ऐसे मुद्रण यंत्र जिनमें क अक्षर को मुद्रित कराने हेतु किसी ऐसी तकनीक का प्रयोग किया जाता है जिसमें कि अक्षर को कागज पर छापने के लिए अक्षर एवं कागज के मध्य स्याही युक्त फीते का इस्तेमाल किया जाता है, एवं कागत पर उस अक्षर की आकृति उभारने हेतु किसी विधि से अक्षर पर पीछे से प्रहार किया जाता है, वे समघात मुद्रण यंत्र कहलाते है। उदाहरण- डाॅट मैट्रिक्स प्रिंटर आदि।

नाॅन इम्पैक्ट प्रिंटरः- इसमें उपरोक्त अन्य मुद्रण यंत्रों की भांति किसी हैम्मर इत्यादि की तकनीक का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसमें डाॅट मैट्रिक्स मुद्रण यंत्र की भाॅति छोटी-छोटी पिनें नहीं होती बल्कि पिनों के स्थान पर छोटे-छोटे विभिन्न नोजल लगे होते हैं जिनसे कि कम्प्यूटर से प्राप्त संकेतों के अनुसार स्याही की पतली विभिन्न धारायें छूटती हैं जो कि आपस में मिलकर वांछित अक्षर की आकृति बना देती हैं। उदाहरण- लेजर प्रिंटर।

डाॅट मैट्रिक्स प्रिंटरः- इस प्रिंटर में रिबन का उपयोग होता है यह भी 80 काॅलम और 132 काॅलम दो तरह की क्षमताआंे में आते हैं। इसमें प्रिंटर का खर्चा बाकी पिं्रटरों की अपेक्षा कम आता है लेकिन प्रिंट की गुणवत्ता और स्पीड दूसरे प्रिंटर्स के मुकाबले कम होती हैं। इसमें एक बार में केवल एक रंग का पिं्रट लिया ता सकता है। इसलिए इसे मोनो पिं्रटर भी कहते है। इसकी स्पीड सी0पी0एस0 यानी कैरेक्टर पर सेकेण्ड में नापी जाती है।

इंकजैट प्रिंटरः- यह इंकजैट टैक्नोलाॅजी पर काम करता है। इसमें मोनो और कलर्ड या रंगीन दो तरह के पिं्रटर आते है। इसकी गुणवत्ता और स्पीड दोनांे बेहतर होती है लेकिन इसमें प्रिंटिग का खर्चा भी ज्यादा होता है।

लेजर प्रिंटरः- इसमें भी मोनो और रंगीन दो तरह के प्रिंटर आते हैं। इसकी गुणवत्त और स्पीड बाकी पिं्रटर्स से बेहतर होती है। इसकी स्पीड पी0पी0एम0 यानि पेज पर मिनट में नापी जाती है।

आजकल बाजार में आल-इन-वन प्रिंटस भी आते हैं। जिसे आप पिं्रटर के अलावा फोटो काॅपी मशीन, स्कैनर और फैक्स की तरह भी इस्तेमाल कर सकते है।

प्लाॅटरः- ग्राफ प्लाॅटर आउटपुट की एक ऐसी इकाई होती है जिसके द्वारा ग्राफों तथा डिजाइनांे की स्थायी प्रतिलिपि प्राप्त कर सकते हैं। कम्प्यूटर आउटपुट हेतु अन्य प्रयुक्त की जाने वाली विधियां जिनमें कि आउटपुट स्थायी प्रतिलिति के रूप में प्राप्त होता है। ग्राफ, डिजाइनों एवं अन्य आकृतियों को एकदम सही तरीके से नहीं छाप सकती। यदि हमें आउटपुट के रूप में स्पष्ट एवं उचित आकृतियों की आवश्यकता हो तो इस यंत्र का उपयोग किया जाता है। इससे काफी उच्च कोटि की परिशुद्वता प्राप्त की जा करती है। यह एक इंच के हजारवंे भाग के बराबर बिन्दु को भी छाप सकता है।

Major Technological Inventions And Inventors - प्रमुख तकनीकी आविष्कार और आविष्कारक

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