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Wednesday, 20 December 2017

क्‍या है कॉल ड्रॉप - What is Call Drop in Hindi

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानि (TRAI) ने कॉल ड्राप (Call Drop) हाेने पर टेलीकॉम कंपनियों पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने के दिशा निर्देश जारी किये हैं, तो आखिर ये कॉल ड्राप (Call Drop) की समस्या क्या है, जिस पर इतना बडा जुर्माना लगाने की जरूरत पडी तो आईये जानने की काेशिश करते हैं कि क्‍या है कॉल ड्राप - What is Call Drop in Hindi



क्‍या है कॉल ड्रॉप - What is Call Drop in Hindi


क्‍या है कॉल ड्रॉप (Call Drop)



शर्मा जी और उनके दाेस्‍त के बीच में बात चल रही थी, तभी अचानक नेटवर्क में दिक्‍कत आने की वजह से फोन कट गया, दोनों ही समझ नहीं पाये और दोबारा फोन लगाया 20-30 सेकेण्‍ड और बात हुई और फिर वही परेशानी हुई तीसरी बार फोन लगाया तब जाकर आपकी बात पूरी हो पायी, लेकिन वह दोनों ही समझ नहीं पाये कि जो परेशानी उनके साथ हुई थी उसे कॉल ड्राप (Call Drop) कहते हैं, "यानि जब दो लोग आपस में फ़ोन पर बात कर रहें हों और उनके फ़ोन काटे बिना ही नेटवर्क में दिक्कत की वजह से फ़ोन कट जाता है तो उसे कॉल ड्राप ( call drop ) कहा जाता है"


क्‍यों होती है कॉल ड्राप (Call Drop)


आपकी मोबाइल नेटवर्क कंंपनी की वजह से आप अपने शहर में देख ही रहे होगें कि कहीं नेटवर्क बहुत अच्‍छा आता है चाहे आप 7वीं मंजिल पर हों या अंडर ड्राउंड में लेकिन कहीं-कहीं आपके घर के बाहर भी नेटवर्क नहीं मिलता है ताे ऐसा होता क्‍यों है आईये जानते हैं आपके इलाके में जो मोबाइल टावर है उसकी एक क्षमता होती है इसे बैंडविड्थ (Bandwidth) कहते हैं और यह बैंडविड्थ (Bandwidth) उसे इलाके के मोबाइल कनेक्शन की संख्या के आधार पर बढाई या घटाई जा सकती हैं, अब मान लीजिये आपके मोबाइल टावर की बैंडविड्थ क्षमता 10000 मोबाइल के कनेक्शन झेल सकती है, लेकिन उस इलाके में 15000 फोन कनेक्शन हैं तो मोबाइल टावर के बैंडविड्थ (Bandwidth) से मोबाइल फोन कनेक्शन के बैंडविड्थ अधिक हो जाते हैं और टावर के पास जितनी बैंडविड्थ (Bandwidth)  होती है उस से अधिक इस्तेमाल होने लगती है और इसका परिणाम होता है कॉल ड्राप (Call Drop ) यानि फ़ोन का बीच में अपने आप कट जाना

मोबाइल नेटवर्क कंंपनी क्‍यों दोषी है


मोबाइल नेटवर्क कंपनियां केवल उन्‍‍हीं इलाकों में अपने मोबाइल नेटवर्क को लेकर सजग रहती है जिन इलाकों से उसे अधिक आय होती है और वहीं मोबाइल टावर की बैंडविड्थ क्षमता बढाने पर जोर देती है लेकिन जिन इलाकों से आय कम हैं उस ओर वह ज्‍यादा ध्‍यान नहीं देेेेती हैं और कॉल ड्राप (Call Drop ) होती है

क्‍या है कॉल ड्रॉप (Call Drop ) के नियम


कॉल ड्रॉप (Call Drop ) के संशोधित नियमों के अनुसार एक मोबाइल नेटवर्क सर्किल के 90 प्रतिशत मोबाइल टावरों पर कॉल ड्रॉप की का प्रतिशत 2 प्रतिशत से अधिक नहीं हाेना चाहियेे और अगर नेटवर्क की बहुत खराब है तो भी कॉल ड्रॉप की दर 3 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए और इस पर TRAI का कहना है कि मोबाइल कंपनीज ने उपभोक्ताओं की संख्या को देखते हुए टावर नहीं लगाये है जिसकी वजह उपभोक्ता को बड़ा नुकसान होता है जबकि मोबाइल कंपनीज होने वाली आमदनी की तुलना में अपने सेवा स्तर को सुधारने के लिए निवेश बहुत कम कर रही है

क्‍या है कॉल ड्रॉप (Call Drop) का मुद्ददा


TRAI ने यह प्र‍स्‍तावित किया है कि अगर मोबाइल कंपनियां कॉल ड्राप की दर को कम नहीं कर पाती है तो उन्हें हर उपभोक्ता को प्रति कॉल ड्रॉप (Call Drop) एक रूपये रिफंड देना होगा और यह अधिकतम तीन रूपये हो सकता है लेकिन मोबाइल कंपि‍नियां कहती हैं कि अगर उन्‍हें मुआवजा देना पडता है तो उन्‍हें बहुत घाटा होगा क्‍योंकि कॉल ड्रॉप (Call Drop) होने की वजह केवल तकनीकी कारण है तो कॉल ड्राप (Call Drop) पर मुआवजा देना संभव नहीं है


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बायोमेट्रिक प्रणाली क्या है - What is Biometric System

बायोमेट्रिक अटेंडेंस या बायोमेट्रिक उपस्थिति के बारे में आपने सुना ही हाेगा, देश में कई विभागों, स्‍कूलों में बायोमेट्रिक डिवाइस जैसे फिंगरप्रिंट स्कैनर लगाये जा रहे हैं ताकि बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लागू किया जा सके लेकिन क्‍या आप जानते है क्‍या है ये बायोमेट्रिक्स या बायोमेट्रिक का अर्थ तथा बायोमेट्रिक प्रणाली कैसे काम करती है तो आईये जानने की कोशिश करते हैं बायोमेट्रिक प्रणाली क्या है - What is Biometric System

बायोमेट्रिक प्रणाली क्या है - What is Biometric System in Hindi



बायोमेट्रिक प्रणाली क्या है - What is Biometric System


बायोमेट्रिक विज्ञान की एक शाखा है इस हिंदी में जैवमिति कहते हैं, यह शब्‍द दो यूनानी शब्‍दों बायोस और मेट्रोन से मिलकर बना है जिसमें बायोस का अर्थ जीवन से संंबधित और मैट्रोस का अर्थ माप करना होता है, इसमें तकनीक में किसी व्‍यक्ति की पहचान करने के लिये उसके बायोलॉजिकल आंकडों जैसे अंगूठे और अंगुलियों के निशान और आवाज एवं आँखों का रेटिना, नसों के इंप्रेशन आदि का इस्‍तेमाल किया जाता है



बॉयोमीट्रिक्स क्‍यों आवश्‍यक है - Why Biometrics is necessary





  • सुरक्षा के लिहाज से किसी व्‍यक्ति की असली पहचान का बचाने के लिये बायोमेट्रिक जरूरी है, भारत में सबसे ज्‍यादा एटीएम बदलने कर पैसे निकालने के बहुत सारे केस होने लगे हैं जहां कोई व्‍यक्ति पीछे से पासवर्ड पता कर और चालकी से अापको एटीएम बदलकर पैसे निकाल लेता है लेकिन अब कुछ एटीएम मशीनों पर बायोमेट्रिक डिवाइस जैसे फिंगरप्रिंट स्कैनर लगाये जा रहे हैं जो पासवर्ड के स्‍थान पर आपका बॉयोमीट्रिक सत्‍यापन (Biometric verification) करने के बाद ही पैसे निकालेगा

  • कुछ ऐसी जगह है जहां अनधिकृत (Unauthorized) लोगों के प्रवेश को रोकने के लिये बायोमेट्रिक मशीन लगायी जाती है, जहां आपका बॉयोमीट्रिक सत्‍यापन (Biometric verification) होने के बाद ही गेट खुलता है

  • इसके द्वारा ऐसे लोगों की पहचान भी की जा सकती है जो अपना पता बताने में असमर्थ है जैसे कि छोटे बच्‍चे भारत में हर व्‍यक्ति का आधार कार्ड बनाया जा रहा है जो इसी तकनीक पर आधारित है जिसमें आँखों के रेटिना और अपने फिंगरप्रिंट के साथ घर का पता इत्‍यादि जानकारी भी फीड की जाती है और अगर कोई बच्‍चा किसी कारणवश गुम हाे जाता है और उसका आधार कार्ड बनाया गया है तो उसकी पहचान और पता सेकेण्‍डों मेें पता लगाया जा सकता है

  • बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (बीएएस) या बायोमेट्रिक अटेंडेंस को भी कार्यालयों, स्‍कूल कॉलेजाेें में लागू किया जा रहा है ताकि लोग समय से अपने स्‍थान पर उपस्थित हों और व्‍यवस्‍था में सुुधार आये


कैसे काम करती है बायोमेट्रिक प्रणाली - How Biometric System Works


बायोमेट्रिक प्रणाली में बायोमेट्रिक डाटा काे इकठ्ठा करने के लिये ज्‍यादातर ऑप्टिकल फिंगरप्रिंट स्कैनर (optical Fingerprint scanner) का इस्‍तेमाल किया जाता है इसमें व्‍यक्ति की उंगलियों को स्‍कैनर पर रख कर स्‍कैन किया जाता है तो यह फिंगरप्रिंट स्कैनर (Fingerprint scanner) एक सॉफ्टवेयर में फिंगरप्रिंट आंकडों को इकठ्ठा करता है, इसके बाद ऑपरेटर इन्‍हीं उगलियों के ऑकडों के साथ अन्‍य जानकारी जैसे नाम, पता आदि फीड कर दिये जाते हैं, अगली जब कोई व्‍यक्ति इस फिंगरप्रिंट स्कैनर (Fingerprint scanner)पर अपनी उंगली का रखता है फिंगरप्रिंट स्कैनर (Fingerprint scanner) उसकी अंगुली की इमेज लेता है और सॉफ्टवेयर में फिंगरप्रिंट डाटा पहले से स्टोर किस डाटा से मैच करता है डाटा मैच होने पर जानकारी सामने आ जाती है

ऑप्टिकल फिंगरप्रिंट स्कैनर (optical Fingerprint scanner)


ऑप्टिकल फिंगरप्रिंट स्कैनर (optical Fingerprint scanner) किसी भी फिंगरप्रिंट की पहचान के लिये इमेेेज का सहारा लेता है यानि अगर डुल्‍पीकेट इमेज उसके सामने रख दी जाये तो वह उसे भी असली मान लेगा जैसा कि एक खबर के अनुसार बायोमेट्रिक एटेंडेंस पर असली फिगर प्रिंट की जगह की फिगर प्रिंट के रबर मोहर (Rubber stamp) तैयार कर उसे इस्‍तेमाल किया जा रहा है जो ऑप्टिकल फिंगरप्रिंट स्कैनर (optical Fingerprint scanner) असली फिंगरप्रिंट जैसा ही लगता है

कैपेसिटिव फिंगरप्रिंट स्कैनर (capacitive fingerprint scanner)


इसके अलावा जो फिंगरप्रिंट स्कैनर (Fingerprint scanner) आपके फोन में होता है वह कैपेसिटिव फिंगरप्रिंट स्कैनर (capacitive fingerprint scanner) होता है यह ऑप्टिकल फिंगरप्रिंट स्कैनर (optical Fingerprint scanner) से ज्‍यादा सुरक्षित होता है पहला यह केवल शरीर के सम्‍पर्क में अाने पर ही एक्टिव होता है जैसे कि आपके मोबाइल फोन की टच स्‍क्रीन काम करती है बिलकुल उसी प्रकार से और दूसरा यह फिंगरप्रिंट में इसमें के अलावा फिंगरप्रिंट के डिजायन, उसके उभाराेें का भी एक मैप बना लेता है और अगली बार जब  कैपेसिटिव फिंगरप्रिंट स्कैनर (capacitive fingerprint scanner) पर उॅॅॅॅगली रखी जाती है तो यह उसे झट से पहचान लेता है



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क्‍या है ऑडियो क्‍यूआर - What is Audio QR in Hindi

अभी तक आपने क्‍यूआर कोड (Code) के बारे में तो सुुना ही होगा और प्रयोग भी किया होगा, दरअसल क्यूआर कोड (QR Code) बहुत सारे काले बिन्दु और लाइनों वाला एक छोटा सा चौकार चिञ होता है लेकिन यहां हम बात करने वाले हैं ऑडियो क्‍यूआर (Audio QR) के बारे में जहां पर आवाज के माध्‍‍‍यम से एक फोन से दूसरेे फोन को कनेक्‍ट किया जा सकता है तो आईये जानते हैं क्‍या है ऑडियो क्‍यूआर - What is Audio QR in Hindi


दरअसल ऑडियो क्‍यूआर (Audio QR) अल्ट्रासाउंड तरंगों (Ultrasound waves) का प्रयोग करता है यह अल्ट्रासाउंड तरंगों का एक कोड जनरेट करता है जिसे केवल दूसरा फोन ही सुुुन पाता है इसका दायरा सीमित होता है यानि किसी फोन के पास ले जाने पर और दोनों फोन में ऑडियो क्‍यूआर (Audio QR) एक्टिव करने पर ही ये काम करता है, ये फोन आवाज तो पैदा करता है लेकिन इसे आप यानि मनुष्‍य नहीं सुन पाते हैं, कोई भी आवाज हम तक तरंगों या सीधी भाषा में कहें तो कंपनों के माध्‍यम से पहुचती है इसे hertz में मापा जाता है मनुष्‍य 20 से 20000 कंपन प्रति सेकेण्‍ड (hertz) की ध्‍वनि को आसानी से सुन सकता है, लेकिन अल्ट्रासाउंड तरंगों (Ultrasound waves) की आवृत्ति (Frequency) 20000 कंपन प्रति सेकेण्‍ड (hertz) से बहुत ज्‍यादा होती है जिसे आपके कान नहीं सुुन पाते हैं लेकिन फोन का स्‍पीकर इस ध्‍वनि का उत्‍पन्‍न कर सकता है और दूूसरे फोन का माइक्रोफोन इसे सुन सकता है इस तरह बिना शोर किये ऑडियो क्‍यूआर (Audio QR) काम करता है इस फीचर का उपयोग तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब आप अपने फोन नंबर, वर्चुल पेमेंट एड्रेस और बैंक डिटेल को जाहिर नहीं करना चाहते।

 

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सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट क्या है - What Is Central Processing unit in hindi

सीपीयू यानि सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) इनपुट डाटा को प्रोसेस करता है इसके लिये सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट और अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट दोनों मिलकर अंकगणितीय गणना (Arithmetic Calculation) और तार्किक गणना करते हैैं और डाटा को प्रोसेस करते हैं CPU को कंप्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता है आईये जानते हैं सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) क्‍या है -


सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट क्या है - What Is Central Processing Unit in Hindi


कंप्‍यूटर की संरचना (Computer Architecture) में सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit)  केेन्‍द्र में रहता है इनपुट यूनिट (Input unit) द्वारा डाटा और निर्देशों को कंप्‍यूटर में एंटर किया जाता है और इसके बाद सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) डाटा को प्रोसेस करता है और आपको आउटपुट देता है, डाटा को प्रोसेेस करनेे में यह अपने दो भागोंं की मदद लेता है अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) और कंट्रोल यूनिट (Control Unit)

अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit )


अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) अंकगणितीय गणना (Arithmetic Calculation) और तार्किक गणना (Logical calculation) का काम करता है, जैसे जोड़, घटाव, गुणा, भाग और <, >, =, हाँ या ना

कंट्रोल यूनिट (Control Unit)


कंट्रोल यूनिट (Control Unit) कंप्‍यूटर में हो रहे सारे कार्यो नियंत्रित करता है और इनपुट, आउटपुट डिवाइसेज, और अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) के सारे गतिविधियों के बीच तालमेल बैठाता है।


प्रोसेसर में कोर क्‍या है - What Is Core In Processor


कोर (Core) सीपीयू यानि प्रोसेसर के अंदर लगी एक गणना (computation) करने वाली यूनिट या चिप होती है, एक कोर वाले को Single Core Processor कहते हैं प्रोसेसर की शक्ति गीगाहर्टज (GHz) पर निर्भर करती है, यानि जो प्रोससेर जितने ज्‍यादा गीगाहर्टज (GHz) का होगा उतनी ही तेजी से गणना करेगा। अब फिर सेे बात करते हैंं कोर की डुअल-कोर, क्वाड-कोर, ऑक्टा-कोर क्‍या हैं ?



Single Core Processor ज्‍यादा बोझ पडते ही हैंग होने लगता था, इसलिये इसकी क्षमता बढाने के लिये प्रोसेसर में अतिरिक्‍त कोर (Core) लगाये जाते हैं, इनकी संख्‍या के आधार पर ही प्रोसेसर के नाम पडें आईये जानते हैं -


  1. दो कोर मतलब -  Dual Core Processor

  2. चार कोर मतलब - Quad Core Processor

  3. छह कोर मतलब - Hexa Core Processor

  4. आठ कोर मतलब - Octo Core Processor

  5. दस कोर मतलब - Deca Core Processor


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डाटा एंट्री ऑपरेटर क्या है - What is the data entry operator in Hindi

अगर आपकी टाइपिंग स्‍पीड अच्‍छी है और किसी भाषा पर अच्‍छी पकड है तो आप आराम से डाटा एंट्री ऑपरेटर (Data Entry Operator) के पद पर आवेदन कर सकते हैं डाटा एंट्री ऑपरेटर (Data Entry Operator) के पद सरकारी और प्राइवेट दोनों ही सेक्‍टर में उपलब्‍ध हैं जिसमें योग्‍यतानुसार अच्‍छी सेलरी मिलती है तो आईये जानते हैं डाटा एंट्री ऑपरेटर के बारे में पूरी जानकारी All About Data Entry Operator in Hindi -

डाटा एंट्री ऑपरेटर के बारे में पूरी जानकारी All About Data Entry Operator in Hindi - Data Entry Operator Kaise Bane



डाटा एंट्री ऑपरेटर क्या है - What is the data entry operator in Hindi



जो लोग कंप्‍यूटर में डाटा इनपुट करने का काम करते हैं उन्‍हें डाटा एंट्री ऑपरेटर (Data Entry Operator) कहते हैं इसके लिये वह किसी भी प्रकार की इनपुट डिवाइस काे प्रयोग मेंं ले सकते हैं जिसमें कीबोर्ड, स्‍कैनर, बारकोड रीडर, ओएमआर स्‍कैनर आदि इसके अलावा कुछ डाटा को देखकर भी टाइप करना होता है या ट्रांसलेट भी करना पड सकता है - क्‍या होता है डाटा या डाटाबेेस



कैसे बने डाटा एंट्री ऑपरेटर How to Become a Data Entry Operator (DEO)


शैक्षिक योग्‍यता - डाटा एंट्री ऑपरेटर (Data Entry Operator) बनने के लिये न्‍यूनतम शैक्षिक योग्‍यता इंटरमीडीएट होती है, लेकिन कुछ जगह पर स्‍नातक भी अनिवार्य होता है यह निर्भर करता है कि आप किस विभाग में डाटा एंट्री ऑपरेटर (Data Entry Operator) केे पद पर आवेदन कर रहेे हैंं



टाइपिंग स्‍पीड - अगर आप डाटा एंट्री ऑपरेटर (Data Entry Operator) के पद के लिये आवेदन कर रहे हैं तो आपकी हिंदी या अंग्रेजी टाइपिंग स्‍पीड बहुत अच्‍छी होनी चाहिये, अगर दोनों भी भाषाओं की आप अच्‍छी टाइपिंग कर लेते हैं तो आपको वरियता भी मिल सकती है, टाइपिंग मेें न्‍यूूनतम 35 शब्द प्रति मिनट से ऊपर आसानी से टाइप कर सकते है. तो आप डाटा एंट्री ऑपरेटर के लिए आवेदन कर सकते है -


भाषा का ज्ञान - अंग्रेेेेजी हो या हिंदी अगर आपको देखकर टाइप करने की आदत है तो आप इसे बदलिये क्‍योंकि हो सकता है कि आपको सुनकर भी टाइप करना पडें यानि कोई आपको Dictation भी तो दे सकता है या हो सकता है आपको कुछ शब्‍दों को इगि‍लिश से हिंदी और या हिंदी के कुछ शब्‍दों को हिंगलिश में टाइप करना पडे तो आपको अपनी भाषा पर पकड मजबूत बनानी होगी


कंप्‍यूटर ज्ञान - अगर आप डाटा एंट्री ऑपरेटर (Data Entry Operator) हैं तो आप एक कंप्यूटर ऑपरेटर भी हैंं इसलियेे आपको कंप्‍यूटर ज्ञान होना आवश्‍यक है, जिसमें आपको टाइपिंग के साथ स्‍कैन करना, ईमेल भेजना, त्‍यादि की जानकारी भी होना आवश्‍यक है साथ ही आपको एमएस वर्ड और एक्‍सल का ज्ञान भी होना जरूरी है

 

डाटा एंट्री कोर्स (Data Entry Courses)


डाटा एंट्री ऑपरेटर (Data Entry Operator) बनने के लिये आपको कोई विशेष कोर्स करनेे की आवश्‍यकता नहीं है, अगर आप ऊपर दी गयी याेेग्‍यता रखते हैं तो आप डाटा एंट्री ऑपरेटर (Data Entry Operator) के पद के लिये आवेदन कर सकते हैं अगर नहीं तो हमने कंप्‍यूटर, इंटरनेट और हिंदी टाइपिंग से संंबधित कुछ लिंक नीचे दिये हैं तो आपके बहुत काम आ सकतेे हैं लेकिन परिश्रम आपको ही करना होगा


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नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है - What is Network Topology in Hindi

टोपोलॉजी (Topology)- नेटवर्क (Network) कंप्यूटर, सर्वर, मेनफ्रेम, नेटवर्क डिवाइस या अन्‍‍‍य ऐसी डिवाइस जो एक दूसरे से डाटा शेयर करती है उनका आपस का कनेक्‍शन चाहे वह वायरलैस हो या केबल द्वारा नेटवर्क (Network) कहलाता है और यह नेटवर्क (Network) किस तरह का है यानि इसकी आकृति, ले-आउट या संरचना किस प्रकार की है इसे टोपोलॉजी (Topology) और ये दोनोंं शब्‍‍‍द मिलकर ही बनते हैं नेटवर्क टोपोलॉजी (Network topology) तो आईये जानते हैैं नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है - What is Network Topology in Hindi

नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है - What is Network Topology in Hindi




नेटवर्क टोपोलॉजी (Network topology) 4 प्रकार की होती है:-



  • रिंग नेटवर्क टोपोलॉजी (Ring Network Topology)

  • बस नेटवर्क टोपोलॉजी (Bus Network Topology)

  • स्टार नेटवर्क टोपोलॉजी (Star Network Topology)

  • मेश नेटवर्क टोपोलॉजी (Mesh Network Topology)


रिंग नेटवर्क टोपोलॉजी (Ring Network Topology)



  

रिंग नेटवर्क टोपोलॉजी (Ring Network Topology) में सभी कंप्‍यूटर एक गोलाकार आकृति में अपने अधीनस्थ (Subordinate) कम्प्यूटर से जुड़े होते हैंं, इसमें कोई होस्ट (Host) या कंट्रोलिंग कम्प्यूटर (Controlling Computer) नही होता है, इसमें कोई भी कंप्‍यूटर किसी दूसरे कंप्‍यूटर पर निर्भर नहीं होता है, रिंग नेटवर्क (Ring Network) में साधारण गति से डाटा का आदान-प्रदान होता है

बस नेटवर्क टोपोलॉजी (Bus Network Topology)




बस नेटवर्क टोपोलॉजी (Bus Network Topology) मेंं एक ही केेेबल सेे सभी कंम्‍यूटरों को एक ही क्रम में जोडा जाता है, जोडने के लिये टर्मिनेटर (Terminator) का इस्‍तेमाल किया जाता है, इस नेटवर्क को इंस्‍टॉल करना सरल होता है, लेकिन किसी एक कंप्‍यूटर में खराबी होने पर पूरा नेटवर्क काम करना बंद कर देता है

स्टार नेटवर्क टोपोलॉजी (Star Network Topology)





स्टार नेटवर्क टोपोलॉजी (Star Network Topology) मेंं एक हब से ही सारे कंप्‍यूूटरों को जोडा जाता है, इस नेटवर्क में एक होस्ट कम्प्यूटर होता है, जिससेे बाकी सभी कंप्‍यूटरों कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन अगर हब में कोई खराबी आती है तो सारा नेटवर्क बेकार हो जाता है, लेकिन अगर कोई लोकल कम्प्यूटर ख़राब होता है तो शेष नेटवर्क इससे प्रभावित नही होता है

मेश नेटवर्क टोपोलॉजी (Mesh Network Topology)





मेश नेटवर्क टोपोलॉजी (Mesh Network Topology) में सारे कंप्यूटर कही न कही एक दूसरे से जुड़े रहते हैं और एक दूसरे से जुड़े होने के कारण ये अपनी सूचनाओ का आदान प्रदान आसानी से कर सकते हैं, इसमें कोई होस्ट कंप्यूटर नहीं होता है, अगर किसी भी कंप्यूटर मेश कोई खराबी आती है तो भी यह नेटवर्क काम करता रहता है टोपोलॉजी को मेश नेटवर्क (Mesh Network) या मेश भी कहा जाता है
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Wednesday, 6 December 2017

गूगल फॉर्म ये फायदे जानकर दंग रह जायेगें - Google Form is a very useful tool

गूगल फॉर्म (Google Form) गूगल ड्राइव (Google Drive) का एक ही एक हिस्‍सा है, यह गूगल डॉक के साथ उपलब्‍ध है गूगल फॉर्म (Google Form) की सहायता ये आप बडें आराम से ऑनलाइन डाटा कलैक्‍ट कर सकते हैं और साथ ही उस डाटा को गूगल फॉर्म (Google Form) से माइक्रोसॉफ्ट एक्‍सेल (Microsoft excel) में Export भी करा सकते हैं तो आईये जानते हैं गूगल फॉर्म (Google Form) क्‍या है और गूगल फॉर्म (Google Form) कैसे बनाते हैं गूगल फॉर्म (Google Form) के क्‍या-क्‍या फायदे हैं -

गूगल फार्म कम्‍पलीट ट्यूटोरियल हिंदी में - Google Forms Complete Tutorial in Hindi (Step by Step)


गूगल फॉर्म (Google Form) क्‍या है ?


गूगल फॉर्म (Google Form) एक ऐसा ऑनलाइन टूल है जिससे आप फार्म बनाकर बडे आराम से किसी भी सोशल मीडीया, ब्‍लॉग या बेवसाइट पर शेयर करा सकते हैं और डाटा कलैक्‍ट कर सकते हैं इसे बनाना और एडिट कराना बहुत आसान होता है और यह बिलकुल फ्री है गूगल फॉर्म (Google Form) बनाने के ि‍लिये आपके पास एक जीमेल आईडी का होना आवश्‍यक है और गूगल फॉर्म (Google Form) आपके गूगल ड्राइव से कनेक्‍ट रहता है आईये जानते हैं गूगल फॉर्म (Google Form) के क्‍या फायदे होते हैं -


गूगल फॉर्म (Google Form) की सहायता से आप निम्‍न प्रकार के ऑनलाइन फॉर्म तैयार कर सकते हैं -


  • ऑनलाइन सर्वे फॉर्म (Online survey Form)

  • ऑनलाइन क्विज फॉर्म (Online Quiz Form)

  • ऑनलाइन रिव्‍यू फॉर्म (Online review Form)

  • पार्टी इनविटेशन फॉर्म (Party invocation Form)

  • कॉन्‍टेक्‍ट फॉर्म (Contact Form)

  • बॉयोडाटा फॉर्म (Bio data Farm)

  • ऑनलाइन जॉब फॉर्म (Online job Form)

  • फाइल अपलोड फॉर्म (File upload Form)


गूगल फॉर्म (Google Form) create करने के लिये आपको जाना होगा www.google.com/forms पर यहां आपको कई Google Forms Templates दिखाई देगें आप जिस प्रकार का Form create करना चाहते हैं उसे सलेक्‍ट कर लीजिये अगर आपको Templates से नहीं बनाना है तो आप Blank Form पर क्लिक कीजिये जब आप Blank Form पर Click करेंगे तो आपको गूगल फॉर्म (Google Form) में 11 प्रकार के Questions बनाने के लिये Option मिलेगें जो इस प्रकार है -


  1. शॉर्ट आंसर (Short answer)

  2. पैराग्राफ (Paragraph)

  3. मल्‍टीपल चॉइस (Multiple Choice)

  4. चेकबॉक्स (Checkbox)

  5. ड्रॉपडाउन (Drop down)

  6. फाइल अपलोड (File upload)

  7. लाइनर स्केल (Linear scale)

  8. मल्‍टीपल चॉइस ग्रिड (Multiple Choice Grid)

  9. टिक बॉक्‍स ग्रिड (Tick box grid)

  10. डेट (date)

  11. टाइम Time



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Saturday, 4 March 2017

Chapter-3 | मैमोरी और प्रोसेसर | From The Computer World

मैमोरी और प्रोसेसर


संचित युक्तिः-
यह कम्प्यूटर के स्थाई तौर तर बहुत अधिक मात्रा में आंकडों को संचित करने की अनुमति प्रदान करता है। उदाहरण डिस्क ड्राइव टेप ड्राइव।

सेकेंडरी मेमोरीः- यह एक स्थाई संग्रहण युक्ति है। इसमें संग्रहित डेटा तथा प्राग्राम्स कम्प्यूटर के आॅफ होने के बाद भी इसमें स्थित रहते हैं।


गौण स्मृतिः 40 जी0बी0 हार्ड डिस्क ड्राइव, कम्प्यूटर में द्वितीयक भंडारण स्मृति।
गौण स्मृति या आॅक्जिलरी स्टोरेज यूनिट इसे द्वितीयक भंडार इकाई या सेकेण्डरी यूनिट भी कहते हैं। हार्ड डिस्स जिसका कि मुख्य काम है जानकारी को हमेशा के लिए सुरक्षित रखना और वो जानकारी तभी हटाई जा सकेगी यदि उसे स्वयं हटाना चाहते हैं। इस मेमोरी की खास बात ये है कि बिजली चले जाने के बावजूद जानकारी को सुरक्षित रखती है जैसे कि जब आप कम्प्यूटर बंद कर देते है तो आपके आंकडे इसी डिसक में सुरक्षित रहते हैं। इस मेमोरी को तकनीकी भाषा में स्थायी मेमोरी या नाॅन-वोलाटाईल मेमोरी भी कहते है। ये विभिन्न प्रकार की क्षमताओं में उपलब्ध है जैसे 10, 20, 40, 80, 256, 500, जी0बी0 या उससे भी ज्यादा।

मैग्नेटिक टेपः- डाटा को स्थाई तौर पर संग्रहित कर सकने वाले उपकरणों में मैग्नेटिक टेप का नाम प्रमुखता से आता है। इसमें 1/2 इंच चैडाई वाली प्लास्टिक की बिना जोड वाली लम्बी पट्टी होती है। जिस पर फैरोमेग्नेटिक पदार्थ की पर्त चढाई जाती है। इस पट्टी को हम टेप कहते हैं। टेप विभिन्न लम्बाईयों में उपलब्ध होते हैं, 400, 800, 1200, या 2400 फीट लम्बाई वाले मैग्नेटिक टेप उपलब्ध होते है। टेप पर डाटा मेग्नेटाइज्ड या नाॅ मैग्नेटाइज्ड बिन्दुओं के रूप में लिखा जाता है। एक अक्षर के लिए सात बिट या नौ बिट कोड प्रयोग में लाया जाता है। मैग्नेटाइज्ड एवं नाॅन मैग्नेटाइज्ड बिन्दुओं की कतारें टेप की लम्बाई के समानान्तर बन जाती है। इन्हें हम ज्तंबो कहते हैं।

मैग्नेटिक डिस्कः- मैग्नेटिक डिस्क की तुलना रिकार्ड प्लेयर के लाॅग प्लेविंग एल0पी0 रिकार्ड से कर सकते है। ऐसे कई रिकार्डस या डिस्क को एक के उपर एक कुछ अन्तर से लगा दिया जाये तो वे मैग्नेटिक डिस्क के समान दिखेगा। सभी डिस्क एक के उपर एक समान्तर लगी होती है। सभी डिस्कों के बने इस माध्यम को डिस्क पैक कहते है। डिस्क पैक में 11 अथवा 20 ऐसी सतहें होती हैं प्रायः सबसे उपरी तथा सबसे निचली सतह पर डाटा नहीं लिखा जाता है। इस ड्राइव में रीड व राइट हेड लगे होते हैं। जो डाटा को लिखने और पढने का काम करते हैं। ये डाटा को ज्तंबो के रूप में डिस्क पैक पर लिखते हैं।

फ्लाॅपी डिस्कः- यह एस छोटी लचीली डिस्क होती है जिसकी डाटा संग्रह करने की क्षमता बहुत अधिक नहीं होती। कीमत की लिहाज से यह बहुत सस्ती होती है। एक लचीली प्लास्टिक शीट के उपर मैग्नेटिक आॅक्साइड कोटिंग करके इसे तैयार किया जाता है। इसके एक रीड/राइट हैड होता है जो फ्लापी की सतह से स्पर्श करके डाटा लिखता व पढता हैं। ये 1.44 और 2.44 एम0बी0 की क्षमता में उपलब्ध होती है, फ्लापी डिस्क की तरह ही एक जिप डिस्क होती है। जिसकी क्षमता 100 एम0बी0 से 250 एम0बी0 और 750 एम0बी0 होती है।

पेन ड्राइवः- ये एक एक्सटर्नल होता है जिसे हम सीधे यू0एस0बी0 पोर्ट पर लगा सकते है, ये इस्तेमाल करने में बहुत आसान होता है और आसानी से उपलब्ध भी है, इसकी डाटा संग्रह करने की क्षमता भी ज्यादा होती है, ये सामान्यतः 1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, जी0बी0 या उससे भी अधिक क्षमता में उपलब्ध है, यही कारण है कि आजकल इसका अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहा है।

आॅप्टिकल डिस्कः- आॅप्टिकल डिस्क एक इलेंक्ट्राॅनिक डाटा भंण्डारण मध्यम जिसमें से डेटा पढ सकते हैं और एक कम शक्ति लेजर बीम का उपयोग करके लिखा है, यह फ्लैट, पिरपत्र, प्लास्टिक या कांच डिस्क पर डेटा जो प्रकाश और अंधेरे गड्ढों के रूप् में संग्रहीत किया जाता हैं, लेजर बीम गड्ढे पढता हैं और डेटा तक पहॅुचा जा सकता है।
एक आॅप्टिकल डिस्क चुबंकीय भंण्डारण मीडिया पर कई लाभ प्रदान करता है।

फ्लैश मैमोरीः- आजकल हर व्यक्ति पेनड्राइव का उपयोग करता मिल जाएगा यह फ्लैश मैमोरी का ही एक उदाहरण है। फ्लैश मैमोरी नाॅन-वोलेटाइल कम्प्यूटर स्टोरेज होती है, जिसमें डाटा परमानेंटली स्टोर रहता है। मैमोरी कार्ड, यू0एस0बी0, डिजिटल कैमरा आदि में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

मैमोरी स्टिकः- मैमोरी स्टिक एक खास फ्लैश मैमोरी कार्ड है, जिसका उपयोग डाटा स्टोरेज के रूप में किया जाता है। अब इसका छोटा वर्जन भी उपलब्ध है, जिसकी क्षमता काफी अधिक होती है। इसके अलावा सीडी रोम, डीवीडी रोम, आॅप्टिकल मैमोरी, मैग्नेटिक टेप आदि भी कम्प्यूटर स्टोरेज के उदाहरण है। जिनका उपयाग आप डाटा स्टोर करने के लिए करते है।

सीडी/डीवीडी ड्राईवः- ये भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले स्टोरेज डिवाइस है सस्ती होती है इसकी संग्रहण क्षमता काफी अधिक होती है। आम तौर पर एक सीडी की संग्रहण क्षमता 700-800 एम0बी0 और एक डीवीडी की अधिकतम क्षमता 17 जीबी होती है।

हार्ड डिस्क ड्राइवः- ये किसी भी कम्प्यूटर की सबसे मुख्य स्टोरेज डिवाइस होती है। इसकी संग्रहण क्षमता काफी अधिक होती है इसलिए ये कम्प्यूटर के मुख्य संग्रहण के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। आजकल हार्ड डिस्क ड्राइव 40, 80, 160, 320, 500 जी0बी0 या उससे अधिक क्षमता में उपलब्ध है।

सी0पी0यू0 प्रोसेस और मैमोरीः-


सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट या सी0पी0यू0ः- सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट कम्प्यूटर के सभी आॅपरेशनों का समन्वय एवं संगठन करके प्रणाली को नियंत्रित करती हैं। यह की-बोर्ड जैसे विभिन्न इनपुट उपकराणों द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन करती है और प्रिंटर जैसे विभिन्न पैरीफेरल उपकरणों के लिए आउटपुट का इंतजाम करती है। यह प्राइमरी स्टोरेज में स्टोर निर्देशों को लाने के लिए उत्तरदायी होती है, उनकी व्याख्या करती है और उन सभी हार्डवेयर यूनिटों को निर्देश जारी करती है जो उन निर्देशों पर कार्य करने के लिए उत्तरदायी होता है।

ए0एल0यू0ः- यह उपकरण कम्प्यूटर की सभी गणितीय और तार्किक आॅपरेशनों को करने के लिए जिम्मेदार होता है। गणितीय आॅपरेशनों का प्रयोग संख्याओं की तुलना और ‘‘लैस दैन‘‘, ‘‘इक्वल टू‘‘ और ‘‘ग्रेटर दैन‘‘ इत्यादि निरूपित करने में किया जाता है। ए0एल0यू0 टेक्स्ट व संख्याओं दोनांे को ही संभाल सकता है। कभी-कभी कम्प्यूटर में गणितीय को-प्रोसेसर लगा होता है जो दूसरा माइक्रोप्रोसेसर होता है गणितीय कार्य के लिए ही होता है। को-प्रोसेसर का मुख्य लाभ गणना की बढी हुई गति होती है।
कम्प्यूटर स्मृति या मैमोरी का कार्य किसी भी निर्देशों, सूचना अथवा परिणामों को संचित करके रखना होता है। कम्प्यूटर के सी0पी0यू0 में होने वाली समस्त क्रियायें सर्वप्रथम स्मृति में जाती है। यह एक प्रकार के कम्प्यूटर का संग्रहशाला है। मैमोरी कम्प्यूटर का अत्यधिक महत्वपूर्ण भाग है। जहां डाटा, सूचना और प्रोग्राम प्रक्रिया के दौरान स्थित रहते है और आवश्यकता पडने पर तत्काल उपलब्ध होते है।

प्राइमरी मैमोरीः-


1. रैमः- त्ंदकवउ ।बबमेे डमउवतल ;त्।डद्ध कम्प्यूटर की यह सबसे महत्वपूर्ण मैमोरी होती है। इस मैमोरी में प्रयोगकर्ता अपने प्रोग्राम केा कुछ देर के लिए स्टोर कर सकते हैं। साधारण भाषा में इस मैमोरी को त्।ड कहते है। यही कम्प्यूटर की बेसिक मैमोरी भी कहलाती है। यह निम्नलिखित दो प्रकार की होती है-
डायनेमिक रैम ;क्त्।डद्ध:- डायनेमिक का अर्थ है गतिशील इस रैम पर यदि 10 आंकडे संचित कर दिए जाएं और फिर उनमंे बीच के दो आंकडे मिटा दिए जाएं, तो उसके बाद वाले बचे सभी आंकडे बीच के रिक्त स्थान में स्वतः चले जाते है और बीच के रिक्त स्थान का उपयोग हो जाता है।
स्टैटिक रैम :- स्टैटिक रैम में संचित किए गये आंकडे स्थित रहते है। इस रैम में बीच के दो आंकडे मिटा दिए जाएं तो इस खाली स्थान पर आगे वाले आंकडे खिसक कर नहीं आएंगे। फलस्वरूप यह स्थान तब तक प्रयोग नहीं किया जा सकता जब तक कि पूरी मैमोरी ‘‘वाश‘‘ करके न किया जाए।
2. रोम :- इसमें संचित सूचना को केवल पढा जा सकता है उसे परिवर्तित नहीं किया जा सकता कम्प्यूटर के बंद होने पर भी राम में सूचनाएं संग्रहित रहती हैं नष्ट नहीं होती।
रीड ओनली मैमोरी:- आधुनिक कम्प्यूटर की महत्वपूर्ण मैमोरी रोम उसे कहते है, जिसमें लिखें प्रोग्राम के आउटपुट को केवल पढा जा सकता है। बेसिक आउटपुट सिस्टम ;ठप्व्ैद्ध नाम का एक प्रोग्राम रोम का उदाहरण है, जो कम्प्यूटर के आॅन होने पर उसकी सभी इनपुट डिवाइसेस की जांच करने एवं नियंत्रित करने का काम करता है।
इरेजिबल प्राॅम :- इस प्ण्ब्ण् में संचित किया गया प्रोग्राम पराबैंगनी किरणों के माध्यम से मिटाया ही जा सकता है। फलस्वरूप यह प्ण्ब्ण् दाबारा प्रयोग की जा सकती है।
इलैक्ट्रिकल ई-प्राॅम:- इलैक्ट्रिकल इरेजिबल प्राॅम पर स्टोर किये गये प्रोग्राम को मिटाने अथवा संशोधित करने के लिए किसी अन्य उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। कमाण्ड्स दिये जाने पर कम्प्यूटर में उपलब्ध इलैक्ट्रिक सिंग्नल्स ही इस प्रोग्राम को संशोधित कर देते हैं।

मदर बोर्डः-


यह कम्प्यूटर का सबसे मेन पार्ट होता है। इसके बिना हम कम्प्यूटर की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। वैसे तो कम्प्यूटर में कैबिनेट के अन्दर हर पार्ट अपने आप में जरूरी होता हैं। परन्तु मदर बोर्ड का स्थान सबसे उपर है क्योंकि इसके बिना हम कम्प्यूटर की कल्पना तक नहीं कर सकते हैं। यह कम्प्यूटर का मेन सर्किट बोर्ड होता हैं। यह प्रोसेसिंग डिवाइस का एक हिस्सा है।

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